कश्मीर के ‘शेरों’ की ‘कुत्ते-बिल्ली’ जैसी हालत : जेल में ‘तूतू-मैंमैं’ पर उतर आए महबूबा-उमर !

Written by

* भाजपा के साथ हाथ मिलाने पर जेल में जंग

* दोनों नेताओं को अलग-अलग रखा गया

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 12 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। अभी 4 अगस्त, 2019 तक कश्मीर में शेरों की तरह घूमने वाले, खुद को कश्मीरीरियों की आवाज़ समझने वाले और कश्मीर को जागीर मानने वाले दो मुख्य राजनीतिक दलों के अध्यक्षों की हालत ‘कुत्ते-बिल्ली’ जैसी हो गई है। वर्षों से जम्मू-कश्मीर में एक-दूसरे के विरुद्ध राजनीति करने वाले ये दोनों राजनीतिक दल 3 व 4 अगस्त को तो एक मंच पर भी आ गए और राज्यपाल सत्यपाल मलिक से एकजुट होकर मिलने पहुँच गए, परंतु 8 ही दिन के भीतर इन सभी कश्मीरी नेताओं की ऐसी दुर्गति हो गई कि वे अपनी वर्तमान हालत के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने पर आमादा हो गए। बात इतने तक ही नहीं रुकी, दोनों नेता तूतू-मैंमैं पर उतर आए और अधिकारियों को दोनों को अलग-अलग जगह ट्रांसफर करना पड़ा।

हम बात कर रहे हैं नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की। अभी 8 दिन पहले तक तो उमर अब्दुल्ला, उनके पिता फारूक़ अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती ने राजनीतिक मतभेद भुला कर कश्मीरियों के लिए कुछ भी करने का दिखावा करते हुए दिल्ली से श्रीनगर तक उत्पात मचा दिया था, परंतु गत 4 अगस्त की आधी रात तीनों को नज़रबंद कर दिया गया। इसके बाद जो हुआ, उसकी इन नेताओं ने कल्पना भी नहीं की थी। हाँ, इनके मन में आशंका अवश्य थी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर की धारा 35ए के साथ छेड़छाड़ करने से आगे मूल धारा 370 को हटा भी सकते हैं। यही हुआ भी।

जेल में भाजपा के नाम पर भिड़ गए उमर-महबूबा

उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ़्ती अभी भी नज़रबंद और हिरासत में हैं। इन दोनों को श्रीनगर के हरि निवास महल में रखा गया था। नज़रबंदी के समय तो इन्हें एहसास भी नहीं था कि जिस जम्मू-कश्मीर में वे शेरों की तरह घूमा करते थे, उसी जम्मू-कश्मीर की धरती पर उनके बीच कुत्ते-बिल्ली की तरह झगड़ा भी होगा, परंतु समय सब कुछ करवाता है। अपने जीवन के सबसे बुरे दिनों से गुज़र रहे ये दोनों नेता बीते दिनों एक-दूसरे पर बरस पड़े। दोनों इस बात को लेकर सिर पीट रहे थे कि कश्मीर में भाजपा को जड़ें जमाने क्यों दी गई और साथ ही इसके लिए एक-दूसरे पर आरोप भी लगा रहे थे। दोनों के बीच बहस के दौरान उमर महबूबा पर चिल्ला उठे और कहने लगे, ‘आपके दिवंगत पिता मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने वर्ष 2015 में और 2018 में भाजपा से गठबंधन किया था।’ महबूबा भी कहाँ चुप रहने वाली थीं। महबूबा ने भी उमर को याद दिलाया, ‘आपके पिता फारूक़ अब्दुल्ला का गठबंधन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में एनडीए के साथ था।’ महबूबा ने ऊँची आवाज़ में उमर से कहा, ‘आप तो वाजपेयी सरकार में विदेशी मामलों के जूनियर मंत्री थे। आपके दादा शेख अब्दुल्ला भी 1947 में जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के लिए ज़िम्मेदार हैं।’

उमर-महबूबा को अलग-अलग रखा गया

उमर और महबूबा के बीच हुई इस कहासुनी को वहाँ तैनात अधिकारियों ने भी सुना। अधिकारियों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच विवाद बढ़ने के बाद दोनों को अलग-अलग रखने का निर्णय किया गया, जिसके बाद उमर को महादेव पहाड़ी के पास चेश्माशाही में वन विभाग के भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि महबूबा हरि निवास महल में ही हैं।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares