‘हम पर एक अहसान करना कि हम पर कोई अहसान न करना’ : मोदी ने ठुकराया पाक प्रस्ताव

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अहमदाबाद, 12 जून 2019 (युवाप्रेस डॉट कॉम)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भाग लेने के लिये गुरुवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक जाने के लिये रवाना होंगे। पीएम मोदी नये कार्यक्रम के अनुसार ओमान, ईरान और मध्य एशियाई देशों से होते हुए बिश्केक पहुँचेंगे। इससे पहले पाकिस्तान ने उनके वीवीआईपी विमान को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने की इजाजत देने की बात कही थी, परंतु ऐसा लगता है कि पीएम मोदी पाकिस्तान का कोई अहसान नहीं लेना चाहते हैं।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि बिश्केक जाने के लिये पीएम के वीवीआईपी एयरक्राफ्ट के लिये दो रूटों का विकल्प चुना गया था। यह दोनों ही विकल्प खुले हुए हैं। हालाँकि अब फैसला यह किया गया है कि वीवीआईपी एयरक्राफ्ट ओमान, ईरान और मध्य एशियाई देशों के रास्ते बिश्केक पहुँचेगा और बिश्केक जाने के लिये पाकिस्तान के एयर स्पेस का उपयोग नहीं किया जाएगा।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने यह स्पष्टता नहीं की कि आखिरकार जब पाकिस्तान से पीएम के विमान को गुजरने देने की खुद भारत सरकार ने अपील की और जब पाकिस्तान ने इस अपील को स्वीकार करते हुए अपने एयर स्पेस को इस्तेमाल करने की सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी तो ऐन मौके पर पीएम के एयरक्राफ्ट का रूट क्यों बदला गया ?

हालाँकि माना जा रहा है कि पाकिस्तान के अधिकारी ने पीएम मोदी के विमान के लिये अपना एयर स्पेस खोलने की सैद्धांतिक मंजूरी देने की बात के साथ एक और महत्वपूर्ण बात का उल्लेख किया था। इस अधिकारी ने कहा था कि पाकिस्तान ने भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी के विमान को बिश्केक जाने के लिये अपने एयर स्पेस से होकर जाने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और कुछ आवश्यक प्रक्रियाएँ पूरी करने के बाद भारत सरकार को इसकी औपचारिक सूचना दे दी जाएगी। पाकिस्तान आशा करता है कि भारत पाकिस्तान की ओर से दिये गये शांति वार्ता के प्रस्ताव का जवाब जरूर देगा।

बस, माना जा रहा है कि पीएम मोदी शांति वार्ता के लिये किसी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहते हैं। जिस एससीओ की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिये पीएम मोदी बिश्केक जा रहे हैं, उस बैठक में पाकिस्तान के पीएम इमरान खान भी पहुँचेंगे। हालाँकि इस बीच इन दोनों के बीच कोई बैठक तो दूर किसी मुलाकात का भी कार्यक्रम नहीं है। ऐसे में यदि पीएम पाकिस्तान के एयरस्पेस का इस्तेमाल करके बिश्केक पहुँचते तो पाकिस्तान की ओर से बिश्केक के सदस्यों के सामने इस बात का ढिंढोरा पीटा जा सकता था कि पाकिस्तान ने भारत को शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया है और इसी क्रम में पाकिस्तान ने भारत के पीएम को पाकिस्तान के एयरस्पेस से गुजरने की इजाजत भी दी।

भारत पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं हो सकते। इसलिये पहले जम्मू-काश्मीर में पाकिस्तान की ओर से सीज़फायर का उल्लंघन बंद होना चाहिये और पाकिस्तान को उसके मौजूद आतंकवादी संगठनों पर कड़ी कार्यवाही करते हुए इन संगठनों द्वारा जम्मू-काश्मीर में चलाई जा रही आतंकी गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगानी होगी। जम्मू-काश्मीर और सीमा पर शांति स्थापित होने के बाद ही भारत पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिये तैयार होगा।

इसके बावजूद पाकिस्तान की पिछली सरकारों की तरह ही इमरान सरकार भी उसके यहाँ मौजूद इनामी आतंकवादियों और उनके संगठनों के खिलाफ कोई असरकारक कार्यवाही नहीं कर रही है। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित किये गये लश्करे-तैयबा और जमात-उद-दावा के संस्थापक हाफिज़ सईद और जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर और हिज्बुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन के विरुद्ध कोई कारगर कार्यवाही नहीं की है। ऐसे में पाकिस्तान के साथ शांति वार्ता से भारत को कोई हल निकलने की उम्मीद नहीं है।

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