प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हैदराबाद में संत रामानुजाचार्य की स्मृति में ‘Statue of Equality ‘ का अनावरण किया

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प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि केन्द्र के सभी कल्याणकारी कार्यक्रमों में सामाजिक न्याय निहित है और इसका उद्देश्य सबका साथ सबका विकास के पथ पर चलते हुए असमानताओं को खत्म करना है। यही वजह थी कि बाबा साहेब अंबेडकर, जैसे समानता के आधुनिक नायक भी रामानुजाचार्ज जी की भरपूर प्रशंसा करते थे और समाज को भी कहते थे कि अगर सीखना है तो रामानुजाचार्ज जी की शिक्षा से सिखो। और इसलिए आज रामानुजाचार्ज जी की विशाल मूर्ति Statue of Equality, इसके रूप में समानता का संदेश दे रही है। इसी संदेश को लेकर आज देश सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मंत्र के साथ अपने नये भविष्य की नींवं रख रहा है।

कल हैदराबाद के निकट मुचिनताल में तमिल वैष्णव संत रामानुजाचार्य की 216 फुट ऊंची प्रतिमा-Statue of Equality के लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को रामानुजाचार्य जैसी महान विभूतियों की शिक्षाओं से सबल- सुदृढ़ पारंपरिक आधार मिला है। 11वीं सदी में संत रामानुजाचार्य ने धर्म, जाति और नस्ल सहित जीवन के सभी पक्षों में समानता पर बल दिया।

आज देश में एक और सरदार साहब की Statue of Unity, एकता की शपथ दोहरा रही है। तो रामानुजाचार्ज जी की Statue of Equality समानता की संदेश दे रही है। यही एक राष्ट्र के रूप में भारत की चीर पुरातन विशेषता है। हमारी एकता, सत्ता या शक्ति की बुनियाद पर नहीं खड़ी होती। हमारी एकता, समानता और समादर इस सूत्र से सृजित होती है और साथियों जब मैं तेलंगाना में हूं, तो इस बात जिक्र भी जरूर करूंगा कि कैसे तेलुगू कल्चर ने भारत की विविधता को सशक्त किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि Statue of Equality संत रामानुजाचार्य के ज्ञान, अनासक्ति और आदर्शों का प्रतीक है जो युवाओं को प्रेरित करेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने रामानुजाचार्य और तमिलनाडु के आलवार संतों के प्रति श्रृद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने देश भर में वैष्णव मंदिरों की स्थापना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों के बीच भेदभाव जैसी बुराई स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व ने सम्मान और गरिमा के साथ जीने की सामाजिक व्यवस्था को महत्व दिया है। विकास हो, सबका हो, बिना भेदभाव हो। सामाजिक न्याय सबको मिले, बिना भेदभाव मिले। जिन्हें सदियों तक प्रताड़ित किया गया वो पूरी गरिमा के साथ विकास के भागीदार बनें। इसके लिए आज का बदलता हुआ भारत एकजुट प्रयास कर रहा है। आज सरकार जो योजनाएं चला रही है, उनका बहुत बड़ा लाभ हमारे दलित, पिछड़े भाई-बहनों को हो रहा है। चाहे पक्के घर देना हो या फिर उज्ज्वला का मुफ्त कनेक्शन। चाहे पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा हो या फिर बिजली का मुफ्त कनेक्शन, चाहे जन-धन बैंक खाते खोलना हो या फिर स्वच्छ भारत अभियान के तहत करोडृों शौचालयों का निर्माण करना हो। ऐसी योजनाओं ने दलित, पिछड़े, गरीब, शोषित, वंचित सभी का भला किया है। बिना भेदभाव सबको सशक्त किया है।

श्री रामानुजाचार्य की 216 फुट ऊंची यह प्रतिमा पंचधातु- स्‍वर्ण, चांदी, तांबा, पीतल और जस्‍ते से निर्मित है। यह 54 फुट ऊंचे आधार भवन- भद्रवेदी पर स्थित है। इस भवन की विभिन्‍न मंजिलों पर Vedic Digital Libraryऔर Research Centre, Theatre, Ancient Indian Texts, और श्री रामानुजाचार्य की विभिन्‍न कृतियों से संबंधित दीर्घाएं हैं।

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