समंदर खोद कर पस्त हुआ पाकिस्तान, नहीं मिला ‘ख़याली ख़जाना’ !

तेल कंपनियों की दुहाई से इमरान की हुई जगहँसाई : 80 लाख डॉलर खर्च करके भी रहे खाली हाथ

पिछले दिनों पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया में एक ख़बर जबर्दश्त वायरल हुई। इस ख़बर में कहा गया कि कंगालियत से गुज़र रहे पाकिस्तान में बहुत बड़ा खज़ाना मिलने वाला है। खुद प्रधानमंत्री इमरान खान ने मार्च महीने में घोषणा की थी कि वे शीघ्र ही देशवासियों के साथ एक गुड न्यूज़ शेयर करेंगे। तब से हर पाकिस्तान ख़याली पुलाव पका रहा था, परंतु दो महीनों के भीतर ही सारी उम्मीदों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है।

दरअसल कुछ तेल कंपनियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को जानकारी दी कि कराची के समुद्री तटों पर केकरा-1 क्षेत्र में ज़मीन के नीचे विशालकाय तेल और गैस भंडार है। बस, फिर क्या था। इमरान खान ने केकरा-1 क्षेत्र में खुदाई शुरू करवा दी। दावे के अनुसार 4000 मीटर नीचे तेल-गैस भंडार मिलने वाला था, परंतु पिछले दो-ढाई महीनों में खुदाई 4810 मीटर तक खुदाई हो चुकी है और तथाकथित ख़जाना ख़याली ख़जाना बन चुका है। पाकिस्तान में केकरा-1 क्षेत्र में समंदर के नीचे धरती की खुदाई पर अब तक 75 से 80 अरब खर्च हो चुके हैं, परंतु मिला कुछ भी नहीं है।

इमरान की हो रही किरकिरी

अमेरिकन तेल-गैस कंपनी एक्सॉन मोबिल के साथ इटली की ईएनआई, पाकिस्तान की तेल और गैस कंपनी मिल कर केकरा-1 ब्लॉक में खुदाई अभी भी कर रही हैं, परंतु अब तक कोई ख़जाना नहीं मिलने के साथ ही इमरान खान अपने ही घर में घिरते नज़र आ रहे हैं। पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री चौधरी निसालर अली खान का धैर्य तो गत रविवार को ही टूट गया और उन्होंने आरोप लगाया कि किसी ने भी तेल भंडारों की खोज के इमरान के दावे पर सवाल उठाने की ज़रूरत नहीं समझी। दूसरी तरफ चर्चा यह भी है कि कुछ तेल कंपनियों ने कमीशन और अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में इमरान को ग़लत जानकारी दी। 80 लाख डॉलर की लागत के साथ शुरू किए गए इस मिशन में 25-25 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ चार कंपनियों ने खुदाई शुरू की थी, परंतु अब तक कोई ख़जाना नहीं मिलने के बाद पाकिस्तान, इमरान खान, उनके मंत्रियों और सरकार का पूरी दुनिया में मज़ाक उड़ाया जा रहा है।

जो कभी नहीं मिला, वह अभी कैसे मिलेगा ?

पाकिस्तान में भूगर्भीय तेल-गैस भंडार खोजने के लिए पूर्व में कई प्रयास किए गए, परंतु तमाम प्रयास विफल रहे और कुछ हाथ नहीं लगा। पाकिस्तान में 1964 में सन ऑयल कंपनी ने दो कुओं की खुदाई की, मगर दोनों कुएँ सूखे पाए गए। 8 साल बाद जर्मीनी की विंटर शैल कंपनी ने तीन कुएँ खोदे और कुछ नहीं मिलने पर खुदाई बंद कर दी। 1972 में और 1975 में भी एक-एक कुओं की खुदाई में कोई ख़जाना नहीं मिला। 1976 में यूएस की मैराथन कंपनी ने विफल कोशिश की। 1978 में कनाडाई कंपनी हस्की भी विफल रही। 1985 में ओजीडीसीएल की खोज फुस्स साबित हुई, तो 1989 में ऑक्सीडेंट कंपनी की ओर से खंगाले गए कुछ कुएँ सूखे पाए गए। 1992 में न्यूज़ीलैण्ड की कैंटरबरी और 2000 में अमेरिका की ओसियन कंपनी ने हाथ आज़माए, जिसमें विफलता मिली। 2004 में फ्रेंच कंपनी ने तेल भंडार खोज अभियान शुरू किया, जो विफल रहा। 2005 में पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड और 2007 में नीदलैण्ड की शेल कंपनी ने तेल भंडार ढूँढने की कवायद की, जो नाकाम रही। 2010 में शार्क-1 ने पाकिस्तान के गहरे समुद्रों की खाक़ छान डाली, सब बेकार गया। कुल मिला कर 17 गंभीर कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान की सरज़मीं के ज़हन से कोई तेल-गैस भंडार नहीं मिला। यहाँ सवाल उठता है कि जो पहले कभी नहीं हुआ, वह अब कैसे होगा ?

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