‘दामदोर पुत्र’ की दबंगई ने विरोधियों को बनाया ‘दिमागी दिवालियेपन’ का शिकार

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नरेन्द्र मोदी यानी अकाट्य तर्क के धनी। एक निर्धन और पुरुषार्थी पिता दामोदरदास का यह पुत्र आज भारत सहित पूरी दुनिया में छाया हुआ है। देश में लोकसभा चुनाव 2019 का शोर है, परंतु ‘दामोदर पुत्र’ नरेन्द्र मोदी 90 से अधिक रैलियाँ और जनसभाएँ करने के बावजूद व्यस्तता में से समय निकाल कर मीडिया के अनेक स्वरूपों के बीच इंटरव्यू देने पहुँच जाते हैं। न देह में थकान, न मन में निराशा। प्रफुल्लित चेहरा। न हार का भय, न जीत की चिंता। बस एक ही धुन ‘भारत-हिन्दुस्तान-130 करोड़ जनता’ पर सवार नरेन्द्र मोदी चार चरणों के मतदान के बाद भी इतने आश्वस्त दिखाई देते हैं, मानो 23 मई के बाद उनका फिर एक बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेना निश्चित है।

शनिवार 4 मई को भी नरेन्द्र मोदी ने ऐसा ही एक इंटरव्यू दिया। इंडिया टीवी को दिए इस इंटरव्यू में मोदी का सामना मीडिया ही नहीं, अपितु सोशल मीडिया और कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के सवालों से भी हुआ। इस इंटरव्यू में मोदी ने विदेश नीति से लेकर आंतरिक राजनीति तक जो बातें रखीं, उसने इस इंटरव्यू को देखने वालों में से अधिकांश लोगों को प्रभावित किया।

मोदी ने इंटरव्यू में उठाए गए मुद्दों पर जिस अंदाज़ में जवाब दिए, उससे एक बात जो सार के रूप में उभर कर आई, वह यह रही कि इस ‘दामोदर पुत्र’ को मापने के लिए उसके विरोधियों के पास कोई मापपट्टी ही नहीं है। मोदी अर्श की बात करते हैं और विरोधी फर्श की धूल उड़ा कर उन्हें और उनकी सरकार पर बदनामी की कालिख लगाने की कोशिश करते हैं। मोदी ने विरोधियों की ओर से इस चुनाव में उठाए जा रहे तमाम तथाकथित बड़े मुद्दों को अपने जवाबों से इतना छोटा कर दिया कि विरोधियों के मानसिक दिवालियेपन की मानो पोल खुल गई।

राफेल से लेकर मसूद अज़हर तक के मुद्दों पर ‘दामोदर पुत्र’ ने अपनी दबंगई के आगे विरोधियों की टिप्पणियों को उनका ‘दिमागी दिवालियापन’ सिद्ध कर दिया। राफेल डील में तथाकथित भ्रष्टाचार के कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तथाकथित गंभीर आरोपों को मोदी ने अपने अकाट्य तर्क से हवा में उड़ा दिया, तो मसूद अज़हर के वैश्विक आतंकी घोषित होने की टाइमिंग पर सवाल खड़ा करने वालों को यह कहते हुए लताड़ा कि इनके पास मोदी विरोध की राजनीति से ऊपर उठ कर सोचने का सामर्थ्य ही नहीं है। मोदी ने कहा कि क्या चुनाव आयोग यूएन को नोटिस जारी करे ?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाँच वर्ष तक सरकार चलाने के बाद भी जिस साहस के साथ पूरा इंटरव्यू दिया, उसमें उनका आत्म-विश्वास देख कर एक बार तो विरोधियों को भी ग़ुस्सा आया होगा। मोदी विरोध के नाम पर राजनीति चलाने का चांस चाहने वालों की टोली मोदी के इंस अंदाज़ से अचंभे में है। मोदी के अनुसार उनके विरोधियों के लिए कोई मुद्दे ही नहीं बचे हैं। वास्तव में विरोधियों के मोदी हटाओ एजेंडा ने जनता के सामने एक ही प्रश्न रखा है कि मोदी को हटाना है या रखना है ? विरोधियों ने जनता को यह विकल्प नहीं दिया है कि मोदी को क्यों हटाना है और उसकी जगह किसे बैठाना है ? मोदी के इन तर्कों से सिद्ध होता है कि मोदी विरोध की खोखली राजनीति करने वाले विरोधियों के मन और मस्तिष्क में देश के लिए कोई विज़न नहीं है। मोदी के उत्तरों का सार यही है कि मोदी विरोधी दिमागी दिवालियापन का शिकार हैं।

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