पाकिस्तान में जन्मा यह ‘गुजराती’ 50 साल बाद अब बनेगा भारतीय : जानिए क्या है पूरी रोचक कहानी ?

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पाकिस्तान के कराची में जन्मे 53 साल के एक शख्स को जीवन के 50 साल भारत में गुजारने के बाद अब भारतीय नागरिकता मिलने जा रही है। भारत के मुंबई शहर में पिछले 50 साल से रह रहे आसिफ कारडिया नाम का यह शख्स मूल रूप से गुजराती है, क्योंकि उसके माता-पिता आज़ादी से पहले भारत में रहते थे, परंतु आसिफ का जन्म कराची में हुआ था। आसिफ के माता-पिता सहित पूरा परिवार मुंबई में ही रह रहा था, परंतु माता का मायका पाकिस्तान में होने के कारण आसिफ का जन्म कराची में हुआ और उसे भारतीय नागरिकता लेने के लिए संघर्ष करना पड़ा।

दरअसल भारत-पाकिस्तान विभाजन के वक्त आसिफ के पिता अब्बास कारडिया का जन्म 1945 में गुजरात में हुआ था। दूसरी तरफ आसिफ की माता ज़ैबुन्निसा का जन्म भी अविभाजित भारत में हुआ था, परंतु उनका परिवार विभाजन के समय पाकिस्तान चला गया था, जिससे ज़ैबुन्निसा पाकिस्तानी नागरिक बन गईं। इस बीच ज़ैबुन्निसा 1962 में लॉंग टर्म वीज़ा पर भारत आईं और उन्होंने अब्बास से निकाह किया। उन्होंने पति अब्बास की कंपनी जॉइन कर ली, परंतु उन्होंने पाकिस्तानी पासपोर्ट बनाए रखा। इस बीच 1965 में ज़ैबुन्निसा प्रसूति के लिए कराची स्थित अपने मायके गईं, जहाँ आसिफ का जन्म हुआ। इसी दौरान भारत-पाकिस्तान युद्ध के चलते ज़ैबुन्निसा दो वर्षों के बाद 1967 में भारत लौटीं।

आसिफ का परिवार लॉंग टर्म वीज़ा लेकर पाकिस्तान से मुंबई आया था और यहाँ बस गया था। इसके बाद से यह परिवार यहीं का होकर रह गया। अब परिवार की पाकिस्तान लौटने की कोई इच्छा नहीं है। हालाँकि लोंग टर्म वीज़ा खत्म हो जाने से भारत सरकार की ओर से परिवार पर पाकिस्तान लौट जाने का दबाव बनाया जा रहा था, परंतु भारत में जीवन के 50 साल का लंबा वक्त गुजारने के दौरान आसिफ ने यहाँ भारतीय मूल की लड़की से शादी कर ली और अब उसके बच्चे भी हैं, जिनका जन्म भारत का है।

आसिफ ने राशन कार्ड, पैन कार्ड, आधार कार्ड जैसे दस्तावेज भी बनवा लिये हैं। इसके बाद भी उसके परिवार पर पाकिस्तानी होने का ठप्पा लगा था, जिसे आसिफ मिटाना चाहता था और भारतीय नागरिकता प्राप्त करना चाहता था। इसलिये 7 साल पहले उसने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में भारतीय नागरिकता के लिये आवेदन किया था, परंतु कोई सुनवाई न होने पर 2016 में आसिफ ने मुंबई हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, परंतु सरकारी अधिकारियों ने अदालत को जवाब दिया कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पेश करने पर ही वह परिवार का वीज़ा बढ़ा सकते हैं।

इस प्रकार आसिफ को कोर्ट जाने से भी कोई लाभ नहीं हुआ, क्योंकि उसके पास पाकिस्तान का कोई पासपोर्ट या अन्य कानूनी पहचान पत्र था ही नहीं, जिसे वह पेश कर सकता। हालाँकि आसिफ भी हार मानने वाला नहीं था और उसने कोर्ट में दलीलें पेश करना जारी रखा और बताया कि वह 50 साल से यहाँ रह रहा है, यहाँ वह एक रेस्टोरेंट में काम करता है और सरकार को टैक्स भी देता है, उसने शादी भी स्थानीय लड़की से की है और अब उसके बच्चों का जन्म भी यहीं पर हुआ है, जो भारतीय हो चुके हैं, इसलिये अब उसे भारतीय नागरिकता देनी चाहिये।

लम्बे कानूनी संघर्ष के बाद मुंबई उच्च न्यायालय (HC) की ओर से कई आदेश मिलने के बाद आखिरकार भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को भी आसिफ को भारतीय नागरिकता देने का फैसला करना पड़ा। अब मंत्रालय ने कोर्ट को दिये जवाब में कहा है कि वह 10 दिन के भीतर सारी प्रक्रिया पूरी करके आसिफ और उसके परिवार को भारतीय नागरिकता दे देंगे। इस प्रकार लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार आसिफ के कानूनी संघर्ष की जीत हुई है और अब उसे भारतीय नागरिकता मिल जाएगी।

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