कश्मीर पर छिड़ी यह ‘महाभारत’ कांग्रेस को कहीं ‘कौरव सेना’ साबित न कर दे

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जनार्दन-सिंधिया के बाद कर्ण सिंह भी उतरे मोदी के समर्थन में

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 8 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। महाभारत में हस्तिनापुर की राजगद्दी के लिये युद्ध हुआ था, जिसमें कौरव सेना की ओर से लड़ने के बावजूद भीष्म पितामह, आचार्य द्रौण और आचार्य कृप जैसे योद्धा पांडव सेना का समर्थन करते थे। आधुनिक भारत मेंमुद्दा हस्तिनापुर नहीं, अपितु जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन और धारा 370 उन्मूलन का है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रहित और जम्मू कश्मीर के हित को केन्द्र में रखा और राष्ट्र तथा राज्य दोनों का अहित करने वाली धारा 370 को खत्म किया। इतना ही नहीं, निजी हितों और स्वार्थ के लिये जम्मू कश्मीर की इस धारा का दुरुपयोग करने वाले कुछ राजनेताओं को सीमा में बांधने के लिये और उपेक्षा का शिकार हुए लद्दाख को न्याय देने के लिये जम्मू कश्मीर राज्य का विभाजन भी कर दिया और दोनों राज्यों को केन्द्र शासित प्रदेश बनाकर उनकी बागडोर केन्द्र के हाथों में ले ली, ताकि वहाँ के राजनेता निहित स्वार्थ के लिये जम्मू कश्मीर का दुरुपयोग न कर सकें और यदि ऐसा करते हैं तो केन्द्र तुरंत उनकी नकेल कस सके। इसमें कोई दो राय नहीं कि मोदी सरकार का फैसला राष्ट्रहित में है और देश की जनता ने इस फैसले के लिये सरकार और पीएम मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह को अभिनंदन भी दिया और जश्न भी मनाया। देश के कई राजनीतिक दलों ने ही नहीं, दुनिया के कई देशों ने भी समर्थन किया, जिनमें मालदीव ने मोदी सरकार के फैसले को सही ठहराया और पीएम की तारीफ भी की। अब बात देश के सबसे बड़े विपक्षी दल की करते हैं, जो भी जम्मू कश्मीर की तरह ही दो धड़ों में बँट गया है।

कैसे दो धड़ों में बँटी कांग्रेस ?

सोमवार को जब गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में धारा 370 के मात्र खंड एक को जारी रखते हुए बाकी सभी प्रावधानों को खत्म करके जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने का संकल्प पेश किया तो मोदी सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले का पूरे देश ने समर्थन किया। क्योंकि पूरा राष्ट्र पिछले 70 सालों से यही तो चाहता था कि जम्मू कश्मीर अन्य राज्यों की तरह ही भारत का सामान्य राज्य बने और एक देश में दो संविधान, दो झंडे और दोहरी नागरिकता जैसे असंवैधानिक नियम खत्म हों। मोदी सरकार ने यह साहस कर दिखाया। इस साहस की देशवासियों ने तो प्रशंसा की ही। बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती, तेलंगाना के मुख्यमंत्री और टीआरएस पार्टी के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई राजनीतिक दलों ने विपक्ष की पार्टी लाइन से उठकर मोदी सरकार के इस कदम की सराहना की और समर्थन भी किया, वहीं सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और सांसदों जैसे जनार्दन द्विवेदी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, आरपीएन सिंह, जितिन प्रसाद और दीपेन्द्र हुड्डा ने भी मोदी सरकार के इस कदम का समर्थन किया। अब कांग्रेस के एक और बड़े नेता डॉ. कर्ण सिंह ने भी मोदी सरकार के कदम को सही ठहरा दिया है।

कौन हैं और क्या कहा कर्ण सिंह ने ?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह जम्मू कश्मीर रियासत के महाराजा हरि सिंह के पुत्र हैं और वर्तमान में वह कांग्रेस के नेता हैं। उन्होंने मोदी सरकार की ओर से जम्मू कश्मीर से धारा 370 को खत्म किये जाने और राज्य का दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभाजन किये जाने के बाद अपना बयान जारी किया है। उन्होंने मोदी सरकार के फैसले का विरोध करने को गलत ठहराया और मोदी सरकार के फैसले से होने वाले फायदे गिनाये। उन्होंने कहा कि लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा दिये जाने से दूरगामी प्रभाव पड़ेगा, जो इस राज्य के हित में होगा। नीचे उनका पूरा बयान दिया गया है।

इसके बाद तो कांग्रेस के लिये संशय का कोई कारण ही नहीं बचता है कि उसे भी राष्ट्रहित में लिये गये इस फैसले का समर्थन करना चाहिये था, परंतु वह जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलामनबी आज़ाद और अधीर रंजन जैसे नेताओं के पक्ष में खड़ी है। जैसे कौरव सेना दुर्योधन और दुःशासन के पक्ष में खड़ी थी।

आज़ाद की विचारधारा कांग्रेसी नहीं, कश्मीरी है ?

ग़ुलामनबी आज़ाद कांग्रेस के नेता जरूर हैं, परंतु वह उसी जम्मू कश्मीर से ताल्लुक रखते हैं और वहाँ की उसी राजनीति से जुड़े हुए नेता हैं, जो राजनीति वहाँ नेशनल कान्फ्रेंस के पूर्व अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, उनके बेटे उमर अब्दुल्ला और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती करते आये हैं और उनकी राजनीति यही रही है कि वह एक हाथ से हिंदुस्तान का दामन पकड़े रहें और दूसरे हाथ से पाकिस्तानी रेवड़ियाँ खाते रहें। कश्मीर को पाकिस्तान के पाले में ले जाने की धमकी देकर भारत को ब्लैकमेल करते रहें और आज़ाद कश्मीर के नाम से पाकिस्तान से कोई सम्बंध नहीं होने का दिखावा कर सकें, परंतु अब उनकी यह दुकान नहीं चलेगी और अपनी दुकान में वो भारत को ब्लैकमेल करने वाला और कश्मीरियों को कश्मीरियत के नाम पर गुमराह करने वाला जो सामान बेचते थे, वह नहीं बिकेगा।

कांग्रेस करे फैसला, किस ओर जाना है ?

कांग्रेस को भी समझना होगा और उसे फैसला लेना होगा कि वह राष्ट्रहित के पाले में खड़ी होगी या अधीर-आज़ाद, उमर-फारूक और महबूबा जैसे लोगों के साथ खड़ी दिखना चाहती है। कांग्रेस को उसी के कुछ नेताओं ने मोदी सरकार का समर्थन करके आइना दिखाने का काम किया है। इन नेताओं ने मंगलवार को आयोजित हुई कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई यानी कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि पूरा देश मोदी सरकार के पाले में खड़ा है, ऐसे में हम समर्थन करने के बजाय विरोध करके अपने लिये मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। हमें देश की भावनाओं की कद्र करनी चाहिये। इन नेताओं ने सवाल उठाया कि तकनीकी रूप से कांग्रेस सही हो सकती है, परंतु हम जनता के सेवक जनता के बीच जाकर क्या जवाब दें ? 21वीं सदी में धारा 370 का कोई औचित्य ही नहीं रह गया था, इसे हटना ही था, जो काम उन्होंने किया है, वह मात्र देश की अखंडता के लिये ही नहीं, अपितु जम्मू कश्मीर के लोगों के भी हित में है। इसके बावजूद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी धारा 370 को हटाए जाने के खिलाफ एकमत नज़र आये, यानी वह किस पक्ष में खड़े हैं, कांग्रेस किस पक्ष में खड़ी है, यह आप तय कीजिये।

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