जीतू राय ने शूटिंग में देश को गोल्ड मेडल दिलाया, इनका बचपन बहुत मुश्किल भरा रहा

Pistol King Jitu Rai

इंदौर: जीतू राय ने शूटिंग में भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth 2018) में गोल्ड मेडल दिलाया। बता दें कि यह कॉमनवेल्थ गेम्स ऑस्ट्रेलिया में चल रहा है। जीतू राय (Pistol King Jitu Rai) का गोल्डन मेडल तक का सफर असान नहीं रहा है, उनका बचपन बहुत ही मुश्किल भरा गुजरा है। इस गोल्ड के साथ ही भारत मेडल टैली में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है वही ऑस्ट्रेलिया अभी भी टॉप पर बरकरार है।

जीतू राय ने शूटिंग में 10 मीटर एयर पिस्टल में रिकॉर्ड बनाया तथा इस कैटेगरी में इन्होंने स्टेज-1 में 49.7 और 100.4 का स्कोर बनाया और स्टेज-2 में लिमिनेशन में 235.1 का स्कोर हासिलकर कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 (commonwealth 2018) में रिकॉर्ड बनाया। वही दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया के केरी बेल ने सिल्वर मेडल जीता और स्टेज-1 में 47.6 और 98.4 का स्कोर बनाया तथा इसके साथ ही स्टेज-2 एलिमिनेशन में 233.5 का स्कोर हासिल प्राप्त किया।

जीतू राय (Pistol King Jitu Rai) का बचपन मुश्किल में गुजरा

जीतू राय का जन्म 1987 में नेपाल के संखुवासभा में हुआ था। उनके पिता को भारतीय सेना के गोरखा राइफल में नौकरी मिली तब वे भारत आ गये। जबकि जीतू अपने परिवार के साथ नेपाल में ही रहे। पांच बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी मां पर ही थी। मां को अकेला काम करता देख वे स्कूल से आने के बाद मां का हाथ बंटाते थे।

पिता की वर्दी को देख सेना में जाने की इच्छा हुई

Pistol King Jitu Rai ने जब अपने पिता को सेना की वर्दी पहने देखा तो इनके मन में सेना बनने की इच्छा जागा था। जब तक वे अपने पिता को ये बात बताते उनकी मौत हो चुकी थी। पिता की मौत की खबर जीतू के परिवार पर बिजली बनकर गिरी। इसके कुछ दिन बाद जीतू राय ने अपने मां को कहा कि मैं सेना में जाना चाहता हूं। जब उनकी मां ने यह बात सुनी तो वे परेशान हो गई क्योंकि उन्होंने पहले ही अपने पति को गंवा चुकी थी और वे अब अपने बेटे को खोना नहीं चाहती थी। लेकिन बाद में जीतू के समझाने पर वह मान गई।

अपनी पढ़ाई को पूरी करने के बाद वे आर्मी में भर्ती हो गये। जीतू को लखनऊ कैंप पर भेज दिया गया वहीं पर उन्होंने शूटिंग की शरुआत की। इसके बाद आगे के ट्रेनिंग के लिए इंदौर के महू कैंप भेज दिया गया। इसके बाद इन्होंने शूटिंग की बारीकियों को सीखा। इसके बाद इन्होंने अपनी फिटनेस पर बहुत अधिक मेहनत किया। इसके साथ साथ इनको लगा कि पढ़ाई पर ध्यान देना बहुत ही जरुरी है जिसकी वजह से इन्होंने दोबारा अपनी पढ़ाई शुरू कर दी और इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई कम्प्लीट की।

शूटिंग की शुरुआत

बचपन में इनको फुटबॉल खेलने का शौक था और आमिर खान की फिल्मों को बहुत अधिक पसंद करते थे। राजीव गांधी खेल रत्न प्राप्त कर सिपाही के तौर पर गोरखा रेजिमेंट को ज्वोइन किया। शूटिंग की शुरुआत इन्होने 2019 में की। ट्रेनिंग के दौरान सीनियर्स ने इनके निशाने को देखकर इनको प्रोफेशनल शूटिंग में जाने की सलाह दिया गया। इसके बाद इन्होंने इस ओर कदम बढ़ाया। कुछ रिपोर्टर ने पूछा कि आप इस समय नंबर नव शूटर है तो इन्होंने कहा कि मुझे विश्वास ही नहीं होता कि सिर्फ 5 साल के करियर में मैंने यह मुकाम हासिल किया। वैसे तो जीतू राय लखनऊ में रहते थे लेकिन इन्होंने शूटिंग का अभ्यास महूं में किया। 2011 में इन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर निशाना साधा था और इसके बाद 2014 में एशियाई खेलों में भाग लिया था। इस एशियाई खेल में इन्होने गोल्ड मेडल भी प्राप्त किया था। नंबर-1 शूटर का खिताब पाने में ये भारत के सातवें शूटर बने। इससे पहले अंजलि भागवत, राज्यवर्धन सिंह राठौड़, मानवजीत सिहं संधू, गगन नारंग और हिना सिद्धू ने नंबर-1 शूटर का खिताप प्राप्त किया है।

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