कारगिल विजय दिवस : युद्ध के समय कहाँ और क्या कर रहे थे भाजपा महासचिव नरेन्द्र मोदी ? देखिए PHOTO-VIDEO

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 26 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। नरेन्द्र मोदी आज देश के प्रधानमंत्री हैं। उनका सीना 26 जुलाई, 2019 को कारगिल विजय दिवस की बीसवीं बरसी पर गर्व से चौड़ा होना स्वाभाविक है। जहाँ पूरा देश कारगिल विजय दिवस को भारत के सदाकालीन शत्रु पाकिस्तान पर बड़ी विजय के उत्सव के रूप में याद कर रहा है और मना रहा है, तब देश के प्रधानमंत्री होने के नाते नरेन्द्र मोदी भी इस उत्सव में गौरवपूर्वक शामिल हैं और कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटाने वाली भारतीय सेना (ARMY) और भारतीय वायुसेना (IAF) को सलाम कर रहे हैं, तो साथ ही कारगिल चोटी पर तिरंगा फहराते हुए बलिदान देने वाले वीर सपूतों को गर्व से याद करते हुए श्रद्धांजलि भी दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कारगिल विजय दिवस पर आज एक नहीं, अपितु दो-दो ट्वीट किए। एक ट्वीट तो स्वाभाविक था, जो किसी भी प्रधानमंत्री को करना ही चाहिए था। मोदी ने इस एक ट्वीट में कारगिल विजय दिवस पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, ‘कारगिल विजय दिवस पर माँ भारती के सभी वीर सपूतों का मैं हृदय से वंदन करता हूँ। यह दिवस हमें अपने सैनिकों के साहस, शौर्य और समर्पण की याद दिलाता है। इस अवसर पर उन पराक्रमी योद्धाओं को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। जय हिंद!’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूसरा ट्वीट अत्यंत महत्वपूर्ण है। यद्यपि मोदी ने उपरोक्त ट्वीट आज सुबह 8.05 मिनट पर किया, परंतु इससे ठीक तीन मिनट पहले यानी सुबह 8.02 बजे किए गए ट्वीट में मोदी ने एक रहस्योद्घाटन किया। आज जब देश कारगिल विजय दिवस की बीसवीं वर्षगाँठ मना रहा है, तब हर भारतीय के मन में यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कारगिल युद्ध के दौरान कहाँ थे और क्या कर रहे थे। पीएम मोदी ने अपने 8.02 बजे किए गए अपने पहले ट्वीट में इसी का खुलासा किया है।

यह तो सर्वविदित है कि कारगिल युद्ध 1999 में हुआ था, जब भाजपा के वरिष्ठ नेता दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, परंतु देश की राजनीति में उस दौर में नरेन्द्र मोदी का नाम भाजपा के तत्कालीन वरिष्ठ नेताओं की सूची में कहीं नहीं आता था। नरेन्द्र मोदी उस समय चुनावी राजनीति में कहीं नहीं थे। वे भाजपा संगठन में कार्यरत् थे। न वे केन्द्र में किसी मंत्री पद पर थे और न ही गुजरात के मुख्यमंत्री थे। इसके बावजूद कारगिल युद्ध के समय नरेन्द्र मोदी एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता होने के साथ-साथ एक जागृत और देशभक्त नागरिक की भूमिका अदा कर रहे थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले ट्वीट में लिखा, ‘1999 में कारगिल युद्ध के दौरान मुझे वहाँ जाने का और अपने सैनिकों के साथ रहने का अवसर मिला. यह वह समय था, जब मैं अपनी पार्टी के लिए जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में काम करता था. कारगिल दौरा और जवानों के साथ बातचीत करना एक अविस्मरणीय पल था।’

संगठन में ‘धूम’ मचा रहे थे मोदी

हमने नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक यात्रा के पन्नों को पलटा, तो पता चला कि आज देश के सर्वोच्च पद पर विराजित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 90 के दशक में भाजपा संगठन में एक के बाद एक सफलताएँ हासिल कर रहे थे। विभिन्न राज्यों में उनके प्रभारी के रूप में कार्यकाल के दौरान भाजपा ने अभूतपूर्व सफलताएँ हासिल की थीं। यही कारण था कि मई-1998 में मोदी को पदोन्नति प्रदान कर भाजपा महासचिव (संगठन) के रूप में नियुक्त किया गया। साथ ही उन्हें जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश का प्रभार भी सौंपा गया। भाजपा के जम्मू-कश्मीर प्रभारी होने के नाते नरेन्द्र मोदी ने कारगिल युद्ध के दौरान कारगिल का दौरा किया और युद्ध में घायल हुए सैनिकों से मिले। मोदी ने सैनिकों के मुख से उनकी शौर्यगाथा सुनी।

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