मैच ख़त्म होते ही कहाँ चला जाता है यह गुजराती CRICKETER ? नाम और काम जान कर सलाम करेंगे आप

गुजरात में एक तरफ वृद्धों का एक बड़ा वर्ग आधुनिक श्रवणों की कमी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ एक गुजराती क्रिकेटर ऐसा भी है जो लगातार अपने माता-पिता और परिवार की सेवा के प्रति परायण रहता है। आज के जमाने के श्रवण का नाम और काम जानने के बाद आप भी उसे सलाम करेंगे, क्योंकि यह गुजराती क्रिकेटर खेल के मैदान में विकेट के पीछे विकेट कीपर बन कर अपनी ही टीम के गेंदबाजों और विकेट के आगे बल्लेबाज बन कर विरोधी टीम के गेंदबाजों की गेंदों का सामना करने के साथ-साथ अपने निजी जीवन में भी एक बहुत ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है।

इण्डियन प्रीमियर लीग (IPL) के इस 12वें सीजन में कई खिलाड़ियों ने अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ऐसे ही खिलाड़ियों में रॉयल चैलेंजर बैंगलोर (RCB) टीम के विकेट कीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल भी हैं, जो मूलतः अहमदाबाद-गुजरात के निवासी हैं। विराट कोहली की कप्तानी वाली आरसीबी भले ही अभी तक के मैचों में कोई खास प्रदर्शन न कर पाई हो और उसे अब तक एक ही जीत नसीब हुई हो, परंतु परंतु इस टीम के बाएँ हाथ के सलामी बल्लेबाज और विकेट कीपर पार्थिव पटेल इस सीजन के कुछ मैचों में अपनी टीम के लिये अकेले दम पर लड़ते आ रहे हैं। हालाँकि जीत हासिल करने में टीम के नाकाम रहने से इनका योगदान भी फीका पड़ जाता है।

मैच ख़त्म होते ही मोबाइल देखते हैं पार्थिव

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि पार्थिव पटेल हर मैच खत्म होने का बेसब्री से इंतजार करते है और जैसे ही मैच खत्म होता है, वे मैदान छोड़कर कहीं चले जाते हैं। कहाँ चले जाते हैं ? यह सवाल मन में उठना लाजिमी है, परंतु हम आपको बता दें कि वास्तव में पार्थिव पटेल इस समय दोहरी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं। पार्थिव पटेल के पिता अजय पटेल लंबे समय से बीमार हैं और इस समय हैदराबाद के अस्पताल में उपचाराधीन हैं। उनकी हालत लगातार स्थिर बनी हुई है, जिससे पार्थिव निरंतर पिता की चिंता में रहते हैं। मैच शुरू होने से पहले वे पिता का हाल जान लेते हैं और फिर करते हैं मैच ख़त्म होने का इंतजार। जैसे ही मैच ख़त्म होता है, वे तुरंत मोबाइल पर नजर दौड़ाते हैं और इसके बाद अस्पताल चले जाते हैं।

हाल में पार्थिव पटेल ने उनसे मैच खत्म होने के बाद तुरंत अस्पताल जाने का कारण पूछने पर खुलासा किया कि उनके पिता को ब्रेन हेमरेज हुआ है और वह पिछले फरवरी महीने से अस्पताल में उपचाराधीन हैं। इसी बीच आईपीएल का सीजन शुरू हो जाने से पार्थिव पटेल को अपनी टीम के साथ जुड़ना पड़ा तो अपने पिता की देखभाल भी कर सकें, इसलिये वह पिता को हैदराबाद के अस्पताल ले आये। हालांकि पार्थिव की माता और पत्नी उनके पिता की अच्छे से देखभाल कर रहे हैं और समय-समय पर उन्हें फोन पर जानकारी भी देते हैं। पार्थिव पटेल भी डॉक्टर से फोन पर बात करते रहते हैं।

पार्थिव पटेल का कहना है कि जब वह मैदान में होते हैं, तब वह सबकुछ भूलकर अपने खेल पर ध्यान देते हैं, ताकि उनके खेल पर कोई असर न पड़े, परंतु जैसे ही मैदान से बाहर आते हैं तो उनकी नजर सीधी फोन पर जाती है और जब भी परिवार का फोन आता है तो एक भय से दिल धड़क जाता है कि कहीं कोई बुरी खबर तो सुनने को नहीं मिलेगी ? पार्थिव के अनुसार उनके लिये परिवार और खेल दोनों ही जीवन के महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिये वह दोनों को ही न्याय देने का प्रयास करते हैं।

उल्लेखनीय है कि पार्थिव पटेल महेन्द्रसिंह धोनी से पहले भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर चुने गये थे, परंतु धोनी के आने के बाद और उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन के चलते धोनी ने टीम में स्थाई जगह बना ली और इसके बाद पार्थिव पटेल सहित अन्य विकेटकीपरों के लिये टीम में स्थान नहीं बन पाया।

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