पुलिस पर हमलों का मोदी ने ऐसे किया विरोध : 35 हजार शहीद जवानों को कहा ‘अमर रहो !’

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 22 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरुद्ध देश के विभिन्न हिस्सों में हो रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान उपद्रवियों की ओर से पुलिस जवानों पर किये जा रहे हमलों का पीएम नरेन्द्र मोदी ने कड़े शब्दों में विरोध किया है और देश की आज़ादी से लेकर अभी तक देश के लिये शहीद हुए 35 हजार पुलिसकर्मियों को याद करते हुए ‘शहीदो अमर रहो’ के नारे लगाये।

पीएम मोदी ने संसद और सांसदों को दिलाई स्टेंडिंग ओवेशन

दिल्ली के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की ओर से रविवार को रामलीला मैदान में आयोजित की गई रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को करारा जवाब दिया। मोदी ने कहा कि यह कानून लोकतंत्र के मंदिर कहलाने वाले संसद के दोनों सदनों लोक सभा और राज्य सभा ने पास किया है। देश की जनता द्वारा चुने गये सांसदों के समर्थन से यह बिल पास होकर कानून बना है। इसके लिये पीएम मोदी ने पहले तो संसद और सांसदों के सम्मान में उपस्थित जन समुदाय से ‘स्टेंडिंग ओवेशन’ देने की अपील की और खुद भी उनका आभार व्यक्त किया।

आज़ादी से लेकर अब तक शहीद हुए 35,000 पुलिसकर्मियों को याद किया

इसके बाद पीएम मोदी ने हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस को निशाना बना कर पुलिस कर्मियों पर किये जा रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि पुलिस ही नागरिकों की सबसे बड़ी मददगार और रक्षक है। जब कोई नागरिक किसी भी मुश्किल में पड़ता है, तो दौड़ कर पुलिस की मदद माँगता है और पुलिस भी धर्म, जाति, संप्रदाय का भेदभाव किये बिना और रात दिन, सर्दी, गर्मी और बरसात की परवाह किये बिना लोगों की मदद के लिये उनके घर तक पहुँच जाती है। यदि उसी पुलिस पर हमला होगा तो क्या देश की संवैधानिक व्यवस्था सुचारू रूप से चल पाएगी ? क्या देश में कानून-व्यवस्था का पालन हो पाएगा ? और क्या पुलिस के बिना कोई नागरिक सुरक्षित रह पाएगा ? इसलिये उन्होंने पुलिस पर हमला नहीं करने की अपील की। पीएम मोदी ने इस अवसर पर आज़ादी से लेकर अब तक शहीद हुए 35 हजार पुलिसकर्मियों की शहादत को भी याद किया और दिल्ली में बने पुलिस शहीद स्मारक पर जाकर दिल्ली वासियों से शहीदों को श्रद्धांजलि देने की अपील की। पीएम मोदी ने ‘शहीदो अमर रहो’ के नारे भी लगाये।

बीते एक साल में शहीद हुए 300 पुलिस जवान

उल्लेखनीय है कि देश की आज़ादी से लेकर अब तक 35 हजार पुलिसकर्मियों ने नागरिकों की रक्षा करते हुए शहादत दी है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में राज्य पुलिस और अर्द्ध सैनिक बलों के लगभग 300 जवानों ने शहादत दी है। सबसे अधिक केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने शहादत दी है। पिछले एक वर्ष में सीआरपीएफ के सर्वाधिक 67 जवान शहीद हुए। इनमें गत 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले में शहीद हुए 40 से अधिक जवान भी शामिल हैं। आँकड़ों के अनुसार सितंबर 2018 से अगस्त-2019 तक एक वर्ष में सीआरपीएफ व सीमा सुरक्षा बल (BSF) समेत अर्द्ध सैनिक बलों के लगभग 300 सैनिक शहीद हुए। इनमें बीएसएफ के 41, इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के 23 और जम्मू कश्मीर पुलिस के 24 जवान शामिल हैं, जो आतंकवाद विरोधी तथा अन्य अभियानों में शहीद हुए। दूसरी ओर राज्य पुलिस के जवानों ने नक्सलियों, आतंकियों, शराब, रेत और ड्रग माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही के दौरान शहादत दी। महाराष्ट्र पुलिस के 20 जवानों ने शहादत दी। इनमें से 15 जवान गढ़चिरौली में बारूदी सुरंग विस्फोट में शहीद हुए। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के 14, कर्नाटक के 12, रेलवे सुरक्षा बल के 11 जवानों ने भी शहादत दी। दिल्ली व राजस्थान पुलिस के 10-10 और सीआईएसएफ के 6 जवानों ने भी शहादत दी। शहादत की इस सूची में झारखंड, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा और गुजरात के पुलिस जवान भी शामिल हैं। असम राइफल्स और राष्ट्रीय आपदा कार्यवाही बल के जवानों ने भी शहादत दी है।

फिरोजाबाद हिंसक प्रदर्शन में बाल-बाल बचा पुलिस जवान

‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’, इस कहावत को चरितार्थ करने वाली एक घटना उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में तब सामने आई जब नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध प्रदर्शन में ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस कर्मी पर किसी ने गोली चला दी। इस गोली ने पुलिस कर्मी का बुलेटप्रूफ जैकेट भी भेद दिया, परंतु इतना होने पर भी गोली पुलिसकर्मी के शरीर को नहीं छू सकी। क्योंकि उसकी जेब में रखे पर्स में कुछ सिक्के थे, जो इस पुलिसकर्मी के लिये ढाल बन गये। इन सिक्कों से टकराकर गोली बेकार हो गई और विजेंद्र कुमार नामक 24 वर्षीय कॉन्स्टेबल को नवजीवन मिल गया। विजेंद्र कुमार का कहना है कि वह फिरोजाबाद एसपी के एस्कॉर्ट में शामिल था। जब विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप लिया और फायरिंग हुई तो एक गोली ने उसके बुलेटप्रूफ जैकेट को भेद दिया। हालाँकि उसके पर्स में रखे सिक्कों ने उसकी जान बचा ली। जबकि उसके दूसरे साथी धर्मेंद्र को पैर में गोली लगी और वह अभी अस्पताल में है। विजेन्द्र के इसी पर्स में भगवान भोलेनाथ की एक तस्वीर भी थी। विजेन्द्र भोलेनाथ का धन्यवाद करते हुए कहता है कि भगवान भोलेनाथ ने ही उसकी जान की रक्षा की और सिक्कों को ढाल बना दिया। उल्लेखनीय है कि फिरोजाबाद में हिंसक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुल लगभग 40 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनमें थानेदार, सब इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल शामिल हैं।

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