MODI-SHAH ON AGENDA : भाजपा के वायदे में, संविधान के दायरे में, अब UCC की बारी..?

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* ट्रिपल तलाक़ की बुराई जड़ से मिटाई

* जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को देशनिकाला

* सुप्रीम कोर्ट के रास्ते राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त

* CAB को ऐतिहासिक CAA में बदला

* अब समान नागरिक संहिता होगा लक्ष्य

विशेष रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 12 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी बार सत्ता संभालने वाले नरेन्द्र मोदी ने अपने विशेष निकटस्थ व विश्वसनीय अमित शाह को गृह मंत्री बनाया, तब कदाचित ही किसी ने सोचा था कि मोदी अपने इस शाह के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) के वर्षों से लंबित एजेंडा (AGENDA) को क्रियान्वित करने का महाभियान छेड़ेंगे। सत्ता के दूसरे कार्यकाल में जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एक के बाद एक लंबित कार्यों-विवादों का निपटारा हो रहा है, उसे देख कर लगता है कि मोदी-शाह की जोड़ी भाजपा का वह घोषित एजेंडा लागू करने में कोई संकोच नहीं करेगी, जिसके नाम पर उसे जनादेश मिला है।

26 मई, 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने वाले नरेन्द्र मोदी ने पहले कार्यकाल में केवल शासन-प्रशासन में सुधार पर ध्यान केन्द्रित किया, परंतु 30 मई, 2019 को पहले से अधिक बहुमत के साथ दूसरा कार्यकाल आरंभ करते हुए मोदी ने भाजपा के एजेंडा को लागू करने का उत्तरदायित्व अध्यक्ष अमित शाह को सौंप दिया। पार्टी अध्यक्ष होने के नाते अमित शाह पर जहाँ भाजपा का एजेंडा लागू करवाने का उत्तरदायित्व था, वहीं गृह मंत्री के रूप में वे इस एजेंडा को संवैधानिक और वैधानिक दायरे में रह कर क्रियान्वित करने के लिए बाध्य थे। शाह ने भाजपा के हर वायदे को संविधान के दायरे में लाकर पूरा करने का जो महाभियान छेड़ा, उसमें बुधवार को नागरिक संशोधन बिल (CAB) भी जुड़ गया, जो संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब नागरिक संशोधन अधिनियम (CAA) बन जाएगा।

ट्रिपल तलाक़, 370 और राम मंदिर

मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही मुस्लिम समाज में महिलाओं के साथ अन्याय करने वाली ट्रिपल तलाक़ नामक कुप्रथा को समाप्त करने के प्रयास किए थे। मोदी सरकार के इस प्रयास को विरोधी राजनीतिक दलों ने दलगत व तुष्टिकरण की राजनीति के दायरे में रखा, परंतु मोदी, शाह और विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद के तिहरे प्रयासों के पीछे संवैधानिक बल था, जो उच्चतम् न्यायालय (SC) द्वारा दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही मोदी सरकार ने पहले कार्यकाल में ट्रिपल तलाक़ विरोधी बिल लोकसभा में पारित करवाया, परंतु राज्यसभा में बहुमत के अभाव में यह विधेयक विधि (क़ानून) न बन सका। मोदी-शाह-प्रसाद ने हार नहीं मानी। अध्यादेश के माध्यम से ट्रिपल तलाक़ पर प्रतिबंध लगाया, परंतु दूसरे कार्यकाल में मोदी-शाह ने ऐसी चाणक्य नीति चली कि ट्रिपल तलाक़ बिल लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों में पारित हो गया और आज हमारा देश ट्रिपल तलाक़ जैसी कुप्रथा से मुक्त हो चुका है। इस प्रकार भाजपा ने अपने चुनावी वायदे को संविधान के दायरे में पूरा किया। भाजपा और पूर्ववर्ती जनसंघ की विचारधारा में जम्मू-कश्मीर में लागू धारा 370 सदैव खटकती थी। मोदी ने इस ऐतिहासिक कार्य को पूरा करने के लिए ही जैसे शाह को गृह मंत्री बनाया था। शाह ने भी 5 अगस्त, 2019 को धारा 370 उन्मूलन का ऐतिहासिक विधेयक संसद में प्रस्तुत कर दिया। मोदी-शाह ने भाजपा के वायदे या एजेंडा को पूरा करने के लिए अत्यंत राजनीतिक और शासकीय कुशलता का परिचय देते हुए पहले राज्यसभा में यह विधेयक प्रस्तुत किया, क्योंकि लोकसभा में इसका पारित होना निश्चित था। यह विधेयक भी दोनों ही सदनों में पारित हो गया। मोदी-शाह की जोड़ी ने भाजपा के इस वायदे को भी संविधान के दायरे में रह कर पूरा कर दिखाया। इसी प्रकार भाजपा के घोषणा पत्र में वर्षों से राम मंदिर का मुद्दा भी रहा है। कभी राम मंदिर पर उग्र रवैया अपनाने वाले भाजपा के पूर्ववर्ती नेताओं की नई पीढ़ी यानी मोदी-शाह ने इस मुद्दे पर अत्यंत संवेदनशीलता, गंभीरता, धैर्य और संवैधानिक मर्यादा के साथ कार्य किया, जिसके फलस्वरूप आज सुप्रीम कोर्ट की तरफ से अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो चुका है।

अब समान नागरिक संहिता की बारी ?

मोदी और शाह जिस प्रकार भाजपा के एजेंडा को एक के बाद एक लागू कर रहे हैं, उससे अटकलें लगाई जा रही हैं कि मोदी-शाह भाजपा के अगले एजेंडा समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की ओर बढ़ेंगे। यद्यपि भाजपा के अधिकांश वायदों में कहीं न कहीं राष्ट्रवाद व राष्ट्रहित जुड़ा हुआ है। यही कारण है कि राज्यसभा में कई ऐसे राजनीतिक दलों ने ट्रिपल तलाक़, धारा 370 और सीएबी पर सरकार का समर्थन किया, जो मोदी सरकार या एनडीए का हिस्सा नहीं हैं। इन्हीं दलों के कारण विपक्ष को इन तीनों विधेयकों को पारित कराने से रोकने में सफलता नहीं मिली। एक तरफ मोदी-शाह की चाणक्य नीति और दूसरी तरफ भाजपा के एजेंडा की राष्ट्र समर्पित भावना के कारण विपक्ष बँट जाता है और एनडीए का हिस्सा नहीं होने के बावज़ूद कई राजनीतिक दल सरकार का समर्थन करते हैं। कहा जा रहा है कि मोदी के नेतृत्व में गृह मंत्री अमित शाह भाजपा के घोषणा पत्र के अगले एजेंडा यानी समान नागरिक संहिता ( Uniform Civil Code) अर्थात् यूसीसी को लागू करवाने की दिशा में अग्रसर होने वाले हैं। समान नागरिक संहिता को भी अक्सर भाजपा विरोधी व धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले राजनीतिक दल अक्सर मुस्लिम विरोधी बताते आए हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं कहा है कि देश में यूसीसी होना चाहिए, जो सभी नागरिकों को समान अधिकार दे। ऐसे में इस बात को लेकर कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि मोदी-शाह शीघ्र ही समान नागरिक संहिता विधेयक (UCCB) भी न केवल संसद में प्रस्तुत करें, अपितु उसे पारित भी कराएँ। भाजपा यह वायदा भी संविधान के दायरे में ही पूरा करेगी, उस पर सुप्रीम कोर्ट का संबल तो पहले से ही मिला हुआ है। इसके बाद कदाचित जनसंख्या नियंत्रण क़ानून का नंबर आएगा। वैसे यूसीसी में जनसंख्या नियंत्रण का आधा उद्देश्य लगभग समाहित हो ही जाएगा, क्योंकि यूसीसी यही कहता है कि देश में जो भी क़ानून लागू हो, वह सभी धर्म-जाति के लोगों पर एक समान रूप से लागू हो। यूसीसी लागू होते ही जनसंख्या नियंत्रण के लिए कोई क़ानून बनाया जाएगा, तो उसे हर धर्म के लोगों को लागू करना होगा।

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