मोदी का ‘मौन’, इमरान का ‘इक़रार’ और विदिशा का ‘वार’ : हर मोर्चे पर भारी पड़ा भारत

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विशेष टिप्पणी : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 28 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। अमेरिका में न्यूयॉर्क स्थित विश्व की सबसे बड़ी पंचायत यानी संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) में शुक्रवार का दिन भारत के नाम रहा। भारत ने अपनी उपस्थिति विश्व के एक प्रतिष्ठित, उत्तरदायी और विराट राष्ट्र के रूप में दर्ज कराई, वहीं भारत को अपना सबसे बड़ा शत्रु मानने वाला पाकिस्तान हर मोर्चे पर पस्त रहा। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पूरे भाषण में कहीं भी कश्मीर या पाकिस्तान शब्द का उल्लेख न करते हुए बड़ा कूटनीतिक दाव खेला और अपने मौन से पाकिस्तान सहित पूरे विश्व को सबसे बड़ा संदेश दे दिया कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है और इसमें किसी का हस्तक्षेप उसे स्वीकार नहीं होगा, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के पूरे भाषण में आतंकवाद पर इक़रार और कश्मीर मुद्दे पर मोदी को लेकर इज़्तिराब (भय, अकुलाहट, व्याकुलता) झलका। मोदी ने कश्मीर या पाकिस्तान का नाम तक नहीं लिया, परंतु इमरान ने भारत, मोदी और कश्मीर का नाम लिया, तो भारत ने उन्हें प्रहारक प्रत्युत्तर देने के लिए राइट टु रिप्लाय अधिकार का उपयोग किया और संयुक्त राष्ट्र में भारत की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने इमरान के एक-एक शब्द पर कड़ा प्रत्युत्तर दिया।

संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा (UNGA) के 74वें सत्र में भाग लेने के लिए संयुक्त राष्ट्र के 190 से अधिक देशों के प्रमुख एकत्र हुए थे और शुक्रवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संबोधित किया। मोदी के 17 मिनट के संबोधन में जहाँ प्लास्टिक, पर्यावरण, आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों को छुआ, वहीं भारत की अनादि-अनंत संस्कृति को उद्धृत करते हुए शुद्ध, सनातन और सात्विक चिंतन प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत कोई भी कार्य किसी पर उपकार जताने या दया दर्शाने के लिए नहीं, अपितु पूरे विश्व के लिए अपना कर्तव्य समझ कर करता है। उन्होंने भारत के 3000 वर्ष पूर्व हुए प्रसिद्ध तमिल कवि कनियन पुंगुदरनार का उल्लेख कर दुनिया के देशों को बताया कि किस तरह भारत जन कल्याण से जग कल्याण के बारे में सोचता है। मोदी ने अहिंसा और शांति का संदेश देते हुए भगवान बुद्ध को भी उद्धृत किया और कहा कि भारत ने युद्ध नहीं, बुद्ध दिए हैं। मोदी ने अपने भाषण में स्वामी विवेकानंद का भी उल्लेख किया, जिन्होंने अमेरिका में ही शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में भारत की वसुधैव कुटुम्बकम् (पूरा विश्व एक परिवार है) की धारणा को धारण करने वाले सनातन धर्म का डंका बजाया था।

मोदी ने मौन रह कर मार दिया इमरान-पाकिस्तान को

भारत में विशेष रूप से कश्मीर के लोगों और देश के लोगों को भी यह लग रहा था कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस प्रकार ह्यूस्टन में आयोजित HOWDY MODI कार्यक्रम में धारा 370 का उल्लेख कर तालियाँ बँटोरी थी, कदाचित वे यूएनजीए में अपने संबोधन में भी कश्मीर का उल्लेख करेंगे। यद्यपि भारत व कश्मीर के लोग मोदी के मुँह से यूएनजीए में कुछ सकारात्मक बातें सुनने की अपेक्षा कर रहे थे, परंतु मोदी ने कुशल कूटनीति का परिचय दिया और इस पूरे मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोले। मोदी ने कश्मीर पर मौन रह कर यानी बिना कुछ कहे पाकिस्तान और इमरान खान को चारों खाने चित्त कर दिया। मोदी ने इस सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर का उल्लेख न कर पूरे विश्व को यह दिखला दिया कि कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है। मोदी की इस मौन कूटनीति ने पाकिस्तान और इमरान के मनसूबों पर पानी फेर दिया। इमरान ने तो सोचा होगा कि मोदी कश्मीर पर कुछ बोलेंगे, तो उनके बाद वे अपने भाषण में न माक़ूल जवाब देंगे, परंतु ऐसा कुछ हुआ नहीं।

इमरान के भाषण में झलका ‘मोदी का भय’

मोदी के बाद इमरान खान ने यूएनजीए के सत्र को संबोधित किया, परंतु इमरान की सुई इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर वैश्विक मुद्दों पर नहीं, अपितु भारत, कश्मीर, धारा 370 और नरेन्द्र मोदी पर अटकी रही। इमरान पूरी तरह असहज और भयभीत दिखाई दिए। निर्धारित समय से अधिक यानी 56 मिनट के अपने भाषण में इमरान खान ने 10 बार नरेन्द्र मोदी का नाम लेकर ज़ाहिर कर दिया कि वे मोदी के बढ़ते कदमों से कितने भयभीत हैं। कुछ देर पहले जिस मंच से मोदी ने बुद्ध के नाम से शांति का संदेश दिया था, उसी मंच से इमरान ने भारत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), इस्लाम के नाम पर मुसलमानों को भारत के विरुद्ध उकसाने-बरगलाने के कुत्सित प्रयास किए। इमरान के भाषण के कुल 4 बिंदु ही थे, जिनमें भारत, कश्मीर, मोदी और आरएसएस शामिल थे। इमरान ने फिर वही गीदड़भभकी दी कि कश्मीर मुद्दे पर दो परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों के बीच युद्ध की आशंका पैदा हो गई है। यद्यपि इमरान की यहाँ भी एक पोल खुल गई। एक दिन पहले ही अमेरिका ने चीन में उइगर मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों पर पाकिस्तान की चुप्पी पर सवाल खड़े किए थे, परंतु इमरान ने इसका जवाब न देते हुए कश्मीर और भारत के मुसलमानों तथा म्यानमार के रोहिंग्या मुसलमानों के प्रति दर्द व्यक्त किया, परंतु चीन में उइगर मुसलमानों पर अत्याचार पर एक शब्द तक नहीं कहा। इतना ही नहीं, इमरान ने कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में आतंकवादियों को अपने देश में प्रशिक्षण देने की जो बात कही थी, उस पर भी इक़रारनामा दोहराया और यह सिद्ध कर दिया कि पाकिस्तान आतंक परस्त देश है।

विदिशा ने उड़ाई इमरान की इज़्जत की धज्जियाँ

चूँकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर या पाकिस्तान का उल्लेख ही नहीं किया था, लिहाज़ा इमरान खान या पाकिस्तान मोदी के भाषण पर कोई आपत्ति करने की स्थिति में ही नहीं थे, परंतु इमरान ने भारत, कश्मीर, आरएसएस और मुसलमानों पर अत्याचार के मुद्दे उठा कर भारत को ‘प्रत्युत्तर के अधिकार’ का उपयोग करने का अवसर दे दिया। भारत की ओर से राइट टू रिप्लाय का ज़िम्मा संभाला विदेश मंत्रालय में प्रथम सचिव और नई अधिकारी विदिशा मैत्रा ने। उन्होंने इमरान के एक-एक भारत विरोधी शब्द पर कड़ा प्रत्युत्तर दिया। उन्होंने इमरान की हेट स्पीच का जवाब देते हुए कहा कि इमरान ने यूएन के मंच का दुरुपयोग कर घृणापूर्ण भाषण दिया। इमरान ने कश्मीर ही नहीं, भारतीय मुसलमानों को लेकर भी मर्यादाएँ लांघते हुए अनाप-शनाप बातें कहीं। भारतीयों को आतंकवाद की फैक्ट्री चलाने वाले देश (पाकिस्तान)) से नसीहत लेने की आवश्यकता नहीं है। विदिशा मैत्रा ने कहा कि परमाणु हमले की धमकी देकर इमरान ने अस्थिरता पैदा करने की कोशिश की है। इमरान क्रिकेटर रह चुके हैं। क्रिकेट को जेंटलमैन का गेम माना जाता है, परंतु उन्होंने अपने भाषण में अपरिपक्वता का परिचय दिया। मैत्रा ने कहा, ‘ऐसा माना जाता है कि इस मंच से बोले गए हर शब्द का इतिहास से वास्ता है। दुर्भाग्य से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से हमने आज जो भी सुना, वह दोहरे अर्थों में दुनिया का निर्मम चित्रण था। हम बनाम वह, अमीर बनाम गरीब, उत्तर बनाम दक्षिण, विकसित बनाम विकासशील, मुस्लिम बनाम अन्य था। एक ऐसी पटकथा जो संयुक्त राष्ट्र में विभाजन को बढ़ावा देती है। मतभेदों को भड़काने और नफरत पैदा करने की कोशिश, जिसे सीधे तौर पर हेट स्पीच कहा जा सकता है।’

मध्यकालीन मानसिकता पर मैत्रा का प्रहार

विदिशा मैत्रा ने इमरान के ‘नस्लीय संहार’, ‘ब्लड बाथ’, ‘नस्लीय सर्वोच्चता’, ‘बंदूकें उठा लो’, ‘आखिर तक लड़ेंगे’ जैसे एक-एक शब्द को गिनाते हुए कहा कि यह इमरान खान मध्यकालीन मानसकिता को दिखाता है। विदिशा ने यूएन में साफ कहा कि इमरान खान की बोली हर बात झूठ है। भारत की प्रथम सचिव ने कहा कि अब चूंकि पाक पीएम ने संयुक्त राष्ट्र से कहा है कि वह पर्यवेक्षक भेज कर जांच करा लें कि पाकिस्तान में आतंकी नहीं हैं, तो ऐसे में दुनिया को आगे बढ़ना चाहिए। पाकिस्तान पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए उन्होंने प्रश्न पूछे, ‘पाकिस्तान इस बात से इनकार करेगा कि दुनिया में केवल वहाँ की सरकार है, जो अल कायदा और दाएश (ISIA) के यूएन द्वारा घोषित आतंकियों को पेंशन देती है ?’, ‘क्या पाकिस्तान के पीएम इस बात की पुष्टि नहीं करेंगे कि उनका देश UN द्वारा घोषित 130 आतंकियों और 25 आतंकी संगठनों की शरणस्थली है ?’, ‘क्या पाकिस्तान इस बात से इनकार करेगा कि 27 में से 20 पैरामीटर्स के उल्लंघन के कारण फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने उसे नोटिस दे रखा है ’, ‘क्या पीएम इमरान खान न्यूयॉर्क शहर से इनकार करेंगे कि वह ओसामा बिन लादेन का खुले तौर पर बचाव करते रहे हैं ?’

झूठ के चैम्पियन, सिकुड़ते अल्पसंख्यक

भारत ने खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि इमरान खान अपने झूठ से मानवाधिकार का चैंपियन बनना चाहते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है। विदिशा मैत्रा ने कहा कि पीएम इमरान खान नियाज़ी को यह नहीं भूलना चाहिए कि 1971 में पाकिस्तान ने अपने ही लोगों पर अत्याचार किए थे और इसी वजह से बांग्लादेश की स्थापना की गई थी। विदिशा ने कहा कि यह एक ऐसा देश है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय 1947 में 23% से सिकुड़कर 3% रह गया है। पाकिस्तान में ईसाई, सिख, अहमदिया, हिंदू, शिया, पश्तून, सिंधी और बलूचों को ईश निंदा कानून के तहत प्रताड़ित किया जाता है और वे जबरन धर्मांतरण का शिकार हो रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र को अनुच्छेद 370 के फैसले की सच्चाई से रूबरू कराते हुए भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत के पुराने कानून को हटाए जाने पर पाकिस्तान ग़लत बातें फैला रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को मुख्य धारा में शामिल करना चाहता है। भारत के लोगों को किसी भी दूसरे देश, ख़ास तौर पर जिसने नफरत की विचारधारा से आतंकवाद की फैक्ट्री बनाई है, की तरफ से सलाह या नसीहत लेने की जरूरत नहीं है।

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