जानिये क्या है NPR और इसके मायने, जिसे लागू करने जा रही है मोदी सरकार ?

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विशेष रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। एक तरफ नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़ंस (NRC) को लेकर देश भर में विरोध और आंदोलनों का दौर चल रहा है, तो दूसरी तरफ केन्द्र सरकार यह स्पष्टता करते हुए विरोध और असंतोष को शांत करने का प्रयास कर रही है कि नागरिकता कानून का देश के नागरिकों से कोई लेना-देना नहीं है और यह कानून पड़ोसी देशों से भाग कर भारत में आये पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिये बनाया गया है। एनआरसी को लेकर भी सरकार लोगों को समझाने में जुटी है कि जब एनआरसी लाया ही नहीं गया है तो उसे लेकर क्यों तूफान खड़ा किया जा रहा है। दरअसल, सीएए और एनआरसी को लेकर जो हंगामा बरपा है, उसे देखते हुए केन्द्र सरकार इसे पिछले दरवाजे से लागू करने पर काम कर रही है। जानिए कैसे ?

गैज़ेट नोटिफिकेशन से लागू हुआ एनआरसी

मंगलवार को केन्द्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अर्थात् नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) को अपडेट करने की मंजूरी दी है और इसी के साथ पूरी कवायद के लिये 3,941 करोड़ रुपये का बजट भी आबंटित करने की मंजूरी दी है। इस प्रकार 2021 की जनगणना से पहले 2020 में एनपीआर अपडेट किया जाएगा। इस राष्ट्रीय जनसांख्यिकी रजिस्टर में प्रत्येक नागरिक की जानकारी शामिल की जाएगी। यह रजिस्टर  नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों के तहत स्थानीय, उप-जिला, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तैयार किया जाता है। पॉपुलेशन रजिस्टर में तीन प्रक्रियाएँ होंगी। पहले चरण में अगले साल एक अप्रैल-2020 लेकर से 30 सितंबर-2020 के बीच केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी घर-घर जाकर आँकड़े जुटाएँगे। दूसरा चरण 9 से 28 फरवरी-2021 के बीच पूरा होगा और तीसरे चरण में संशोधन की प्रक्रिया 1 से 5 मार्च के बीच पूरी की जाएगी।

जानकारों की मानें तो इस एनपीआर को अवैध प्रवासियों की पहचान करने के तौर पर ही लाया जा रहा है। एक बार पहचान हो जाएगी तो सीएए-2019 के माध्यम से अवैध और संदिग्ध मुस्लिमों को छाँट कर बाहर कर दिया जाएगा और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बने या बनाये जा रहे डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा। इससे संकेत मिल रहे हैं कि वास्तव में मोदी सरकार 31 जुलाई-2019 को जारी गैज़ेट नोटिफिकेशन के साथ पूरे देश में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़ंस (एनआरसी) को लागू कर चुकी है, अब इस दिशा में प्रक्रिया पर अमल शुरू करने जा रही है। इस नोटिफिकेशन में कहा गया है कि, ‘सिटीज़नशिप रूल्स (रजिस्ट्रेशन ऑफ सिटीजंस एंड इश्यू ऑफ नेशनल आइडेंटिटी कार्ड्स) 2003’ के नियम 3 के उपनियम 4 के अनुसार जनसंख्या रजिस्टर (पीआर) तैयार और अपडेट किया जाए और असम को छोड़ कर पूरे देश में घर-घर जाकर गणना करने के लिये फील्डवर्क किया जाए। इस नोटिफिकेशन के तहत ही नये साल में 1 अप्रैल से 30 सितंबर-2020 के बीच स्थानीय रजिस्ट्रार के दायरे में रहने वाले नागरिकों की जानकारी जुटाई जाएगी। फर्क सिर्फ इतना है कि इस नोटिफिकेशन के नियम 3 में एनआरसी के स्थान पर ‘नेशनल रजिस्टर फोर इंडियन सिटीज़ंस (एनआरआईसी)’ की अवधारणा की गई है और इसका उपनियम-4 इस एनआरआईसी की तैयारी की बात कहता है। इस नोटिफिकेशन से यह भ्रम टूट जाना चाहिये कि देश में एनआरसी लाने की घोषणा नहीं हुई है। केवल अंतर इतना ही है कि, इसे एनआरआईसी कहा जा रहा है और इसमें असम शामिल नहीं है। क्योंकि असम में इसे लागू किया जा चुका है, जो कि 1985 के असम समझौते के तहत लागू किया गया था।

कैसे लागू होगा एनआरआईसी ?

एनआरआईसी को लागू करने की दिशा में ‘पॉपुलेशन रजिस्टर (पीआर)’ पहला कदम होगा। 2003 के रूल्स के नियम 3 के उपनियम (5) में कहा गया है कि, भारतीय नागरिकों के स्थानीय रजिस्टर में जनसंख्या रजिस्टर से उपयुक्त वेरिफिकेशन के बाद लोगों का विवरण शामिल किया जाएगा। यही बात गैज़ेट नोटिफिकेशन में भी कही गई है कि, जनसंख्या रजिस्टर (पीआर) के लिये घर-घर जाकर गणना 1 अप्रैल से 30 सितंबर-2020 तक की जाएगी। 2003 के सिटीज़नशिप रूल्स में जनसंख्या रजिस्टर को पारिभाषित करते हुए लिखा गया है कि इसमें गाँव अथवा ग्रामीण क्षेत्र, कस्बे या वार्ड या शहरी क्षेत्र के सीमांकित क्षेत्र में रहने वाले लोगों का विवरण शामिल किया जाएगा। इस रूल में एनआरआईसी के बारे में कहा गया है कि इस नेशनल रजिस्टर ऑफ इंडियन सिटीज़ंस में भारत और भारत से बाहर रहने वाले भारतीय नागरिकों का विवरण होगा।

केन्द्र सरकार इस एनआरआईसी को चार हिस्सों में बाँटेगी। 1- भारतीय नागरिकों का स्टेट रजिस्टर, 2- भारतीय नागरिकों का जिला रजिस्टर, 3- भारतीय नागरिकों का सब-डिस्ट्रिक्ट रजिस्टर और 4- भारतीय नागरिकों का स्थानीय रजिस्टर। इस रजिस्टर में नागरिकों का वह विवरण होगा जो केन्द्र सरकार रजिस्ट्रार जनरल ऑफ सिटीज़ंस रजिस्ट्रेशन की सलाह से निर्धारित करेगी।

इसका सीधा-सीधा और संक्षिप्त अर्थ यह है कि पहले एनपीआर अपडेट करके नागरिकों का विवरण जुटाया जाएगा। इसके बाद सिटीज़नशिप रूल्स 2003 के नियम 4 के उपनियम (3) के अनुसार जनसंख्या रजिस्टर में हर परिवार और व्यक्ति का जो विवरण होगा, उसे स्थानीय रजिस्ट्रार द्वारा जाँच करके सत्यापित किया जाएगा। इस रूल्स के नियम-4 के उपनियम (4) में साफ तौर पर कहा गया है कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया के तहत जिन लोगों की नागरिकता संदिग्ध होगी, उनके विवरण को स्थानीय रजिस्ट्रार की ओर से आगे की जाँच के लिये टिप्पणी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। ऐसे लोगों और उनके परिवार को वेरिफिकेशन की प्रक्रिया खत्म होने के बाद एक निर्धारित प्रो-फार्मा में डाल दिया जाएगा। इस रूल्स के नियम-4 का उपनियम (5) यह भी कहता है कि संदिग्ध नागरिकों को एनआरआईसी में शामिल करने या नहीं करने का अंतिम निर्णय करने से पहले उनकी सुनवाई सिटीज़न रजिस्ट्रेशन के सब-डिस्ट्रिक्ट (तहसील या तालुका) के रजिस्ट्रार के समक्ष होगी। इसके बाद भारतीय नागरिकों के स्थानीय रजिस्टर का प्रारूप तहसील या तालुका रजिस्ट्रार की ओर से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि उसको लेकर लोगों की आपत्ति या इसमें शामिल करने को लेकर अनुरोध स्वीकार किये जा सकें।

वाजपेयी सरकार लाई थी नागरिकता संशोधन कानून (CAA)

दरअसल जनगणना के लिये एक अलग कानून है, जो सेंसस एक्ट ऑफ 1948 कहलाता है। इसी कानून के तहत देश में हर दस साल में जनगणना की जाती है। दूसरी तरफ जनसंख्या रजिस्टर (पीआर), राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) और एनआरआईसी को 1955 के सिटीज़नशिप कानून के तहत लागू किया जा रहा है। इस कानून में वाजपेयी सरकार के कार्यकाल में सिटीज़नशिप संशोधन कानून-2003 (सीएए) लाकर संशोधन किया गया था। इस संशोधन के माध्यम से इसमें अवैध प्रवासियों (घुसपैठियों) और मूल भारतीय नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर यानी एनआरआईसी का प्रावधान शामिल किया गया था। इस सीएए के खंड 2 में स्पष्ट किया गया है कि अवैध प्रवासी का तात्पर्य ऐसे नागरिकों से है, जो अन्य देश से भारत में अवैध तरीके से आये हों और रह रहे हों। मोदी सरकार इसी संशोधित कानून के तहत गैज़ेट नोटिफिकेशन जारी करके पिछले दरवाजे से एनआरसी लागू करने जा रही है।

जबकि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर यानी एनपीआर की प्रक्रिया पहली बार वर्ष 2010-11 में यूपीए सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई थी। हालाँकि इसे कभी एनआरआईसी तक आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके बाद 2015 में एनपीआर को अपडेट किया गया था, तब भी इसे एनआरआईसी के स्तर तक नहीं ले जाया गया था। अब मंगलवार को केन्द्रीय कैबिनेट ने एनपीआर को अपडेट करने की मंजूरी दी है और इसी के साथ पूरी कवायद के लिये 3,941 करोड़ रुपये का बजट आबंटित करने की भी मंजूरी दी है। इस प्रकार 2021 की जनगणना से पहले 2020 में एनपीआर अपडेट किया जाएगा। अपडेट करने के लिये 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2020 तक मुहिम चलाई जाएगी। जानकारों का कहना है कि इस एनपीआर को अवैध प्रवासियों की पहचान के तौर पर लाया जा रहा है। एक बार पहचान हो जाएगी तो सीएए-2019 के माध्यम से अवैध और संदिग्ध मुस्लिमों को छाँट कर बाहर कर दिया जाएगा और उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों में बने या बनाये जा रहे डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाएगा। देश भर में लगभग एक दर्जन डिटेंशन सेंटर तैयार हो चुके हैं, इनमें सबसे अधिक 10 असम में हैं। इसके अलावा एक नवी मुंबई और एक बेंगलुरु ग्राम्य क्षेत्र में है। इस प्रकार स्पष्ट है कि एनपीआर के माध्यम से एनआरआईसी लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

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