मोदी का ALERT ! जो भी TEMPORARY हैं, वह यह जान लें कि उनका अंत निश्चित है

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‘अस्थाई 370 को हटाने में 70 साल लगे’

‘मुझे समझ नहीं आया कि रोऊँ या हँसूँ’

‘राम, कृष्ण, बुद्ध, गांधी की धरती पर अब सब परमानेंट ही होगा’

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 23 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। भगवान राम, भगवान कृष्ण, भगवान बुद्ध और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की धरती यानी माँ भारती का अध्यात्म दर्शन स्पष्ट रूप से कहता है, जो भी अस्थायी यानी टेम्पररी है, उसका अंत निश्चित ही होता है। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए भी कुछ इसी तरह का संदेश दिया।

मोदी ने यह संदेश तो जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के संदर्भ में दिया, परंतु उनका संकेत देश में टेम्पररी रूप से काम करने वाले लोगों के लिए भी था। दरअसल मोदी ने भारतीय मूल के नागरिकों को संबोधित करते हुए सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा, परंतु यह स्पष्ट संकेत दिया, ‘हिन्दुस्तान में अब टेम्परैरी (अस्थाई) के लिए व्यवस्था नहीं है। आपने देखा होगा कि 125 करोड़ लोगों का देश, गांधी और बुद्ध की धरती, राम-कृष्ण की भूमि से टेम्परैरी को निकालते-निकालते 70 साल चले गए। टेम्परैरी को निकालने में 70 साल, मुझे तो समझ नहीं आया कि हँसना है या रोना है ? साथियों, रिफॉर्म-ट्रांसफॉर्म और परमानेंट व्यवस्थाओं के साथ देश आगे बढ़ पड़ा है।’ मोदी ने अपने संबोधन में भले ही जम्मू-कश्मीर या वहाँ से धारा 370 हटाए जाने का उल्लेख नहीं किया, परंतु 70 साल का उल्लेख करके स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि वे जम्मू-कश्मीर में 70 वर्ष पहले अस्थाई रूप से लागू की गई धारा 370 को हटाने में लगे 70 वर्ष का जिक्र कर रहे थे।

हर टेम्परैरी हो जाए सावधान !

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘हिन्दुस्तान में अब टेम्परैरी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है’ कह कर भारतीय राजनीति में सत्ता और चुनावी लाभ के लिए ही जनता के बीच उग आने वाले नेताओं को भी निशाना बनाया है। मोदी का सीधा संदेश चुनावों के दौरान सरकार के विरुद्ध बड़े-बड़े आरोप लगा कर सुर्खियाँ बँटोरने वाले और चुनाव के बाद ग़ायब हो जाने वाले नेताओं के लिए भी रेड सिग्नल समान हैं। वैसे प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में न कश्मीर, न धारा 370 या न किसी नेता का नाम लिया, परंतु उनकी बातें सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी के कुछ शीर्ष नेताओं को छूती हैं। इनमें सबसे ऊपर किसी का नाम आता है, तो वह हैं राहुल गांधी। राहुल गांधी अक्सर चुनावों के समय प्रेस कॉन्फ्रेंसें करते हैं, चुनावी रैलियाँ करते हैं, मंदिरों में घूमते हैं, परंतु चुनाव ख़त्म होते ही अचानक सार्वजनिक जीवन और बयानबाजी की दुनिया से ग़ायब हो जाते हैं। बीच-बीच में ट्विटर पर फुलझड़ियाँ छोड़ने वाले राहुल गांधी ने गुजरात विधानसभा चुनाव 2017, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिज़ोरम विधानसभा चुनाव 2018 में भी ख़ूब सुर्खियाँ बँटोरीं, तो तीन राज्यों में मिली सफलता से उत्साहित राहुल गांधी लोकसभा चुनाव 2019 में पूरे देश में घूमे, मंदिरों के चक्कर लगाए, मोदी के विरोधियों को लामबंद किया, मोदी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, परंतु चुनाव परिणामों के बाद राहुल फिर नदारद हो गए। राहुल ने इस दौरान छुट्टियाँ भी लीं और ट्विटर पर फुलझड़ियाँ ही छोड़ीं। भाजपा नेता अक्सर राहुल गांधी का राजनीति को साइड बिज़नेस और अस्थाई राजनीति भी कहते हैं।

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