महाबलीपुरम् में घूमे-फिरे ‘महाबली’ मोदी और जिनपिंग : शनिवार को होगी शिखर बैठक

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 11 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर महाबलीपुरम् में एशिया के दो ‘महाबली’ भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शुक्रवार को मिले। इस बीच पूरा समय दोनों ने घूमने-फिरने में बिताया। शनिवार को दोनों नेताओं के बीच अनौपचारिक शिखर बैठक होगी। इन दोनों महाबलियों में देश और दुनिया का ध्यान खींचने में मोदी जिनपिंग से ज्यादा प्रभावशाली दिखे।

मोदी ने जिनपिंग का किया स्वागत

दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में चेन्नई के समीप स्थित ऐतिहासिक शहर ममल्लापुरम् यानी महाबलीपुरम् प्राचीन मंदिरों, अनोखी झुकी हुई चट्टान जैसी अनमोल विरासतों के लिये प्रख्यात है। इस शहर का चीन से भी लगभग 1700 साल पुराना सम्बंध है। यहीं पर 18वीं सदी में तत्कालीन पल्लव राजा और चीन के शासक के बीच सुरक्षा समझौता हुआ था। ऐतिहासिक काल में यह शहर दोनों देशों के बीच व्यापार के लिये सिल्क रूट के रूप में प्रयोग होता था।

पहले से तय है कि यह मुलाकात अनौपचारिक है। यही कारण है कि जब दोनों नेता मिले तो उनके पहनावे से लेकर हाव-भाव में भी प्रोटोकॉल कहीं आड़े नहीं आया। पीएम मोदी ने तमिलनाडु के पारंपरिक परिधान वेष्टि (धोती जैसा परिधान) आधी बाँह वाला सफेद शर्ट और कंधे पर अंगवस्त्रम धारण किया हुआ था, तो मेहमान जिनपिंग भी सफेद शर्ट और पेंट में दिखे। मोदी ने सड़क पर ही जाकर जिनपिंग का स्वागत किया और अगुवाई की। फिर उन्हें अगले एक घण्टे तक महाबलीपुरम् के प्राचीन मंदिरों, अनोखी झुकी हुई चट्टान जैसी भारत की अनमोल विरासतें दिखाईं। मोदी ने जिनपिंग को भारत-चीन के पुराने रिश्तों के बारे में भी जानकारी दी। जिनपिंग के स्वागत के लिये ममल्लापुरम् में विशेष इंतजाम किये गये थे। वुहान में चीनी राष्ट्रपति ने जिस तरह से भारतीय पीएम मोदी का ग्रैंड वेलकम किया था, उसी तरह से मोदी ने भी महाबलीपुरम में जिनपिंग का उत्साह से स्वागत किया। इसके बाद मोदी ने जिनपिंग को तीन ऐतिहासिक स्मारक दिखाए। इनमें अर्जुन की तपस्यास्थली, पंच रथ और शोर मंदिर शामिल हैं। शाम होते ही शोर मंदिर में दोनों नेताओं ने रामायण की कहानी का मंचन भी देखा। यह सांस्कृतिक नृत्य भारत के सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक नृत्य समूह कला क्षेत्र द्वारा प्रस्तुत किया गया था, जिसे सुविख्यात शास्त्रीय नृत्यांगना और एक्टिविस्ट रुक्मणि देवी ने 1936 में तैयार किया था।

अर्जुन तपस्या स्थली का दौरा किया

इसके बाद पीएम मोदी और जिनपिंग अर्जुन की तपस्या स्थली पहुँचे। यहाँ दोनों नेताओं के बीच काफी बॉन्डिंग देखने को मिली। पीएम मोदी इस स्थल के बारे में शी को कुछ बताते हुए दिखे। दोनों नेता जो भी बोलते थे, अनुवादक उसे उनकी भाषा में बताता था। शी बहुत ध्यान से मोदी की बातें सुनते हुए दिखाई दिये।

अनोखी चट्टान के पास हाथ उठा कर दोस्ती का संदेश दिया

तत्पश्चात मोदी और शी कृष्णा बटरबॉल का भ्रमण करते हुए नज़र आये। यह 250 टन वजन वाली प्राकृतिक चट्टान 1200 साल से एक ही स्थान पर स्थित है। ढलान पर होने के बावजूद यह भारी भरकम चट्टान सदियों से एक ही जगह पर जमी हुई है। यह अपने आप में अजूबा है, इसका संतुलन कमाल का है। पर्यटक यहाँ आकर सेल्फी भी लेते हैं। इस चट्टान की ऊँचाई 6 मीटर और चौड़ाई 5 मीटर है। इस चट्टान के सामने खड़े रह कर मोदी और शी ने हाथ उठा कर दोस्ती का संदेश भी दिया। यहाँ भी पीएम मोदी हाथ के इशारे से जिनपिंग को चट्टान के बारे में जानकारी देते हुए दिखे। इसके बाद शी ने भी मुस्करा कर कुछ कहा।

पंच रथ के सामने दोनों ने दिये पोज़

इसके बाद मोदी और जिनपिंग ने साथ में पंच रथ का भ्रमण किया। महाभारत के पात्रों के नाम पर पंच रथ बनवाया गया है। यहाँ पीएम मोदी और जिनपिंग ने कैमरे के सामने पोज़ भी दिये। कहा जाता है कि 7वीं सदी में पल्लव राजाओं ने इसका निर्माण कराया था। इस पंच रथ को वास्तु कला के साथ संतुलन के लिहाज से अदभुत माना जाता है।

पंच रथ देखने के बाद कुछ देर के लिये दोनों विश्राम करने बैठे तो मोदी चीनी राष्ट्रपति से कुछ चर्चा करते नज़र आये और जिनपिंग उन्हें गंभीरता से सुन रहे थे। विश्राम के दौरान मोदी ने जिनपिंग को खुद अपने हाथों से नारियल पानी और टिशू बढ़ाया। दोनों ने चीनी स्टाफ से चर्चा की और नारियल पानी का लुत्फ उठाया।

शोर मंदिर में किया भ्रमण

यहाँ से मोदी और जिनपिंग समुद्र के किनारे स्थित शोर मंदिर पहुँचे। शोर मंदिर के पूर्व और पश्चिम दोनों दिशाओं में शिव मंदिर हैं, जिनमें गर्भगृह और शिवलिंग स्थापित है। दोनों मंदिरों के बीच एक छोटा-सा मंदिर है, जिसमें लेटे हुए भगवान विष्णु की मूर्ति है। मंदिर के प्रांगण में शास्त्रीय संगीत गूँज रहा था। शाम की सुंदर बेला में पीएम मोदी और शी ने ऐतिहासिक मंदिर का भ्रमण किया। पत्थरों पर कई सुंदर कलाकृतियाँ देखने को मिलती हैं जिनकी तरफ मोदी ने खास तौर से इशारा किया।

प्रतिनिधि मंडल का कराया परिचय

इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर, विदेश सचिव विजय गोखले और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी जिनपिंग से औपचारिक भेंट की। पीएम मोदी ने भारतीय प्रतिनिधि मंडल का परिचय कराया। जिनपिंग ने भी चीनी प्रतिनिधि मंडल का परिचय कराया। मंदिर के प्रांगण में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किया गया था।

शनिवार को होगी शिखर बैठक

अब शनिवार को ममल्लापुरम् में पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच शिखर बैठक होगी, जो दोनों देशों के लिये काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। दोनों देशों के अलावा पाकिस्तान सहित दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण देश भी इस बैठक पर अपनी नज़र बनाये हुए हैं। चीन के वुहान में हुई दोनों नेताओं की शिखर बैठक के एक साल बाद दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी इन्फोर्मल समिट हो रही है, जिसके एजेंडे में व्यापार, आसियान देशों के साथ प्रस्तावित फ्री ट्रेड, सीमा विवाद और 5 जी का मुद्दा प्रमुख रहने वाला है।

बैठक पर पाकिस्तान सहित दुनिया रख रही नज़र

भारत पहले ही कह चुका है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इसके बारे में किसी अन्य देश का बोलना उसे उचित नहीं लगता है। इसलिये इस बैठक में भारत की ओर से कश्मीर मुद्दा उठाने की गुंजाइश नहीं है, परंतु जिनपिंग की ओर से यदि यह मुद्दा उठाया जाता है तो भारत उन्हें अपने पक्ष से अवगत कराएगा। भारत आने से पहले जिनपिंग ने पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को बुलाकर उनके साथ बातचीत की थी, जिसमें ऐसी जानकारी छन कर सामने आई है कि पाकिस्तान ने कश्मीर मामला उठाने के लिये जिनपिंग से सिफारिश की है। इसलिये संभव है कि जिनपिंग की ओर से यह मुद्दा उठाया जाए, परंतु भारत भी अपनी ओर से पूरी तैयारी के साथ बैठक में भाग ले रहा है। बैठक के बाद दोनों देश अलग-अलग बयान जारी करेंगे। शनिवार दोपहर डेढ़ बजे जिनपिंग स्वदेश रवाना हो जाएँगे।

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