इंदिरा के बनाए ‘नियम 56’ से मोदी कर रहे भ्रष्टाचार पर ‘56 इंची’ प्रहार !

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* अब तक 76 सरकारी अधिकारियों को जबरन घर बैठाया गया

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 26 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगातार कड़े कदम उठा रहे हैं। देश का हर नागरिक मोदी सरकार के भ्रष्टाचार विरोधी कदमों के असर को टीवी न्यूज़ चैनलों पर हर रोज देख रहा है। एक तरफ तो मोदी सरकार देश की राजनीति से जुड़े लोगों के भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ा रवैया अपनाए हुए है, तो दूसरी तरफ प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार पर भी करारा प्रहार कर रहे हैं। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर भारी चोट पहुँचाने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सहायता कांग्रेस की दिग्गज नेता और पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत इंदिरा गांधी भी कर रही हैं !

अब आप पूछेंगे कि ऐसा कैसे हो सकता है ? जी हाँ, ऐसा ही हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सरकार के दूसरे कार्यकाल में प्रशासन में उच्च पदों पर बैठ कर भ्रष्टाचार कर रहे उच्चाधिकारियों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई कर रहे हैं और यह कार्रवाई नियम 56 के तहत की जा रही है। इस नियम 56 का प्रावधान है कि जिस अधिकारी की आयु 50 वर्ष हो चुकी हो और उसकी निष्ठा संदिग्ध पाई जाए या वह पर्याप्त कार्यनिष्पादन न दे रहा हो, तो उसे सरकार अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) देकर घर बैठा सकती है। मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में इस नियम 56 के उपयोग में भारी तीव्रता और गति दिखाई है और अब तक भ्रष्ट गतिविधियों की आशंका से घिरे 76 अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति यानी सीआर देकर घर बैठा दिया गया है।

मोदी सरकार नियम 56 के साथ एक्शन में

अब आते हैं मूल प्रश्न पर कि भ्रष्टाचार विरोधी मोदी सरकार के इस अभियान में कांग्रेस नेता व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कैसे मदद कर रही हैं ? इसका उत्तर यह है कि मोदी सरकार जिस नियम 56 के तहत यह कार्रवाई कर रही है, उसे बनाया था इंदिरा गांधी ने। दरअसल नियम 56 सेंट्रल सिविल सर्विसेज़ (CCC) (पेंशन) रूल्स, 1972 के मौलिक नियम (Fundamental Rules) का एक हिस्सा है। एफआर और सीसीसी (पेंशन) रूल्स वर्ष 1972 में बनाया गया था, जब इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं। इंदिरा सरकार ने यह नियम लालफीताशाही व भ्रष्टाचार की मानसिकता से घिरे उच्चाधिकारियों पर लगाम लगाने के लिए यह नियम बनाया था। यद्यपि इंदिरा सरकार के इस नियम को लेकर विवाद भी हुए, कानूनी दाव-पेच भी खेले गए, परंतु नरेन्द्र मोदी ने जब 2014 में देश की बागडोर संभाली, तो नियम 56 का जम कर उपयोग शुरू किया, ताकि प्रशासन से भ्रष्टाचार का ख़ात्मा किया जा सके। मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2014-15 में पहली बार नियम 56 के तहत कई वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई।

दूसरे कार्यकाल में दमदार प्रहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में नियम 56 के तहत कार्रवाई को और दमदार बनाया और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के सहयोग से अब तक 76 अधिकारियों पर नियम 56 की गाज गिराई। ताजा मामले में भ्रष्टाचार पर नकेल कसते हुए सरकार ने केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने निरीक्षक स्तर के 22 अधिकारियों को भ्रष्टाचार व अन्य आरोपों के तहत सीआर थमा कर घर बैठा दिया। ये सभी अधिकारी अधीक्षक/एओ रैंक के हैं। वैश्विक स्तर पर जीएसटी और आयात कर संग्रह की निगरानी करने वाले सीबीआईसी ने इस वर्ष जून से लेकर अब तक तीसरी बार भ्रष्ट कर अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की है। जिन अधिकारियों को समय से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्त किया गया है, उनमें 11 नागपुर-भोपाल क्षेत्र हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने इंदौर की एक कंपनी को अवैध रूप से सिगरेट विनिर्माण की स्वीकृति दी। इसके अलावा चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, मेरठ व चंडीगढ़ क्षेत्र के 1-1 और मुंबई, जयपुर तथा बेंगलुरू क्षेत्र के 2-2 अधिकारियों को सीआर देकर घर बैठा दिया गया है। इससे पहले नियम 56 के तहत भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 27 उच्चाधिकारियों को सीआर दिया गया था, जिनमें 12 अधिकारी केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के थे। इसी प्रकार सरकार ने जून में सीबीआईसी के 15 आयुक्त (COMMISSIONER) स्तर के अधिकारियों को भ्रष्टाचार, घूस लेने-देने, तस्करी व आपराधिक साज़िशों के आरोपों में समय पूर्व सेवानिवृत्त कर दिया था, तो 12 वरिष्ठ आईआरएस अधिकारियों को भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न, आय से अधिक सम्पत्ति के आरोपों में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया था।

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