अस्तित्व के लिये जूझ रहे डाक विभाग को इस बीमा ‘बूटी’ से नवजीवन देगी मोदी सरकार

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 15 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। एक समय था जब डाक विभाग का भी रुतबा हुआ करता था। दुनिया भर में चिट्ठियाँ और पार्सल पहुँचाता था, परंतु टेक्नोलॉजी के विकास के साथ संदेशों के आदान-प्रदान के इलेक्ट्रोनिक संशाधन आ गये और इसी के साथ डाक द्वारा चिट्ठियाँ भेजने का चलन पुराना होता गया। अब मोबाइल और इंटरनेट का ज़माना है, वॉट्सएप, ई-मेल, फेसबुक आदि ऐसे प्लेटफॉर्म विकसित हो चुके हैं, जिनके माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में बैठे व्यक्ति तक तत्काल संदेश भेजा जा सकता है। ऐसे में डाक विभाग को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिये अन्य विकल्पों को अपनाना पड़ा। वर्तमान स्थिति की बात की जाए तो लघु बचत योजनाओं से डाक विभाग अपना अस्तित्व बचाए हुए है। इसके अलावा कुछ अन्य योजनाएँ भी उसे ऑक्सीजन देने का काम कर रही हैं। इन्हीं में से एक ‘पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस यानी (PLI)’। अब मोदी सरकार ने घाटे में चल रहे डाक विभाग को नवजीवन देने के लिये इसी बीमा पॉलिसी को संजीवनी बूटी बनाने की योजना बनाई है।

डाक विभाग एक ऐसी सरकारी कंपनी बन गया है, जिसने घाटे के मामले में बीएसएनएल और एयर इंडिया को भी पीछे छोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2018-19 की बात की जाए तो इंडिया पोस्ट यानी भारतीय डाक को कुल लगभग 15,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है, जबकि पिछले तीन वित्त वर्ष में डाक विभाग का घाटा बढ़ कर 150 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। इस प्रकार वर्तमान में डाक विभाग सबसे अधिक घाटे वाली सरकारी कंपनी बन गया है। जबकि दूसरे नंबर पर बीएसएनएल को वित्त वर्ष 2018-19 में 7,500 करोड़ रुपये और तीसरे नंबर पर एयर इंडिया को 5,337 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इसलिये डाक विभाग के लिये मोदी सरकार चिंतित हुई और अब उसे घाटे से उबारने के लिये तथा उसे उसकी खोई प्रतिष्ठा वापस दिलाने की दिशा में प्रयास शुरू किये हैं। इन प्रयासों के तहत मोदी सरकार ने डाक विभाग की ही एक सबसे पुरानी बीमा पॉलिसी को आधार बनाने का निर्णय किया है।

सबसे बड़ी बीमा स्कीमों में से एक है डाक जीवन बीमा पॉलिसी

यदि आप यह सोच रहे हैं कि भारत में जीवन बीमा की शुरुआत भारतीय जीवन बीमा निगम से हुई है, जो 1956 में शुरू हुआ है तो आप गलत हैं। यह सही है कि वर्तमान नें भारतीय जीवन बीमा निगम बीमा क्षेत्र की सबसे बड़ी राष्ट्रीयकृत कंपनी है और सबसे बड़ी निवेशक बीमा कंपनी भी है, परंतु देश की सबसे पुरानी बीमा कंपनी ओरिएण्टल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी है, जिसकी स्थापना 1818 में कोलकाता में हुई थी। जबकि दुनिया में बीमा पॉलिसी का सबसे पहला ख्याल 1583 में आया था और रोम में सबसे पहले बीमा का चलन शुरू हुआ था। खैर, हम बात कर रहे हैं भारतीय डाक विभाग की, तो आपको बता दें डाक विभाग ने भी 1884 से जीवन बीमा पॉलिसी बेचना शुरू किया था, जो देश की सबसे पुरानी बीमा स्कीमों में से एक है। इंडिया पोस्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार वर्तमान में 4.7 मिलियन पॉलिसी के साथ यह देश की शीर्ष बीमा योजनाओं में शामिल है। इस इंश्योरेंस स्कीम में संपूर्ण जीवन बीमा (सुरक्षा), एंडोवमेंट इंश्योरेंस (संतोष), संयुक्त जीवन बीमा और बच्चों के लिये चिल्ड्रन पॉलिसी भी उपलब्ध हैं। इस स्कीम के तहत 50 लाख रुपये तक का बीमा लिया जा सकता है और इसमें लोन की सुविधा तथा इनकम टैक्स में छूट का लाभ भी मिलता है।

कैसे मोदी सरकार इस स्कीम से करेगी डाक विभाग का उद्धार ?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डाक जीवन बीमा की बाजार में हिस्सेदारी अभी मात्र 3 प्रतिशत है, परंतु अन्य जीवन बीमा कंपनियों की तुलना में यह स्कीम अधिक बोनस की पेशकश करती है और इसका प्रीमियम भी कम है। इस स्कीम को डाक खाने (पोस्ट ऑफिस) में जाकर लिया जा सकता है, इसलिये इस पॉलिसी को बेचने का कमीशन कम रखा गया है। परिचालन लागत कम होने से ही यह स्कीम अधिक बोनस देने की पेशकश करने में सक्षम है और इसका प्रीमियम भी कम है। अभी तक यह इंश्योरेंस स्कीम मात्र सरकारी तथा अर्द्ध-सरकारी संस्थानों के कर्मचारियों के लिये ही उपलब्ध थी। अब मोदी सरकार ने डाक जीवन बीमा स्कीम को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में लिस्टेड कंपनियों के साथ-साथ प्रोफेशनल्स के लिये भी खोल दिया है। इसका अर्थ है कि अब डॉक्टर, इंजीनियर, वकील समेत प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों में काम करने वाले लोग भी इस स्कीम का लाभ ले सकेंगे और डाक जीवन बीमा पॉलिसी खरीद सकेंगे। ऐसा होने से डाक विभाग की आय बढ़ने की उम्मीद की जा रही है। इसके लिये डाक विभाग पीएलआई का अलग से कारोबार करने के लिये अलग कंपनी या विभाग शुरू करने पर भी विचार कर रहा है। ज्ञात हो कि मोदी सरकार के नेतृत्व में डाक विभाग में पिछले कुछ सालों में काफी बदलाव किये गये हैं। उदाहरणतया सुकन्या समृद्धि योजना () जैसी योजनाएँ शुरू की गई हैं, तो दूसरी ओर डाक विभाग में बचत खाता रखने वाले खाता धारकों के लिये मोबाइल बैंकिंग की भी शुरुआत की गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पीएम मोदी की अगुवाई में भारतीय डाक विभाग में किया गया यह नया बदलाव डाक विभाग के लिये कितना लाभदायी सिद्ध होगा ?

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