मोदी को ‘नेहरू’ समझने की भूल कर बैठे जिनपिंग ? डोकलाम से लेकर मसूद तक, इस तरह घुटनों के बल आया चीन

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अपनी विस्तारवादी नीति के लिए कुख्यात चीन आज भी वर्षों पुरानी मान्यता और भ्रम में जी रहा है। यही कारण है कि वह एक तरफ अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताने से लेकर डोकलाम पर कब्जा करने की कोशिश करता रहा, तो दूसरी तरफ जैश ए मोहम्मद (JEM) के मुखिया मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के भारत के अभियान में अडंगा लगाता रहा, परंतु चीन ने कदाचित चूक हो गई।

चीन आज के भारत को 1965 के नेहरू युग वाला भारत समझ रहा था। इसीलिए वह गुस्ताखियों पर गुस्ताखियाँ किए जा रहा था। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी यही भूल कर बैठे। उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ अहमदाबाद में साबमरती नदी के तट पर झूला झूलने में आनंद आया होगा, परंतु झूला झूलते वक्त जिस तरह जिनपिंग के मन में अपने पूर्वजों की दगाबाज नीति चल रही थी, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मन में भी हर धोखे से निपटने का मंत्र गूँज रहा था। जिनपिंग ने मोदी के नेतृत्व वाले वर्तमान भारत को 1965 के जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व वाला भारत समझने की गुस्ताखी की और आज स्थिति यह है कि मोदी की घातक कूटनीति के आगे चीन और जिनपिंग भारत के आगे घुटनों के बल पर आ गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में भारत ने जिस तरह चीन की हालत पाकिस्तान जैसी करने की तैयारी की थी, उससे चीन सकपका गया और अंततः उसे अब मसूद पर अपना मन दने का निश्चय करना पड़ा।

भारत की चेतावनी से घबराया चीन

मोदी की कूटनीति के आगे चीन चौतरफा चित्त हो गया है। वैसे मोदी अक्सर कहते हैं कि भारत हर कदम अपनी आत्म-रक्षा के लिए उठाता है, किसी देश विशेष के विरुद्ध नहीं, परंतु वे यह भी अच्छी तरह जानते हैं कि जब से वे प्रधानमंत्री बने हैं, तब से पाकिस्तान और चीन के भारत विरोधी रवैये में और ज्यादा उबाल आया है। चीन-पाकिस्तान की मैत्री भी मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद ही प्रगाढ़ हुई, परंतु मोदी कहाँ हार मानने वाले थे। भारत में अनेक आतंकवादी हमलों के जिम्मेदार मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए भारत ने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया, परंतु चीन ने हर बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में वीटो कर मसूद को बचा लिया। यहीं मोदी की कूटनीति रंग लाई। जो लोग मोदी के विदेशी दौरों की आलोचना करते हैं, उन्हें यह विशेष रूप से समझना होगा कि मसूद पर आज यदि चीन के रुख में नरमी आई है, तो वह भारत की ओर से चीन पर लाए गए अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण आई है। ये अंतरराष्ट्रीय दबाव यूँ ही नहीं आया। मोदी ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में शक्तिशाली देशों के साथ ऐसे संबंध स्थापित किए, जिनके कारण पुलवामा आतंकी हमले के बाद फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की ज़िद पर आ गए। इधर मोदी और उनकी सरकार ने चीन पर भी लगातार दबाव बनाया, जिसके चलते चीन को अपना रुख बदलना पड़ा। भारत ने चीन को अच्छी तरह समझा दिया कि यदि वह मसूद पर रुख नहीं बदलेगा, तो पूरी दुनिया में उसकी छवि आतंकवाद समर्थक देश के रूप में बनेगी। आखिरकार मोदी की कूटनीतिक जीत अब कुछ घण्टे ही दूर रह गई है, जब संयुक्त राष्ट्र मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करेगा।

मोदी ने हर मोर्चे पर दी चीन को चोट

चीन ने वन बेल्ट वन रोड (OBOR) के लिए आयोजित संमेलन में पहली बार कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारतीय मानचित्र में शामिल किया है और वह भी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के सामने। यह मोदी की बड़ी कूटनीतिक जीत है। इससे पहले भी पाँच वर्षों के कार्यकाल में मोदी ने हर मोर्चे पर चीन को चित्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। चीन में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन-2017 में मोदी और भारत के दबाव के चलते घोषणापत्र में आतंकवाद का उल्लेख किया गया, जबकि दो दिन पहले चीन ने संमेलन में ही कहा था कि पाकिस्तान के काउंटर आतंकवाद पर चर्चा करना सही नहीं है, परंतु मोदी की कूटनीति में घिरे चीन को भारत की बात माननी पड़ी और आतंकवाद का मुद्दा शामिल करना पड़ा। OBOR पर चीन की लाख बिनतियों के बावजूद भारत का विरोध जारी है, क्योंकि यह परियोजना भारत की संप्रुभता को खंडित करने का प्रयास है। चीन मोदी सरकार के इस विरोध से अत्यंत परेशान है। 2017 में चीनी सेना सिक्किम में घुस आई और दो भारतीय बंकर नष्ट कर दिए, परंतु मोदी सरकार ने इस धौंसपट्टी का ऐसा करारा जवाब दिया कि चीन की 2 किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया। चीनने 2018 में उत्तरी पैंगोंग झील के पास 6 किलोमीटर तक घुसपैठ की, जिसे भारतीय सैनिकों ने विफल कर दिया। जून-2017 में भारत-चीन-भूटान की सीमा के पास बने ट्राइ जंक्शन डोकलाम में चीन की घुसपैठ बड़ा गंभीर मुद्दा बन गई। 73 दिनों तक चले संघर्ष के बाद भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों उनकी सीमा में धकेल दिया। मोदी के नेतृत्व में सेना और कूटनीतिज्ञों ने डोकलाम प्रकरण पर चीन को ऐसी पछाड़ लगाई कि दुनिया में यह संदेश गया कि भारत केवल अपने ही नहीं, पड़ोसी देशों के हितों की रक्षा के लिए भी तत्पर रहता है। मोदी सरकार की एक्ट ईस्ट नीति चीन की विस्तारवादी नीति पर करारी चोट है। मालदीव में भारत के प्रति समर्थन भी मोदी सरकार की उपलब्धि है, जिससे चीन के माथे पर सिकन आ गई है।

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