मोदी की ‘शपथ स्ट्राइक’ : ‘चुन-चुन’ कर चुने अतिथि, जिन्होंने ‘गिन-गिन’ कर सजाया था मोदी विरोधी मंच !

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NON BJP-NDA शासित 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दिया गया निमंत्रण

अतिथियों की सूची में सबसे चर्चित ममता, जिन्होंने मोदी को EXPIRY PM कहा था

केजरीवाल-कुमारस्वामी-केसीआर को भी बुलावा, जिन्होंने मोदी का धुर-विरोध किया

मोदी विरोधी फतवा लेकर पूरे देश में घूमने वाले नायडू को जनता ने निमंत्रण योग्य भी न छोड़ा

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 29 मई, 2019। मनोनीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 30 मई, 2019 गुरुवार सायं 7.00 बजे दूसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करने वाले हैं। शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भव्य तैयारियाँ की जा रही हैं। इस समारोह का आकर्षण समारोह के साक्षी बनने वाले अतिथित होंगे। नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में अतिथियों का चुनाव चुन-चुन कर किया है। उन्होंने जहाँ एक ओर अपने शपथ ग्रहण समारोह में इस बार South Asian Association for Regional Cooperation यानी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेश-सार्क-SAARC) देशों से किनारा कर पाकिस्तान और इमरान खान की सर्जिकल स्ट्राइक कर दी, वहीं दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी व आर्थिक सहयोग संगठन Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (बिम्सटेक-BIMSTEC) राष्ट्राध्यक्षों को बुला कर चीन और शी जिनपिंग को कड़ा संदेश दे दिया।

नेपाल में हुए चौथे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व अन्य सदस्य राष्ट्राध्यक्ष।

यह तो अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की बात हुई। नरेन्द्र मोदी ने घरेलू अतिथियों की भी लम्बी सूची तैयार की है और इस सूची में ‘चुन-चुन’ कर ऐसे अतिथियों का चयन किया गया है, जो पिछले तीन वर्षों से मोदी विरोधियों के सिर ‘गिन-गिन’ कर मोदी को सत्ता से हटाने के लिए दिल्ली से लेकर बेंगलुरू (कर्नाटक), भोपाल (मध्य प्रदेश), जयपुर (राजस्थान), रायपुर (छत्तीसगढ़) और कोलकाता (पश्चिम बंगाल) तक मोदी विरोधी मंच सजा रहे थे। मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह में मोदी विरोधी मंचों पर अचूक उपस्थिति दर्ज कराने वाले सभी मुख्यमंत्रियों को निमंत्रण दिया है। वैसे शपथ ग्रहण समारोह में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग-NDA) शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री बुलाए गए हैं, परंतु मोदी ने अतिथियों की सूची में NON BJP-NDA शासित 12 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी शामिल कर एक तरफ अपने शपथ समारोह को सौहार्दपूर्ण और भव्य बनाने का प्रयास किया है, वहीं इन 12 मुख्यमंत्रियों में तीन वर्षों से मोदी विरोध के नाम का मोर्चा खोले बैठे 5 मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। शेष 5 मुख्यमंत्री कांग्रेस शासित राज्यों के हैं, तो 2 नए मुख्यमंत्री ऐसे हैं, जो मोदी विरोधी मंच का कभी हिस्सा नहीं बने। इन दोनों मुख्यमंत्रियों को भी निमंत्रण देकर मोदी ने एनडीए के कुनबे को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

सबसे हॉट गेस्ट ममता, पर हाँ के बाद किया इनकार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री व टीएमसी अध्यक्ष ममता बैनर्जी। (फाइल चित्र)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण मिलने के बाद सबसे पहली हामी ममता बैनर्जी ने भरी, जिन्होंने लोकसभा चुनाव 2019 के घमासान के दौरान ज़ुबानी जंग की सारी सीमाएँ तोड़ दी थीं और नरेन्द्र मोदी को एक्सपायरी पीएम करार दिया था। हालाँकि अब वे यह कह कर मुकर गईं कि बंगाल में कोई राजनीतिक हत्या नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल में कथित रूप से राजनीतिक हत्या का शिकार हुए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों को भी निमंत्रण दिया गया है। इसीलिए ममता ने अब शपथ ग्रहण समारोह में आने से इनकार कर दिया है। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता ने फानी चक्रवात के दौरान न केवल PM मोदी का फोन नहीं उठाया, अपितु उनके साथ मंच साझा करने से इनकार कर दिया था। ममता इस दौरान भारत के संघीय ढाँचे से विद्रोह करती हुई नज़र आईं, परंतु शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण स्वीकार करते हुए ममता ने उसी संघीय ढाँचे की मूल भावना का सम्मान करने की दलील दी और कहा था, ‘मैंने कुछ अन्य मुख्यमंत्रियों से भी बात की और इसमें शिरकत करने का फैसला किया। संविधान के तहत कुछ औपचारिक (सेरेमोनियल) कार्यक्रम होते हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के शपथ-ग्रहण समारोहों के लिए न्योता मिलने पर हम ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की कोशिश करते हैं।’ हालाँकि अब ममता नहीं आएँगी। चुनावों में ममता को भाजपा ने करारी टक्कर दी है। ऐसे में चुनावी तल्खी के बाद ममता को गेस्ट लिस्ट में शामिल कर मोदी ने हॉट गेस्ट बनने का अवसर दिया था, परंतु ममता ने ऐन मौके पर अब इनकार कर दिया है। चुनावों में ममता को भाजपा ने करारी टक्कर दी है। ऐसे में चुनावी तल्खी के बाद ममता ने शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने की हामी भर कर स्वयं को समारोह की सबसे हॉट गेस्ट बना लिया है।

ये चेहरे भी रहेंगे आकर्षण का केन्द्र

मोदी विरोध की राजनीति करने वाले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (दिल्ली), के. चंद्रशेखर राव उर्फ केसीआर (तेलंगाना) और एच. डी. कुमारस्वामी (कर्नाटक)। (फाइल चित्र)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में तीन वर्षों तक मोदी विरोधी टोली का हिस्सा रहे और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के हाथों में हाथ थामे नज़र आए दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आआपा-AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस-TRS) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) और कर्नाटक में भाजपा को सत्ता में न आने देने पर विजयी जश्न मनाने वाले मुख्यमंत्री तथा जनता दल ‘सेकुलर’ (जेडीएस-JDS) के नेता एच. डी. कुमारस्वामी को भी निमंत्रण दिया गया है। ये तीनों चेहरे भी मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में आकर्षण का केन्द्र रहेंगे, क्योंकि केजरीवाल और केसीआर जहाँ हर मोदी विरोधी मंच पर नज़र आए थे, वहीं कुमारस्वामी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह को मोदी विरोधी मंच में परिवर्तित कर दिया था। इनमें AAP को दिल्ली में और जेडीएस को कर्नाटक में भाजपा के हाथों चुनावों में जहाँ घोर विफलता मिली है, वहीं टीआरएस के गढ़ तेलंगाना में भी भाजपा ने सेंध लगाने में सफलता प्राप्त की है।

कांग्रेस शासित 5 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निमंत्रण

दिसम्बर-2018 में भाजपा को सत्ता से हटा कर जीतने वाले और अपने शपथ ग्रहण समारोहों को मोदी विरोधी मंच में परिवर्तित कर देने वाले कांग्रेसी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (राजस्थान), कमलनाथ (मध्य प्रदेश) और भूपेश बघेल (छत्तीसगढ़)। फाइल चित्र

मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में कांग्रेस शासित पाँच राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी निमंत्रण दिया गया है। इनमें तीन चेहरे ऐसे हैं, जिन्होंने दिसम्बर-2018 में जीत हासिल कर अपने भोपाल, जयपुर और रायपुर में हुए अपने शपथ ग्रहण समारोह को मोदी विरोधी मंच बना दिया था। इनमें मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शामिल हैं। तीनों ही राज्यों में भाजपा के हाथों कांग्रेस की बुरी दुर्गति हुई है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ कांग्रेस शासित पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी। (फाइल चित्र)

इसके अलावा पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पुड्डुचेरी के मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी भी आमंत्रितों में शामिल हैं। ये दोनों ही मुख्यमंत्री अपने राज्यों में कांग्रेस की लाज बचाने में सफल रहे हैं। पंजाब में कांग्रेस ने 13 में से 8, तो पुड्डुचेरी की 1 सीट जीतने में सफलता पाई। मोदी की सुनामी के बावजूद अमरिंदर की लोकप्रियता के कारण पंजाब में भाजपा 2 और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी-SAD) 2 सीटें ही जीत सके।

मोदी की यह पहल एनडीए का भविष्य सँवारेगी

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। (फाइल चित्र)
आंध्र प्रदेश में नए युवा नेता के रूप में उभरे व विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत हासिल करने के बाद और मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से पहले वाएसआर कांग्रेस अध्यक्ष जगनमोहन नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से नरेन्द्र मोदी से भेंट की। (फाइल चित्र)

नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में दो ऐसे मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे, जिन्होंने लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की है। इनमें ओडिशा के मुख्यमंत्री व बीजू जनता दल (बीजद-बीजेडी-BJD) के अध्यक्ष नवीन पटनायक तथा आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और Yuvajana Sramika Raithu Congress Party (वायएसआरसीपी-YSRCP) यानी वायएसआर कांग्रेस (YSR CONGRESS) के अध्यक्ष जगनमोहन रेड्डी शामिल हैं। नवीन ने बुधवार को ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है, तो जगह गुरूवार को शपथ लेने वाले हैं। नवीन पाँचवीं बार, जबकि जगन पहली बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। यद्यपि चुनावी घमासान में मोदी और भाजपा ने ओडिशा में नवीन-बीजेडी तथा आंध्र प्रदेश में जगन-वायएसआर कांग्रेस के विरुद्ध चुनाव लड़ा, परंतु चुनावी घमासान शांत होने के बाद जहाँ एक तरफ नवीन और जगन ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में मोदी को निमंत्रण देकर अच्छी लोकतांत्रिक पहल की, वहीं मोदी ने भी अपने शपथ ग्रहण समारोह में नवीन-जगन को आमंत्रित कर दूरदर्शिता दिखाई है। नवीन और जगन की विशेषता यह है कि ये दोनों कभी भी मोदी विरोधी टोली का हिस्सा नहीं रहे और दोनों का रुख कांग्रेस विरोधी रहा है। ऐसे में नवीन-बीजेडी और जगन-वायएसआर कांग्रेस का भविष्य में एनडीए का हिस्सा बनने की प्रबल संभावना है।

चंद्रबाबू नायडू – न घर के रहे न घाट के

तीन वर्षों तक मोदी विरोधी मुहीम के मुखिया बने रहे चंद्रबाबू नायडू उन तथाकथित मोदी विरोधी झुंड के नेताओं के साथ, जो चुनावी ज़मीन पर टुकड़े-टुकड़े और चुनाव परिणामों में ढेर हो गए। (फाइल चित्र)

लोकसभा चुनाव 2019 में सबसे बड़ी ट्रैजेडी तेलुगू देशम् पार्टी (तेदेपा-टीडीपी-TDP) अध्यक्ष और आज ही आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बन चुके चंद्रबाबू नायडू के साथ हुई। मोदी विरोध का फतवा लेकर दिल्ली, कोलकाता, बेंगलुरू, लखनऊ से लेकर देश भर में घूमने वाले नायडू से आंध्र प्रदेश की जनता ने न केवल लोकसभा चुनावों में 3 सीटों तक सीमित कर दिया, अपितु विधानसभा चुनावों में हैदराबाद की ज़मीन खींच कर इस योग्य भी नहीं छोड़ा कि उन्हें मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में एक मुख्यमंत्री के रूप में निमंत्रण दिया जा सके।

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