हर मोर्चे पर पिटता ही जा रहा है पाकिस्तान : अब खुली एक और पोल ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 2 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत के सामने कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान की बार-बार पिटाई हुई है, परंतु नापाक पड़ोसी है कि सुधरने का नाम ही नहीं ले रहा। ऊपर से सीनाज़ोरी करने से भी बाज़ नहीं आ रहा। मालदीव की संसद में भारतीय प्रतिनिधि के सामने पाकिस्तानी प्रतिनिधि को जम्मू कश्मीर मामले में किरकिरी झेलनी पड़ी और अब भारतीय नौसेना के अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान की पोल खुल गई है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता (MEA) ने खुलासा किया है कि नापाक पड़ोसी देश कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान के झूठे दावों को मानने का दबाव बना रहा है।

पाक में कैद कुलभूषण जाधव को मिला पहला कॉन्सुलर एक्सेस

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना के अधिकारी कुलभूषण जाधव को उनकी गिरफ्तारी के 3 साल बाद अंततः पहला कॉन्सुलर एक्सेस मिला। इसमें पाकिस्तान स्थित भारत के डिप्टी हाई कमिशनर गौरव अहलूवालिया ने सोमवार को कुलभूषण जाधव से पहली बार मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा कि उसे डिप्टी हाई कमिशनर गौरव अहलूवालिया से विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त होने का इंतज़ार है। इस बीच विदेश मंत्रालय की ओर से यह भी कहा गया कि कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान का भारी दबाव है। उनसे बातचीत में एक बात साफ तौर पर छनकर आई है कि पाकिस्तान के झूठे दावों को लेकर कुलभूषण जाधव भारी दबाव में हैं। विदेश मंत्रालय ने कुलभूषण जाधव से हुई मुलाकात के बारे में उनकी माँ को भी जानकारी दी है। मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भारत, कुलभूषण जाधव को स्वदेश वापस लाने के लिये हर संभव प्रयास कर रहा है।

कुलभूषण मामले में भी बार-बार हुई पाकिस्तान की फजीहत

उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर मामले में पाकिस्तान की विश्व के लगभग हर मंच पर पिटाई हुई है। भारतीय नागरिक और नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव के मामले में भी उसका यही हाल हुआ है। बिज़नेस के सिलसिले में ईरान गये कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने ईरान से अपहरण किया और उन्हें बलूचिस्तान से गिरफ्तार करने का दावा किया था। 29 मार्च-2016 को पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में जारी पाकिस्तान विरोधी विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त होने और इलियास हुसैन मुबारक पटेल के फर्जी नाम से पाकिस्तान में भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ-RAW) के लिये जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जबकि भारत का दावा है कि कुलभूषण जाधव कभी पाकिस्तान गये ही नहीं। उन्होंने नौसेना से सेवा निवृत्त होने के बाद ईरान में बिज़नेस शुरू किया था, जिसके सिलसिले में वह ईरान गये थे, जहाँ से पाकिस्तान ने उनका अपहरण किया है और उन्हें बलूचिस्तान से गिरफ्तार बताकर उनके विरुद्ध जासूसी के फर्जी केस दर्ज किये हैं। पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने कुलभूषण को 10 अप्रैल-2017 को जासूसी के आरोप में मृत्युदंड की सज़ा सुनाई थी, जिसके खिलाफ भारत ने अंतर्राष्ट्रीय न्याय अदालत (INTERNATIONAL COURT OF JUSTICE-ICJ) में अपील की थी। आईसीजे ने 10 मई-2017 को जाधव की फाँसी की सज़ा पर रोक लगा दी। इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय अदालत में भारत और पाकिस्तान की ओर से इस मामले में दलीलें पेश की गई, जिसमें भी पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी और आईसीजे ने इसी साल 17 जुलाई को जाधव की फाँसी की सज़ा पर रोक बरकरार रखते हुए भारत की दलीलों को मान्य रखा और पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस उपलब्ध कराने का आदेश दिया।

अंतर्राष्ट्रीय नियमों-आदेशों का उल्लंघन करना पाक की आदत

इसके साथ ही अदालत ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव पर लगाये गये आरोपों के बारे में पुनर्विचार करने की भी हिदायत दी है, परंतु पाकिस्तान हर नियम और आदेश का उल्लंघन करने के लिये जाना जाता है। जैसा कि आतंकियों पर कार्यवाही को लेकर उसे संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद, अमेरिका और भारत समेत कई देशों तथा संस्थाओं की ओर से बार-बार हिदायत दिये जाने के बावजूद वह कान में तेल डालकर बैठा है और किसी की भी बात सुनने को तैयार नहीं है। आज ही रूस की राजधानी मॉस्को में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान उसके यहाँ आतंकियों पर कार्यवाही नहीं कर रहा है, जो भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट है।

क्या होता है कॉन्सुलर एक्सेस ?

कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस देने के मामले में पाकिस्तान की भारत के सामने एक और कूटनीतिक हार हुई है और उसे भारत के समक्ष झुकना पड़ा तथा जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस देना पड़ा। हालाँकि इसमें में भी उसने अपनी तरफ से रुकावटें पैदा करने की पूरी कोशिश की। पहले जब उसने कॉन्सुलर एक्सेस में जाधव से भारतीय अधिकारी की मुलाकात के दौरान पाकिस्तान के एक अधिकारी को उपस्थित रखने की शर्त रखी तो भारत ने उसकी शर्त मान्य रखने से इनकार कर दिया। आज जब यह मुलाकात सुनिश्चित हुई, तब भी उसने इस्लामाबाद में मुलाकात की जगह बदल दी। इन सबके बावजूद पाकिस्तान अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हुआ और उसकी हर चाल नाकाम हो गई। वियना संधि के अनुच्छेद 36 के अनुसार और आईसीजे के आदेशानुसार जब किसी देश का नागरिक अन्य देश में बंदी होता है तो उस देश के अधिकारियों को उस कैदी से मुलाकात की सुविधा देनी होती है, जिसे कॉन्सुलर एक्सेस कहते हैं। इस एक्सेस में कैदी को कई अन्य सुविधाएँ भी दी जाती हैं जैसे कि कैदी के देश के अधिकारी या राजनयिक को मुलाकात के दौरान कैदी से पूछताछ करने का अधिकार दिया जाता है, जिसमें अधिकारी कैदी से पूछते हैं कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है, कैदी अपने देश से किस प्रकार की मदद चाहता है ? इस प्रकार अधिकारी पूछताछ करने के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करता है और अपने देश की सरकार को भेजता है। इसके बाद सरकार उस रिपोर्ट के आधार पर अपनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाती है। इस कॉन्सुलर एक्सेस का सिद्धांत वर्ष 1950-60 के दशक में बना था। 1963 में कॉन्सुलर एक्सेस पर वियना कन्वेंशन (VCCR) हुई थी।

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