कश्मीर पर मोदी का ‘सरदार फॉर्मूला’: नेहरू-इंदिरा की सोच से कहीं आगे, तो अटलजी के प्रयास से ऊँचा !

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धारा 370 और अनुच्छेद 35A पर ऐसे विचार सिर्फ मोदी के हो सकते हैं, जो हर ‘असली कश्मीरी’ को भाएँगे, परंतु ‘नकली कश्मीरी’ को चुभेंगे !

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

माँ भारती का मस्तक छिन्न-भिन्न है। मस्तक के कुछ हिस्से पर नापाक पाकिस्तान ने और कुछ हिस्से पर चालाक चीन ने अधिकार कर रखा है, तो शेष हिस्से पर कुछ तथाकथित कश्मीरी नेताओं ने अपनी जागीरदारी जमा रखी है। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का माँ भारती के मस्तक पर किया गया घाव आज नासूर बन चुका है। देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अखंड भारत का निर्माण कर लौह पुरुष कहलाने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल भी नेहरू की तथाकथित कश्मीरी आज़ादी के समर्थकों के साथ मिलीभगत के चलते भारत के मानचित्र के मस्तक को विवादास्पद बनने से नहीं रोक सके।

जी हाँ। हम जिस मस्तक की बात कर रहे हैं, उसका नाम है जम्मू-कश्मीर। भारतीय संविधान, भारत सरकार, भारत के सभी ग़ैर कश्मीरी राजनीतिक दल और भारत का बच्चा-बच्चा यह बात छाती ठोक कर कहता है, ‘जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है’, परंतु इस वाक्य को बोलने पर विवश करने वाले नेहरू ने 17 वर्षों के प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में इस वाक्य को ज़मीन पर सार्थक करने में कोई महत्वपूर्ण योगदान नहीं किया और न ही उनके बाद प्रधानमंत्री बने इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को कभी ऐसा विचार आया, जो विचार आज के भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रखते हैं। यद्यपि भाजपा के प्रथम प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘इंसानियत-कश्मीरियत-जम्हूरियत’ फॉर्मूला के माध्यम से कश्मीर समस्या हल करने के सकारात्मक प्रयास किए, परंतु वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास कश्मीर समस्या के निवारण के लिए ‘सरदार फॉर्मूला’ है, जो नेहरू-इंदिरा की सोच से कहीं आगे, तो अटलजी के प्रयासों से भी ऊँचा है।

मैं यह बात दावे के साथ कह सकता हूँ कि कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बनने से रोकने में सबसे बड़ी बाधा कहलाने वाली संविधान की धारा 370 और उसके ही अनुच्छेद 35A पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जो सोच और विचारधारा है, उसे सुनने और जानने के बाद कोई भी असली कश्मीरी मोदी का मुरीद बन जाएगा, परंतु कश्मीरियों के तथाकथित पैरोकारों को मोदी की यह बात चुभेगी।

PM बनने की कतार में खड़े नेताओं की बुद्धि से परे, नकली कश्मीरियों को हो जाएगी बदहज़मी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को वाराणसी लोकसभा सीट से नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले एक टेलीविज़न चैनल को दिए इंटरव्यू में धारा 370 और अनुच्छेद 35ए पर जो विचार रखे, उस तरह के विचार वर्तमान राजनीति में केवल मोदी के मन में ही आ सकते हैं, क्योंकि देश के बाकी के नेताओं के मन में केवल ‘मोदी हटाओ’ की सनक पैठ कर गई है। 23 मई के बाद देश का प्रधानमंत्री बनने के सबसे प्रबल दावेदार के रूप में स्वयं को देख रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उसी कतार में खड़े शरद पवार, ममता बैनर्जी, मुलायम सिंह यादव, मायावती, एच. डी. देवेगौडा, चंद्रबाबू नायडू, के. चंद्रशेखर राव सहित देश के बड़े-बड़े धुरंधर नेताओं की बुद्धि से परे है मोदी का ‘सरदार फॉर्मूला’, लेकिन ये धुरंधर नेता इस फॉर्मूला को सुनने के बाद उसे नकारने का साहस नहीं कर पाएँगे, तो कश्मीर के दो पारिवारिक राजनीतिक दलों नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC), उसके नेता शेख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला और पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी (PDP) और उसकी नेता महबूबा मुफ्ती को यह फॉर्मूला हज़म नहीं होगा, क्योंकि कश्मीर में उनकी राजनीतिक ज़मीन खिसक जाएगी।

क्या है मोदी का कश्मीर पर ‘सरदार फॉर्मूला’ ?

मोदी के इस फॉर्मूला को मैंने ‘सरदार फॉर्मूला’ इसलिए कहा है, क्योंकि जब नेहरू और उनके चेले आयंगर ने संविधान में धारा 370 जुड़वाई, तब भी सरदार ने इसका विरोध किया था। यह सरदार पटेल का दुर्भाग्य था कि विदेश यात्रा पर गए नेहरू के कहने पर सरदार पटेल को ही संसद में धारा 370 का प्रस्ताव प्रस्तुत करने पर विवश होना पड़ा। इसका सीधा अर्थ यह है कि एक देश में दो विधान, दो झंडे, दो संविधान सरदार पटेल को स्वीकार नहीं थे। कहते हैं कि धारा 370 ने ही नेहरू-सरदार के संबंधों में खटाश पैदा की। मोदी ने इस इंटरव्यू में धारा 370 और अनुच्छेद 35ए पर जो बेबाक बात कही, वह कहीं न कहीं सरदार पटेल के विचारों से मेल खाती है और इसीलिए मैंने मोदी के कश्मीर पर व्यक्त किए गए इन विचारों को ‘सरदार फॉर्मूला’ कहा है। मोदी ने अपने इस इंटरव्यू में बहुत ही संक्षेप में यह बता दिया कि क्यों उनकी पार्टी भाजपा कश्मीर से धारा 370 और अनुच्छेद 35ए को हटाने को कटिबद्ध है? मोदी ने चंद शब्दों में बता दिया कि धारा 370 किस तरह कश्मीर के विकास और कश्मीरियों की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। इस धारा के कई प्रावधान हैं, परंतु मोदी ने उस प्रावधान की बात कही, जिसके अंतर्गत कोई भी भारतीय कश्मीर में भूमि-मकान या स्थायी सम्पत्ति नहीं ख़रीद सकता। अनुच्छेद 35ए के तहत किसी भी भारतीय को कश्मीर की नागरिकता नहीं मिल सकती। यही कारण है कि कश्मीर में न कोई भारतीय उद्योगपति उद्योग-धंधे खोलने को तैयार है और न ही कोई निवेशक कश्मीर के विकास के लिए निवेश करना चाहता है, क्योंकि यह सब करने के लिए उसे पहले ज़मीन चाहिए और फिर वहाँ काम करने जाने वालों को वहाँ रहने की व्यवस्था चाहिए। धारा 370 और अनुच्छेद 35ए के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है और इसी कारण कश्मीर का विकास, कश्मीर की तरक्की सब ठप हैं। कश्मीर पूरी तरह पर्यटन उद्योग पर निर्भर है, परंतु उस पर भी आतंकी साया लगातार मंडराता रहता है, जिससे कश्मीर भारत के अन्य राज्यों की तरह तरक्की की ऊँचाई को नहीं छू पा रहा।

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