सौर ऊर्जा के उपयोग से इस तरह NEW INDIA का सपना साकार कर रही ये महिलाएँ

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद 31 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार न्यू इंडिया का सपना साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें उसे देश की जागरूक जनता का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। देश में उत्पन्न होने वाली बिजली से विशाल देश की सभी आवश्यकताओं को पूरा कर पाना असंभव है, इसलिये मोदी सरकार ने सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के विकल्पों को उपयोग में लाने के लिये लोगों को जागरूक करना शुरू किया, जिसके परिणाम भी दिखने लगे हैं। देश के कई गाँवों में ग्रामवासियों ने सोलर पैनल लगवा कर वर्षों से रात को अंधकार में डूब जाने वाले अपने गाँवों को रोशन किया है तो कई गाँवों में किसानों ने अपने खेतों में सोलर पैनल लगवाकर खेती के लिये आवश्यक बिजली खुद पैदा करने लगे हैं। पीएम मोदी के न्यू इंडिया के सपने को साकार करने में महिलाएँ भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

भुट्टे के ठेले पर सोलर पैनल का उपयोग

देश की आईटी सिटी के रूप में विख्यात बेंगलुरु की सड़क पर भुट्टा भूनने वाली एक महिला के ठेले पर सोलर पैनल देखकर लोग अनायास ही वहाँ रुक जाते हैं और विस्मय से इस महिला को देखते हैं। पहले कोयले की सिगड़ी पर भुट्टे को भूनने के लिये एक हाथ से लगातार पंखे से हवा करनी पड़ती थी, इससे कोयले की आँच तेज होती थी और दूसरे हाथ से भुट्टे को घुमा-घुमाकर चारों ओर से सेकना पड़ता था। अब न्यू इंडिया की इस महिला ने सोलर ऊर्जा के नये विकल्प को उपयोग में लाकर अपनी मेहनत को आसान बना लिया है। जैसा कि ठेले पर देख सकते हैं, उसने सोलर ऊर्जा से चलने वाला पंखा लगाया हुआ है, जिससे अब उसे हाथ से लगातार पंखा चलाने की जरूरत नहीं पड़ती है। इसके अलावा अब भुट्टे भुनकर तैयार होने की प्रक्रिया भी तेज हो गई है, जिससे वह एक वक्त में कई भुट्टे भूनकर ज्यादा से ज्यादा पैसे कमा सकती है। आधुनिक साधन का उपयोग करने वाली इस महिला के ठेले पर लोगों का खासा जमावड़ा रहता है और वह अच्छी खासी कमाई कर लेती है। इतना ही नहीं, न्यू इंडिया की यह महिला मोबाइल वॉलेट भी उपयोग करती है, जिससे लोग उसे ऑनलाइन पेमेंट भी करते हैं।

75 साल की सेलवम्मा भी बनी प्रेरणा

बेंगलुरु की ही रहनेवाली 75 साल की वयोवृद्ध सेलवम्मा भी सड़क के किनारे भुट्टे बेचने का काम करती हैं। उन्होंने भी सोलर पैनल उपयोग करके आधुनिक पीढ़ी को प्रेरणा देने का काम किया है। सेलवम्मा पिछले 20 साल से भुट्टे बेचने का काम करती हैं और अपने परिवार का गुजारा करती हैं। सोलर पैनल के इस्तेमाल से सेलवम्मा के ठेले पर कोयले का उपयोग आधा हो गया है। वह सौर ऊर्जा की मदद से भुट्टे भूनने का काम कर रही हैं। सेलवम्मा को सौर ऊर्जा से जुड़े उपकरण एक सेवाभावी संगठन (NGO) ने उपलब्ध कराये हैं। इससे एक तरफ सेलवम्मा के ठेले का खर्च कम हो गया है और दूसरी तरफ उनका मुनाफा बढ़ गया है। सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से कोयले के कारण होने वाले धुँए के प्रदूषण से भी राहत मिल गई है।

आप सोच रहे होंगे कि इससे मोदी के न्यू इंडिया का सपना कैसे साकार होगा ? तो आपको बता दें कि बड़े-बड़े अनुभवी और बुजुर्ग लोग कह गये हैं कि हर बड़े काम की शुरुआत तो छोटे से ही होती है। एक अकेले गांधीजी निकले थे देश को आज़ाद कराने के लिये, फिर लोग जुड़ते गये और कारवाँ बनता गया। छोटे से स्तर से की जा रही यह शुरुआत ही एक दिन व्यापक स्वरूप धारण करेगी। सेलवम्मा के ठेले पर सौर ऊर्जा के जो उपकरण हैं उनमें एक डीसी फैन और एक हल्की सी लीथियम-आयन बैटरी है। ठेले पर सौर ऊर्जा से पंखा हमेशा चलता रहता है, जिससे कोयले को हवा मिलती है और भुट्टा जल्दी भुन जाता है। सेलवम्मा के अनुसार उनकी बस्ती के पास एक एनजीओ ने उन्हें यह उपकरण उपलब्ध कराये हैं, जिनकी कीमत लगभग 9 हजार रुपये है।

इन महिलाओं ने भी किया है प्रेरणादायी काम

केरल के इडुक्की जिले के सुदूर इडामालकुडी गाँव पहुँचने का कोई पक्का रास्ता नहीं है। शहर से इस गाँव में पहुँचने के लिये जंगली हाथियों से भरे जंगल का 18 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जो कि बहुत जोखिम भरा है। इस गाँव की महिलाओं ने जो क्रांतिकारी कदम उठाया, वह आश्चर्यचकित करने वाला है। यह गाँव जितना शहर से दूर है, उससे कहीं ज्यादा विकास से दूर था, परंतु इस गाँव की 60 महिलाओं ने मिलकर चुमाट्टू कोट्टम यानी सिर पर बोझा ढोने वाला एक समूह बनाया और सिर पर बोझा ढोने का काम करने वाले पुरुषों के वर्चस्व को तोड़ दिया। यह गाँव भी ऐसे ही गाँवों में शामिल था, जो रात होते ही अंधकार की चादर ओढ़ लेता था, परंतु जब इन महिलाओं ने ग्राम पंचायत पर जोर डाला तो पंचायत ने फैसला किया कि गाँव को सोलर पैनल से रोशन करना है। सोलर पैनल को सिर पर उठाकर गाँव तक लाने की जिम्मेदारी महिलाओं के इसी समूह ने सँभाली और 100 सोलर पैनल पेट्टीमुडी से गाँव तक लेकर आईं। अब गाँव के 240 परिवार ऊर्जा यानी रोशनी से रोशन हैं। गाँव में इक्के-दुक्के टीवी सेट भी आ गये हैं, जो सौर ऊर्जा से ही चलते हैं।

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