अनूठे प्रयोग : इन कंपनियों ने कर्मचारियों को छुट्टियाँ देकर पाए सकारात्मक परिणाम !

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 30 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। सृष्टि के निर्माण के साथ ही कुछ नियम और सभ्याताओं का जन्म हो चुका था, जिसमें मनुष्य के खाने-पीने से लेकर सोने, कार्य करने और व्यवहार तक की समय सीमा तय की गई है। वास्तव में एक मनुष्य को कितने समय और कितना काम करना चाहिए, यह भी निश्चित किया गया है, परंतु आधुनिकता और बढ़ती प्रतियोगिता, सबसे श्रेष्ठ बनने की, सबसे अमीर होने की, सबसे बुद्धिवान होने की होड़ व दौड़ इत्यादि के बीच मनुष्य स्वयं को ही भूल गया है कि आख़िर वह है कौन ? आज मानव ने अपने आपको कार्य में इनता व्यस्त कर लिया है कि वह ये भी नहीं समझ पाता कि उसकी सेहत के लिए क्या आवश्यक है। यूँ तो प्रकृति और समाज के अनुसार भी मानव को किसी भी काम के लिए 8 घंटे सुनिश्चि किये गये हैं, परंतु अधिक पाने के लोभ में लोग 12-12 घंटे काम करते हैं, कुछ लोग तो सोते तक नहीं, बस केवल काम में लगे रहते हैं। परिणामतः इससे स्वयं की सेहत तो बिगड़ रही है, साथ ही काम की गुणवत्ता पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इतना ही नहीं, काम करने वालों के साथ-साथ काम करवाने वालों को भी अपनी कमाई बढ़ाने की ऐसी ललक जगी है कि वे अपने कर्मचारियों के निजी हित की चिंता किए बिना उनसे अधिक से अधिक काम लेते हैं, परंतु हाल ही में आई कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने अधिक घण्टे काम करने के सकारात्मक प्रभाव और कम समय में अधिक परिणाम हासिल करने जैसे सकारात्मक प्रभाव को परखने का प्रयास किया।

माइक्रोसॉफ्ट ने दी छुट्टी और बढ़ गया मुनाफा

हाल ही में जापान ब्रांच की MICROSOFT कंपनी ने अपने कर्मचारियों को सप्ताह की 3 छुट्टी देकर एक प्रयोग किया, जिसका परिणाम अत्यंत सकारात्मक रहा। कंपनी ने पाया कि सप्ताह में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी देने से कर्मचारियों का काम करने का उत्साह दुगुना हुआ, उनके काम की गुणवत्ता में भी कहीं अधिक सुधार आया, जिससे कंपनी की प्रोडिक्टिविटी भी बढ़ी। माइक्रोसॉफ्ट के इस प्रयोग के नतीजे बेहद शानदार रहे। कंपनी की उत्पादकता 39.9 फीसदी बढ़ गई। कर्मचारियों ने इस दौरान छुट्टियाँ भी कम लीं। यही नहीं कंपनी में 23.1 प्रतिशत कम बिजली की खपत हुई, 58.7 % कम पन्‍ने प्रिंट किए गए। इसका असर ये हुआ कि कंपनी के खर्च में भी कमी आई।

वेर्सा एजेंसी को भी मिले सकारात्मक परिणाम

इसे एक और उदाहरण से समझा जा सकता है। आस्ट्रेलिया की वेर्सा एजेंसी ( VERSA Agency) नाम की डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी लगभग 1 वर्ष से बुधवार को बंद रहती है। यह कंपनी अपने कर्मचारियों से सप्ताह में 4 दिन ही काम लेती है, परंतु पैसे पूरे 5 दिवसीय सप्ताह के हिसाब से देती है। वेर्सा के कर्मचारी सोमवार और मंगलवार को काम करते हैं, फिर गुरुवार-शुक्रवार को दो दिन के लिए ऑफि़स आते हैं। बुधवार को कोई मीटिंग नहीं रखी जाती, परंतु किसी ग्राहक को कोई ज़रूरी काम हो, तो कंपनी के कर्मचारी फोन पर उपलब्ध रहते हैं। वेर्सा की संस्थापक और सीईओ काथ ब्लैकहैम का कहना है कि इस स्कीम से कंपनी का राजस्व 46 प्रतिशत बढ़ा है और मुनाफा लगभग तीन गुना हो गया है।

कर्नाटक की कंपनी सोने के बदले दे रही 1 लाख रुपए

यह तो विदेशी देशों की बात हुई। भारत में भी एक कंपनी ने इसी प्रकार की अनूठी पहल की है। कभी आपने सोचा है कि 9 घंटे सोने के लाखों रुपए मिलने लगे, तो क्या हो ? ऑनलाइन फर्म वेकफिट कंपनी ने कुछ ऐसा ही प्रयोग कर किया है। ऑनलाइन फर्म वेकफिट कंपनी अब सोने के लिए आपको एक लाख रुपये देगी। आइये जानते हैं क्या है ये अनोखी स्कीम ? कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू की ऑनलाइन फर्म वेकफिट (Wakefit) ने यह ऑफर दिया निकाला है। ऑनलाइन स्लीप सॉल्यूशन फर्म ने अपने इस प्रोग्राम को वेकफिट स्लीप इंटर्नशिप का नाम दिया है। इस इंटर्नशिप के लिए सिर्फ कुछ लोगों का ही चयन होगा। यहाँ आपको कंपनी की ओर से दिए गए गद्दे पर ही सोना होगा। आपको प्रतिदिन यह बताना होगा कि आपको नींद कैसी आई ? अच्छी या बुरी। कंपनी सोने के लिए कुछ लोगों की काउंसलिंग करेगी। उनके सोने के पैटर्न पर नज़र रखी जाएगी। इसके बाद विशेषज्ञ निद्रारत् लोगो की नींद का रिकॉर्ड दर्ज करेंगे। उनके सोने के तरीके पर ध्यान रखा जाएगा और सभी चयनित लोगों को स्लीप ट्रैकर भी दिया जाएगा, जिससे नींद के दौरान गतिविधि को ट्रैक किया जा सके। कंपनी का नियम है कि इस योजना में भाग लेने वाले चयनित लोगों को 100 दिनों के लिए हर दिन 9 घंटे सोना होगा। केवल वे ही, जो अपनी नींद को हर चीज़ से ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं।

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