मोदी ने पूर्वोत्तर में जो किया, वह पूर्व में कभी नहीं हुआ : भाजपा को मिलेगा चुनावी मुआवजा ?

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विश्लेषण : विनीत दुबे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कद बढ़ाने और वहाँ के राज्यों की सत्ता में पार्टी की भागीदारी बढ़ाने के लिये 5 साल के अपने कार्य काल में खासी मेहनत की है। अब लोकसभा चुनाव-2019 में उन्हें इस मेहनत का कितना फल मिलेगा, यह तो चुनाव परिणाम आने पर ही पता चल सकेगा।

दरअसल 2014 में केन्द्र की सत्ता संभालने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्वोत्तर राज्यों पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया था। पूर्वोत्तर के आठ राज्यों असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड और मणिपुर में लोकसभा की 25 सीटें हैं। 2014 से पहले असम को छोड़कर अन्य 7 राज्यों में भाजपा की उपस्थिति ना के बराबर थी। 2014 में उसने असम की 14 में से 7 और अरुणाचल प्रदेश की 1 सीट सहित कुल 25 में से मात्र 8 सीटें जीती थी, परंतु इसके बाद इन राज्यों में 2001 से लगातार जीतती आ रही कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों को पीछे छोड़ने के लिये प्रधानमंत्री ने पूर्वोत्तर के दौरे शुरू किये और इन क्षेत्रों में विकास कार्यों की झड़ी लगा दी। दूसरी ओर पार्टी के राजनीतिक चाणक्य अमित शाह और पूर्वोत्तर के भाजपा प्रभारी राम माधव ने भी राजनीतिक गतिविधियां तेज की और यहां कई क्षेत्रीय दलों के साथ गठजोड़ किया। परिणामस्वरूप 2019 में भाजपा इन 8 राज्यों की 25 में से 20 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है और 2014 के मुकाबले यहां ढाई गुना अधिक सीटें जीतने का दम भर रही है। भाजपा असम की 14 में से 10 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ रही है और शेष 4 सीटें उसने अपने सहयोगी दलों असम गण परिषद (एजीपी) और बोडो पीपल्स फ्रंट को लड़ने के लिये दी हैं। पार्टी मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और मेघालय की दो-दो सीटों पर भी अकेले चुनाव लड़ रही है। जबकि सिक्किम और मिजोरम की एक-एक सीट पर भी पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतारे हैं। केवल नागालैण्ड की एकमात्र सीट पर भाजपा ने सहयोगी पार्टी एनडीपीपी को समर्थन दिया है।

2014 में जिन राज्यों में भाजपा की विशेष उपस्थिति तक नहीं थी, वहाँ इस प्रकार पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ने के लिये मात्र 5 वर्ष में सक्षम हुई, जिसका सेहरा पीएम मोदी, पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और पार्टी के प्रभारी राम माधव के सिर बांधा जा सकता है। विशेषकर पीएम मोदी ने इस क्षेत्र में युवाओं के लिये रोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूर्वोत्तर औद्योगिक विकास योजना 2017 को 2020 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत इन पूर्वोत्तर राज्यों में 3,000 करोड़ रुपये की लागत से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम कद के उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसी प्रकार मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र विकास के लिये 90 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा की। इस योजना से विशेषकर मणिपुर, त्रिपुरा और असम के पर्वतीय क्षेत्रों को लाभ होगा।

मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिये पिछले वर्ष दिल्ली में 12वां पूर्वोत्तर व्यापार शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर में सार्वजनिक तथा निजी भागीदारी से संरचना, संपर्कता, कौशल विकास, वित्तीय समावेशी आयोजन, पर्यटन, सत्कार एवं खाद्य प्रसंस्करण सम्बंधी सेवा क्षेत्र के विकास पर ध्यान देना है। पूर्वोत्तर के अनेक क्षेत्र दुर्गम हैं, जहाँ तुरंत पहुँचना सुलभ नहीं है, ऐसे क्षेत्रों के लिये केन्द्र सरकार ने पहली एयर डिस्पेंसरी शुरू की है, जिसके तहत हैलीकॉप्टर के माध्यम से चिकित्सा सेवा पहुँचाई जाती है। पूर्वोत्तर क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार के लिये सरकार ने दिल्ली में सूचना केन्द्र स्थापित करने हेतु 6 करोड़ रुपये की 1.32 एकड़ भूमि आबंटित की है। यह केन्द्र पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिये सांस्कृतिक सम्मेलन और सूचना हब के रूप में काम करेगा।

इसके अलावा दिल्ली के जेएनयू तथा बंगलुरू विश्वविद्यालय में पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों के सविशेष संख्या को देखते हुए नये छात्रावासों का शिलान्यास किया गया है। डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिये टोका पैसा यानी ई-वॉलेट की सुविधा का उद्घाटन किया गया है। पूर्वोत्तर में उद्यमिता और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने के लिये नॉर्थ ईस्ट वेंचर फंड लॉन्च किया गया है। पूर्वोत्तर पर्यटन विकास परिषद का भी गठन किया गया है। पीएम मोदी ने 2017 में मिजोरम में 60 मेगावॉट की ट्युरिअल विद्युत परियोजना समर्पित की है। इससे मिजोरम भी सिक्किम और त्रिपुरा के बाद पूर्वोत्तर का तीसरा बिजली सरप्लस वाला राज्य बन गया है।

केन्द्र सरकार ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक लोहित नदी पर बने देश के सबसे लंबे पुल का उद्घाटन किया है। इस पुल का नाम विश्व विख्यात लोक गायक भूपेन हजारिका के नाम पर रखा गया है। यह पुल असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच बना है। 9.15 किलोमीटर लंबे इस सबसे बड़े पुल के बन जाने से दोनों प्रदेशों के बीच आवागमन में जो 6 घण्टे का समय लगता था, वह घटकर एक घण्टा हो गया है। इससे प्रति दिन लगभग 10 लाख रुपये के पेट्रोल-डीजल की बचत होने लगी है। असम में बाढ़ एक बड़ी समस्या है। इसके अध्ययन के लिये 100 करोड़ रुपये के कोष की स्थापना करने की घोषणा की गई है। दिसंबर-2015 में केन्द्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों के लिये एक विशेष पैकेज को मंजूरी दी है। इसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2023-24 तक पूर्वोत्तर राज्यों के दो – तिहाई ग्रामीण परिवारों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। मेघालय में सरकार ने 38 करोड़ रुपये की लागत से फुटबॉल स्टेडियम बनवाया है।

दुनिया में सबसे ज्यादा वर्षा चेरापूंजी में होती है, इसलिये सरकार ने चेरापूंजी में डॉपलर वेदर रडार समर्पित की है। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिये बेहतर मौसम अनुमान जारी करना संभव होगा। पूर्वोत्तर में रेल नेटवर्क पर अभी तक सरकार 10 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है। 2014 में मेघालय और अरुणाचल प्रदेश रेल मानचित्र में आ चुके हैं। अब मणिपुर तथा मिजोरम जैसे राज्यों में भी ब्रॉड गेज लाइनें बिछाने का काम चल रहा है। यहाँ हर जिले को राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है। ब्रह्मपुत्र नदी पर तीन पुलों का निर्माण किया जा रहा है, 34 सड़क परियोजनाओं का काम हो रहा है, जिसमें 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 1,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो रहा है। सिक्किम को जैविक फूड बास्केट बनाने के लिये पहला जैविक राज्य घोषित किया गया है, इससे यहाँ के किसानों की आय बढ़ेगी। पूर्वोत्तर के सभी राज्यों के लिये 24 घण्टे बिजली सुनिश्चित करने के लिये दो बड़ी बिजली परियोजनाओं पर काम चल रहा है तथा 5,300 करोड़ रुपये की लागत से एक व्यापक दूरसंचार योजना भी लागू की जा रही है।

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