मोदी की शपथ : 8000 अतिथियों की भीड़ में कोई नहीं था ‘अपना’..!

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एक तरफ माँ-बहन ही सब कुछ, दूसरी तरफ माँ-बहन को निमंत्रण तक नहीं !

PM की माँ सहित सभी परिजनों ने आम आदमी की तरह टीवी पर देखा शपथ ग्रहण समारोह

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 31 मई, 2019। देश के दोबारा प्रधानमंत्री बने नरेन्द्र मोदी का गुरुवार शाम राष्ट्रपति भवन में भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ। इसमें देश-विदेश की जानी-मानी हस्तियाँ समारोह की साक्षी बनीं, परंतु 8,000 लोगों के इस भारी जमावड़े के बीच भी प्रधानंत्री से रक्त या धर्म का सीधा संबंध रखने वाले गिने-चुने 8 लोग शामिल नहीं थी। ये 8 लोग ऐसे हैं, जिनमें उनकी माता, जिन्होंने ने मोदी को जन्म दिया, उनके भाई-बहन, मोदी जिनके साथ पले-बढ़े, तो एक धर्म पत्नी हैं, जिनसे मोदी ने कभी विवाह किया था, परंतु दोनों कभी साथ न रह सके।

यह 8 खास लोग थे, पीएम नरेन्द्र मोदी के परिवार के सदस्य। मोदी के परिवार में उनकी माँ हीराबेन दामोदरदास मोदी हैँ। इसके अलावा चार भाई सोमाभाई, प्रहलादभाई, अमृतभाई और पंकजभाई, एक बहन वसंतीबेन हसमुखलाल मोदी हैं। इसके अलावा पीएम मोदी की धर्मपत्नी जशोदाबेन सहित पीएम मोदी के परिवार में कुल 8 सदस्य हैं। पीएम मोदी अपने दो भाई सोमाभाई और अमृतभाई से छोटे हैं तथा प्रहलादभाई और पंकजभाई से बड़े हैं। इतने बड़े समारोह में पीएम मोदी के परिवार को न देखकर सभी अचंभित थे।

क्योंकि पीएम मोदी ने इस समारोह में प्रथम पड़ोसी की नीति से भारत के पड़ोसी देशों के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री के अलावा मॉरीशस और किर्गीस्तान के राष्ट्राध्यक्षों को भी बुलाया। देश के सभी मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों, विपक्षी नेताओं, सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्षों, सभी नवनिर्वाचित और पूर्व सांसदों के अलावा फिल्म जगत, खेल जगत, उद्योग जगत सहित कला और साहित्य आदि विविध क्षेत्रों के सेलिब्रिटीज़ को भी बुलाया, परंतु अपने ही परिवार को नहीं बुलाया था। स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की माँ हीराबेन अपने बेटे को शपथ लेते हुए टीवी पर देख रही थीं, तो शेष सदस्यों ने भी पीएम मोदी को आम आदमी की तरह ही टीवी पर शपथ लेते हुए देखा होगा।

अक्सर देखा गया है कि बड़े-बड़े अवसरों पर पीएम मोदी अपनी माता हीराबा का आशीर्वाद अवश्य लेते हैं। चाहे वह जन्म दिन हो या चुनाव जीतने का अवसर हो। इसलिये यह तो संभव नहीं कि पीएम सबको बुलाएँ और अपने परिवार को ही आमंत्रित करना भूल जाएँ। इसलिये मीडिया ने जब पीएम मोदी की बहन वसंतीबेन से इस बारे में बात की तो खुलासा हुआ कि यह परिवार समारोह में नज़र क्यों नहीं आया।

वसंतीबेन ने बताया कि पीएम मोदी देश को समर्पित देशभक्त हैं, वह शपथ ग्रहण करने के बाद कदाचित अपनी माता का आशीर्वाद लेने अवश्य आएँगे। उनकी माता हीराबा गांधीनगर में सबसे छोटे बेटे पंकज मोदी के साथ रहती हैं। इसके अलावा मोदी के पास अपने भाइयों या बहन से मिलने का समय नहीं होता है। एक बार वड़नगर आने पर वसंतीबेन ने पीएम नरेन्द्र मोदी को राखी बाँधी थी, तब से वह उनसे नहीं मिली हैं।

इस परिवार को भी इस बात का कोई मलाल नहीं है कि उसे इतने बड़े समारोह का हिस्सा बनने का अवसर नहीं मिला। वो तो यह सोचकर ही धन्य हो जाता है कि उन्हें देश के लिये समर्पित ऐसे नेता का परिवार होने का गौरव प्राप्त हुआ है। वास्तव में यह मोदी परिवार के लिये ही नहीं, अपितु समग्र देश के लिये गौरव की बात है कि उन्हें ऐसा समर्पित प्रधानमंत्री मिला है।

इस समारोह में घटित हुई इस घटना से एक और बात स्पष्ट होती है कि एक ओर मोदी हैं तो दूसरी ओर परिवारवाद की राजनीति है। मोदी हर मंच से परिवारवाद की राजनीति का विरोध करते रहे हैं। कई राजनीतिक दलों की राजनीति उनके परिवारों के इर्द-गिर्द ही सीमित है, इनमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सबसे बड़े उदाहरण हैं, जो गाँधी और यादव परिवार के घेरे से बाहर निकलने की कल्पना करने में भी सक्षम नहीं हैं।

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