मोदी का चीन को कड़ा संदेश, ‘आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में राजनीति न हो’

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक सप्ताह के ‘MISSION AMERICA’ पर हैं और उनका यह मिशन सफल भी हो रहा है। ह्यूस्टन के बाद अब न्यू यॉर्क में भी पीएम मोदी का ही दबदबा देखने को मिल रहा है। रविवार को ह्यूस्टन शहर में #HOWDY MODI कार्यक्रम के बाद सोमवार को पीएम मोदी न्यू यॉर्क पहुँचे हैं, जहाँ संयुक्त राष्ट्र की महासभा आयोजित हो रही है। इसमें पीएम मोदी ने जलवायु की समस्या के साथ-साथ आतंकवाद के विरुद्ध भी दुनिया भर के देशों को एकजुट होने का आह्वान किया और टेरर फंडिंग को लेकर अच्छे आतंकवाद तथा बुरे आतंकवाद की व्याख्या करने वाले पाकिस्तान को बिना उसका नाम लिये खरी-खरी सुनाईं। इतना ही नहीं, मोदी ने पाकिस्तान के हितैषी बन कर संयुक्त राष्ट्र संघ की लिस्टिंग और ‘फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF)’ जैसी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाने वाले चीन के भी सख्ती से कान मरोड़ दिये।

पाकिस्तान के साथ चीन भी करवा रहा अपनी फजीहत

आतंकिस्तान के नाम से अपनी उभरती पहचान पर शर्मिंदा होने के बजाय और फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स के हाथों ब्लैकलिस्ट होकर अपनी अर्थ व्यवस्था को दिवालिया होने से पहले ही उसे बचा लेने के लिये आतंकवाद पर कड़े कदम उठाने के स्थान पर पाकिस्तान कश्मीर को लेकर दुनिया को भ्रमित करने के प्रयासों में जुटा है। अभी सोमवार को ही पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने अमेरिकी प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप के समक्ष यह स्वीकार किया कि, अमेरिका पर हमला करने वाले आतंकवादी संगठन अल कायदा को खड़ा करने में पाकिस्तान की जासूसी संस्था आईएसआई ने ही हर तरह की मदद की थी। दूसरी तरफ चीन है, जो पाकिस्तान की दोस्ती में इतना अंधा हो चुका है कि उसे पाकिस्तान की सच्चाई दिखाई ही नहीं देती और पाकिस्तान के साथ-साथ वह भी अपनी फजीहत करवाने में लगा हुआ है। पाकिस्तान का हितैषी बनने के चक्कर में चीन ने यूएन की लिस्टिंग और फाइनैंशियल एक्शन टास्क फोर्स की कार्यवाही पर सवाल उठाये, जिसे लेकर अब उसकी फजीहत हो रही है। पीएम मोदी ने भी बिना नाम लिये चीन के कान मरोड़ते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के ‘स्ट्रैटेजिक रिस्पॉन्सेज़ टू टेररिस्ट एंड वायलेंट एक्सट्रेमिस्ट नैरेटिव्स’ सत्र को संबोधित करते हुए कह दिया कि, आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों पर यूएन द्वारा लगाये गये आर्थिक प्रतिबंधों पर सवाल उठाने वाले देशों को इस मुद्दे पर राजनीति करने से बचना चाहिये।

आतंकी अज़हर मसूद को लेकर हो चुकी फजीहत

इससे पहले चीन ने पाकिस्तान में रह रहे पुलवामा जैसे आतंकी हमले करवाने वाले आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना अज़हर मसूद को यूएन से अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने के भारत के प्रयासों में अडंगा लगाने के भी प्रयास किये थे, परंतु इस प्रयास में भी उसे विफलता हाथ लगी थी और उसकी फजीहत हुई थी। यूएन ने इसी साल मई में उसे वैश्विक आतंकी घोषित किया है।

डोकलाम विवाद में भी चीन करवा चुका है फजीहत

इसी प्रकार 2017 में सामने आये डोकलाम विवाद के समय भी भारतीय सेना की अडिगता के सामने चीन को घुटने टेकने पड़े थे। इसके बावजूद पाकिस्तान की तरह ही चीन भी भारत का विरोध करने के नशे में इतना चूर रहता है कि वह ऐसा कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देता है। जैसे नशा शराबी की फजीहत करवाता है, वैसे ही भारत के विरोध का नशा इन दोनों देशों की विश्व मंच पर बार-बार फजीहत करवाता है।

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