अब ‘पाकिस्तान’ का नाम बदल देंगे बिहार के लोग, प्रशासन ने भी स्वीकारी माँग

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 18 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। वैश्विक आतंकियों को आश्रय देने के कारण पड़ोसी देश पाकिस्तान के ‘आतंकिस्तान’ ‘टेररिस्तान’ जैसे कई नाम पड़ गये हैं। इतना ही नहीं, वहाँ के पीएम इमरान खान तालिबान समर्थक होने के कारण उन्हें भी पाकिस्तान में विपक्षी लोग ‘तालिबान खान’ कहते हैं, परंतु अब भारत ‘पाकिस्तान’ का नाम बदलने जा रहा है। हालाँकि यह और बात है कि भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान का नाम नहीं, बल्कि बिहार के पूर्णिया जिले में स्थित पाकिस्तान नाम के एक मोहल्ले का नाम बदलने जा रहा है। क्योंकि यहाँ के निवासियों को लोग पाकिस्तानी कहते हैं, जो उन्हें पसंद नहीं आता है। इसलिये इन लोगों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि वे उनके मोहल्ले (टोले) का नाम बदल दें, जिला प्रशासन ने भी उनकी माँग स्वीकार कर ली है, लिहाजा जल्दी ही पाकिस्तान का नाम बदल जाएगा।

सिंधिया गाँव के टोले का नाम कैसे पड़ा पाकिस्तान ?

बिहार में जिला मुख्यालय पूर्णिया से लगभग 30 किलोमीटर दूर श्रीनगर ब्लॉक की सिंधिया ग्राम पंचायत में स्थित पाकिस्तान टोले के निवासियों ने उनके टोले का नाम बदलने की माँग करने वाला आवेदनपत्र अंचलाधिकारी (BDO) को सौंपा है। इसमें स्थानीय निवासियों ने कहा है कि उन्हें अपने टोले के नाम से नफरत है और इस नाम के कारण उन्हें अड़ोस-पड़ोस के टोला-मोहल्ले वाले पाकिस्तानी कह कर बुलाते हैं, जो उन्हें पसंद नहीं है। इतना ही नहीं, इस नाम के कारण उनकी बेटियों की शादी तक में दिक्कतें पेश आती हैं और लोग हँसी भी उड़ाते हैं। कोई पाकिस्तान में बारात लेकर आने के लिये तैयार नहीं होता है। ग्रामीणों के अनुसार इस नाम के कारण वे सरकारी सुविधाओं से भी वंचित रह जाते हैं। क्योंकि नाम के कारण अधिकारी पाकिस्तान के विकास में रुचि ही नहीं लेते हैं। इस कारण उन्हें स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्रधानमंत्री शौचालय योजना और प्रधानमंत्री उज्जवला योजना आदि जैसे कोई लाभ नहीं मिले हैं और 21वीं सदी में भी ग्रामजन पिछड़ी जीवनशैली जीने को मजबूर हैं।

इस टोले के लोगों की माँग को पूर्णिया के जेडीयू सांसद संतोष कुशवाहा ने भी समर्थन दिया है। ग्रामजनों की माँग का समर्थन करते हुए संतोष कुशवाहा ने कहा कि गाँव के लोग यदि नाम बदलने के लिये कह रहे हैं तो इसका समर्थन किया जाना चाहिये। वे इस मामले में ग्रामजनों की जो भी मदद की जा सकेगी, वह जरूर करेंगे। ग्रामजनों ने उनके टोले का नाम बदल कर बिरसा मुंडा के नाम पर बिरसा नगर रखने की माँग की है। ग्रामीणों की माँग के बारे में जिला प्रशासन का कहना है कि प्रक्रिया के तहत टोले का नाम बदलने की पहल की जाएगी।

अधिकारी भी नहीं करना चाहते हैं पाकिस्तान का विकास

इस टोले में रहने वाले लोगों की संख्या लगभग 1,200 है और इस टोले में 350 से 400 मतदाता हैं। इस टोले में रहने वाले लोग संथाली आदिवासी समुदाय के हैं और हिंदू जीवन शैली से जीवन जीते हैं, खेती और मजदूरी इनका मुख्य व्यवसाय है। वे पूजा पाठ करते हैं। इस टोले का नाम पाकिस्तान कैसे पड़ा ? इस बारे में ग्राम जनों को कोई ठोस जानकारी नहीं हैं, परंतु अपने बुजुर्गों से सुनी बातों के आधार पर ग्रामीण बताते हैं कि आज़ादी के बाद पाकिस्तान से भारत आये कुछ लोग यहाँ आकर बसे थे, जो पाकिस्तानी कहलाते थे। बाद में प्रशासन ने उन्हें अन्यत्र बसा दिया। उनके जाने के बाद यहाँ संथाला जाति के आदिवासियों ने रहना शुरू कर दिया, परंतु टोले का नाम वही चला आ रहा है, जो इन लोगों के लिये एक दाग जैसा बन गया है और ये लोग इस दाग को दूर करना चाहते हैं।

यह टोला सिंधिया गाँव से बहने वाली एक नदी के दूसरे छोर पर स्थित है। यह नदी तो अब सूख चुकी है, परंतु इस पर बहुत पहले बना एक पुल ही इस टोले में आवागमन का एक मात्र साधन और रास्ता है। इस टोले में प्रधानमंत्री हर घर शौचालय योजना, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और स्कूल तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जैसी कोई विकास योजनाएँ नहीं पहुँची हैं, जिसके कारण यह लोग 21वीं सदी में भी 18वीं सदी जैसा पिछड़ा हुआ जीवन जीने को मजबूर हैं। सुविधाओं के अभाव में इस टोले के बच्चे उच्च शिक्षा से भी वंचित रह जाते हैं।

स्कूल इस टोले से लगभग 2 किलोमीटर दूर है, जबकि उच्च शिक्षा प्राप्त करनी हो तो लगभग 12 किलोमीटर दूर श्रीनगर प्रखंड जाना पड़ता है। इतनी दूर प्रतिदिन आवागमन करना टोले के लड़के-लड़कियों के लिये संभव नहीं हो पाता है, जिससे वे स्कूली पढ़ाई के बाद पढ़ना छोड़ देते हैं। यही हाल स्वास्थ्य सुविधा को लेकर भी है। किसी के बीमार हो जाने की स्थिति में लोगों को 12 किलोमीटर दूर श्रीनगर प्रखंड में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जाना पड़ता है।

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