कश्मीर घाटी में अमन की फ़रिश्ता बनीं ये दो महिला IAS-IPS अधिकारी

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 13 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर नेताओं की तमाम गीदड़भभकियों और तथाकथित आशंकाओं के उलट संपूर्ण शांति है। जनजीवन सामान्य है। लोगों ने हर्षोल्लासपूर्ण व उत्साहपूर्ण माहौल में बकरीद भी मनाई। न कहीं बम बरसे, न कोई गोली चली।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की रणनीति पूरी तरह सफल रही है और अलगाववादियों और कश्मीर को जागीर समझने वाले नेताओं की बोलती बंद हो गई है। कश्मीर में सब कुछ सामान्य करने में मोदी-शाह-डोभाल की त्रिपुटी की रणनीतिक सफलता की चहुँओर सराहना हो रही है, तो पड़ोसी पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान खान को कश्मीरियों ने जहाँ एक ओर जोरदार तमाचा जड़ा है, वहीं उसे पूरी दुनिया से भी ठोकरें मिली हैं।

कश्मीर में फैली शांति और विश्वास की इस सुगंध में नि:संदेह मोदी, शाह और डोभाल की रणनीतिक सफलता है, परंतु धरातल पर इस सफलता को फलदायी बनाने में केन्द्र सरकार और जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे ही अधिकारियों में दो महिला अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं, जो कश्मीर में शांति और विश्वास का माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इनके नाम हैं डॉ. सैयद सहरीश असगर और पी. के. नित्य। असगर जहाँ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की अधिकारी हैं, वहीं नित्य भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की अधिकारी हैं। दोनों के अलग-अलग उत्तरदायित्व दिए गए हैं और दोनों महिला अधिकारी लीक से हटके मिले इस उत्तरदायित्व को बख़ूबी अंजाम दे रही हैं। 2013 बैच की आईएएस अधिकारी असगर ने कभी सोचा नहीं था कि एक दिन उन्हें कश्मीर घाटी के लोगों और उनसे सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे उनके परिजनों के बीच सेतु बनने का अवसर मिलेगा। असगर को घाटी में रहने वाले लोगों की उनके परिजनों से फोन पर बता कराने और डॉक्टर्स मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी दी गई है। दूसरी तरफ श्रीनगर में ही तैनात 2016 बैच की आईपीएस अधिकारी नित्य को राम मुंशी बाग़ से हरवन दागची गाँव तक के क्षेत्र की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी दी गई है, क्योंकि हिरासत में लिए गए कश्मीरी नेताओं को इसी रास्ते पर स्थित जगह पर रखा गया है।

पद सूचना आयुक्त का, काम क्राइसिस मैनेजमेंट का

आईएएस अधिकारी डॉ. सईद सहरीश असगर को धारा 370 हटाए जाने से चार दिन पहले ही जम्मू-कश्मीर प्रशासन का सूचना निदेशक (ID) नियुक्त किया गया था। सूचना निदेशक का काम तो लोगों को सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक करना होता है, परंतु असगर पिछले एक सप्ताह से उन लोगों की परेशानियाँ सुन रही हैं, जो धारा 370 हटाए जाने के बाद पैदा हुई परिस्थिति के बीच अपनों से बात करने को तरस गए थे। असगर क्राइस मैनेजमेंट (आपदा प्रबंधन) का काम कर रही हैं। असगर घाटी के लोगों की उनसे दूर बैठे परिजनों से फोन पर बातचीत करा रही हैं और उन्हें आश्वस्त व संतुष्ट कर रही हैं। एक वर्षीय पुत्र की माँ असगर एमबीबीएस हैं और पहले जम्मू में प्रैक्टिस करती थीं। उनके पति पुलवामा में पुलिस कमिश्नर हैं। असगर कहती हैं, ‘डॉक्टर के तौर पर मैं मरीजों का इलाज करती थी लेकिन आज घाटी में अलग चुनौतियाँ हैं। इसमें कड़ाई और नरमी एक साथ चाहिए। अगर महिलाएँ समाज में बदलाव ला सकती हैं, तो उन्हें खुशी होगी।’

नित्य ने कॉर्पोरेट जॉब छोड़ कर स्वीकारी चुनौती

छत्तीसगढ की आईपीएस अधिकारी पी. के. नित्य पूर्व में एक सीमेंट कंपनी में प्रबंधक के रूप में कॉर्पोरेट जॉब करती थीं। केमिकल इंजिनियरिंग से बीटेक करने वाली नित्य कश्मीरी और हिंदी के अलावा तेलुगू भी बहुत अच्छी बोलती हैं। इस समय नित्य श्रीनगर में नेहरू पार्क की सब डिवीज़नल पुलिस अधिकारी (SDPO) के रूप में कार्यरत् हैं। नित्य ने कहा, ‘आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ ही मुझे वीवीआईपी की सुरक्षा भी देखनी होती है। यह छत्तीसगढ़ की मेरी जिंदगी से बिलकुल अलग है। उन्हें कई बार गुस्साए लोगों का सामना करना पड़ता है। वह बताती हैं, ‘मैं छत्तीसगढ़ के दुर्ग से हूं जहां हमेशा शांति रही है लेकिन मुझे चुनौतियां पसंद हैं।’

You may have missed