UN में मोदी बने ‘नरेन्द्र’ : ‘हम उस देश के वासी हैं जिसने दुनिया को बुद्ध दिये

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 27 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। पीएम नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को अमेरिका में 127 साल पुराना इतिहास दोहराया। 127 साल पहले इसी अमेरिका की धरती पर शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन को स्वामी विवेकानंद ने संबोधित किया था। उन्होंने भी अमेरिका में हिंदी में ‘मेरे अमेरिकी भाइयो और बहनो’ कह कर अपने भाषण की शुरुआत की थी। संयोग वश वह भी सितंबर का ही महीना था। स्वामी विवेकानंद का दीक्षा से पहले घर का नाम नरेन्द्र नाथ था। स्वामी विवेकानंद ने उस धर्म सम्मेलन में दुनिया को मानवता और विश्व शांति का संदेश दिया था। अब शुक्रवार को अमेरिका की ही धरती पर न्यू यॉर्क में भारत के दूसरे नरेन्द्र ने स्वाभिमानी गर्जना की। पीएम मोदी ने नरेन्द्र नाथ की ही तरह जन कल्याण से जग कल्याण की भारतीय परंपरा और संस्कृति को विश्व समुदाय के बीच पहुँचाया।

‘हम उस देश के वासी हैं, जिसने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिया’

पीएम मोदी ने सिंगल यूज़ प्लास्टिक का उपयोग बंद करने से शुरू करके जल संचय, पर्यावरण सुरक्षा में भारत के योगदान का जिक्र करते हुए जन कल्याण से जग कल्याण की भारत की प्राचीनतम संस्कृति का गौरव के साथ उल्लेख किया। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि ‘हम उस देश के वासी हैं, जिसने विश्व को युद्ध नहीं बल्कि दुनिया को बुद्ध दिये हैं, जो शांति के प्रतीक हैं।’ हालांकि इसके बाद पीएम मोदी ने कर्कश स्वर में आतंकवाद की खिलाफत भी की और कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध भारत का कड़ा रवैया जारी रहेगा। तत्पश्चात उन्होंने आतंकवाद के विरुद्ध दुनिया के सभी देशों को एकजुट होने का आह्वान भी किया और कहा कि आधुनिक युग में बँटी हुई दुनिया नहीं, अपितु एकजुट दुनिया की जरूरत है।

मोदी का भाषण छोटा, किन्तु कही बड़ी बातें

संयुक्त राष्ट्र संघ की न्यू यॉर्क में 74वीं महासभा आयोजित हो रही है, जो 30 सितंबर तक चलेगी। इस महासभा को भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी ने दूसरी बार संबोधित किया है। इससे पहले उन्होंने 2014 में भी संबोधित किया था। पीएम मोदी ने मॉरीशस के राष्ट्रपति, इंडोनेशिया के उप-राष्ट्रपति और लिसोथो के प्रधानमंत्री के बाद चौथे क्रम पर आकर महासभा को संबोधित किया। जबकि पाकिस्तान के पीएम इमरान खान सातवें क्रम पर आकर महासभा को संबोधित करने वाले हैं। पीएम मोदी ने छोटे किंतु प्रभावशाली भाषण में केवल भारत का ही नहीं अपितु विश्व समुदाय के हित की बात की। उन्होंने 3000 साल पहले हुए एक तमिल कवि का जिक्र करते हुए विश्व समुदाय को यह अहसास कराया कि भारत की संस्कृति सबसे प्राचीन है। वहीं तमिल कवि के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने भारतीय संस्कृति की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को भी विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत किया।

पीएम मोदी के भाषण में आतंकवाद को पोषण देने वाले और दुनिया को युद्ध की तरफ धकेलने वाले देशों के लिये कड़े संदेश थे तो सिंगल यूज़ प्लास्टिक के इस्तेमाल को रोकने, जल संचय और पर्यावरण के मुद्दों को लेकर जन कल्याण से जग कल्याण का उत्कृष्ट भाव था, जो भारत देश की प्राचीन संस्कृति रही है। उन्होंने दुनिया को शांतिपूर्ण विकास का संदेश देते हुए उसे एकजुट होने का भी संदेश दिया।

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