पाटीदार यानी भूमिपति, लेकिन इस गुजराती पाटीदार को गुजरात में ही नहीं मिल सकी चुनावी ज़मीन, मोदी-शाह को मैदान में चुनौती देने के अरमानों पर यूँ फिर गया पानी

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गुजरात में करीब 75 लाख पाटीदार समुदाय के लोग हैं और इस समुदाय की वोट बैंक पर वर्षों से भाजपा का कब्जा है। अगस्त-2015 में नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की गुजरात से विदाई क्या हुई, कुछ तथाकथित सामाजिक नेताओं ने भाजपा और मोदी के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया। उनमें सबसे बड़ा नाम था पाटीदार आरक्षण आंदोलन के तथाकथित हीरो और पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (PAAS) के संयोजक हार्दिक पटेल का। हार्दिक की हार्दिक इच्छा तो गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में ही भाजपा से दो-दो हाथ करने की थी, परंतु उम्र में कच्चे होने के कारण वे लोकसभा चुनाव 2019 की बाट जोह रहे थे। जब यह समय आया, तो हार्दिक ने मोदी विरोधी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की बैसाखी का सहारा लिया और मोदी-शाह और भाजपा को चुनावी मैदान में पटखनी देने की ठान ली।

परंतु हाय रे भाग्य ! जिस पाटीदार शब्द का अर्थ होता है भूमिपति, उसी पाटीदार समुदाय के इस तथाकथित हीरो और अब कांग्रेस नेता बन चुके हार्दिक पटेल को अपने ही गुजरात में चुनाव लड़ने की ज़मीन भी नसीब न हुई। अंतिम आशा थी सुप्रीम कोर्ट से। वो भी आज ख़त्म हो गई। दरअसल पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान मेहसाणा के विसनगर में भड़के दंगों के मामले में निचली कोर्ट से मिली 2 साल की सजा पर जब गुजरात हाई कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया, तो 7-8 महीनों से सोए हार्दिक पटेल अचानक जागे और पहुँच गए सुप्रीम कोर्ट। उन्होंने आनन-फानन में सजा पर रोक लगाने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने जो लताड़ पिलाई, उससे हार्दिक और उनके वकील ठंडे पड़ गए। सुप्रीम कोर्ट ने एक तरफ शीघ्र सुनवाई से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी तरफ 4 अप्रैल सुनवाई की तारीख तय की, जब गुजरात में 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख थी।

हार्दिक पटेल को आशा थी कि सुप्रीम कोर्ट 4 अप्रैल यानी आज उनकी याचिका पर सुनवाई करेगा, परंतु कोर्ट ने आज इस मामले को हाथ में ही नहीं लिया और इस तरह नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि बीत गई। एक सजायाफ्ता व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। सजा पर रोक लगे, तो चुनाव लड़ा जा सकता है, लेकिन हार्दिक की सजा पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक नहीं लगाई है और ऐसे में सुप्रीम कोर्ट अब यदि कल या किसी भी समय इस सजा पर रोक लगा भी देता है, तो भी हार्दिक पटेल के लिए गुजरात में लोकसभा चुनाव लड़ने का रास्ता आज यानी 4 अप्रैल को बंद हो गया। हार्दिक पटेल का इरादा जामनगर से भाजपा और मोदी को चुनौती देने का था, परंतु उनके सारे अरमान धरे के धरे रह गए।

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