यूँ ही नहीं लिया PM नरेन्द्र मोदी ने सोनम वांगचुक का नाम, कर रहे हैं ये महान काम !

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अहमदाबाद, 9 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को राष्ट्र के नाम संदेश में जिन सोनम वांगचुक का नाम लिया और उन्हें याद किया। इससे सवाल उठता है कि आखिर यह सोनम वांगचुक कौन हैं? और क्यों पीएम मोदी ने उन्हें याद किया ? आज हम आपको इसी सवाल का उत्तर देंगे, परंतु आपको बता दें कि आप सब भी सोनम वांगचुक से अच्छी तरह से परिचित हैं।

इंजीनियर से इनोवेटर बने सोनम वांगचुक

आप सभी ने आमिर खान अभिनीत बॉलीवुड फिल्म ‘थ्री ईडियट्स’ जरूर देखी होगी। इस फिल्म में आमिर खान ने जिस इंजीनियर फुंगसुक वांगड़ु की भूमिका अदा की है। वह किरदार लद्दाख के सोनम वांगचुक से ही प्रेरित था। यानी फुंगसुक वांगड़ु और कोई नहीं, सोनम वांगचुक ही हैं।

सोनम वांगचुक वह व्यक्ति हैं, जिन्हें उनकी इंजीनियरिंग के लिये कम और इनोवेशन के लिये ज्यादा जाना जाता है। सोनम वांगचुक ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) श्रीनगर से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है, परंतु वह नौकरी नहीं करना चाहते थे। इसलिये उन्होंने वर्ष 1988 में लद्दाख में स्टूडेंट्स एजुकेशन एण्ड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) की स्थापना की है। सोनम को इस एसईसीएमओएल परिसर को डिजाइन करने के लिये भी जाना जाता है, जो पूरी तरह से सौर ऊर्जा पर संचालित है। यहाँ खाना पकाने से लेकर प्रकाश और तापन (हीटिंग) के लिये भी जैविक ईंधन का उपयोग नहीं किया जाता है। वांगचुक भारतीय सेना के भी फेवरिट हैं, क्योंकि वांगचुक के बनाये घरों से भारतीय सेना को भी खासी मदद मिल रही है।

दुनिया की सबसे ठंडी जगहों में शामिल है लद्दाख

जम्मू-कश्मीर देश का सबसे ठंडा प्रदेश है, इसमें भी लद्दाख में सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। यहाँ का न्यूनतम तापमान माइनस 20 डिग्री तक नीचे चला जाता है। ऐसे में यहाँ तैनात भारतीय जवानों को ठिठुरन से बचने के लिये बड़ी मात्रा में ऑयल का उपयोग करके आग जलानी पड़ती है और उससे तापन करती है। ऑयल के इस्तेमाल के कारण वादियों में प्रदूषण फैलता है, परंतु जवानों के पास इसके अतिरिक्त कोई और चारा भी नहीं है। परंतु सोनम वांगचुक ने अपनी इनोवेशन की कला और कौशल से मिट्टी की ऐसी खास झोपड़ियों का निर्माण किया है, जिन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना भी संभव है और इनके भीतर बिना किसी हीटिंग के भी गर्मी बनी रहती है। यह झोपड़ियाँ भारतीय जवानों के काफी काम आ सकती हैं।

सोनम वांगचुक की खास झोपड़ियाँ !

वांगचुक ने सोलर पावर से गर्म रहने वाली खास तरह की मिट्टी से बनी झोपड़ियाँ (प्री-फैब्रिकेटेड सोलर हीटेड मड हट) तैयार की हैं। मिट्टी से बनी यह झोपड़ियाँ पर्यावरण के लिये भी पूरी तरह से अनुकूल हैं और अपनी खास बनावट के कारण लद्दाख की कड़ी ठंड में इन्हें गर्म रखने के लिये ज्यादा हीटिंग की भी जरूरत नहीं पड़ती है। लद्दाख चूँकि दुनिया की सबसे ठंडी जगहों में से एक है और यहाँ का न्यूनतम तापमान कई बार माइनस 20 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है, तब भी इन झोपड़ियों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। ऐसे में यह झोपड़ियाँ भारतीय जवानों के काफी काम आ सकती हैं। इसीलिये इंडियन आर्मी ने ऐसी कम से कम 10,000 झोपड़ियों में रुचि दिखाई है। इन झोपड़ियों का प्रोटोटाइप सफल रहा है। आर्मी की जरूरतों के हिसाब से इन्हें एक जगह से दूसरी जगह पर ले जाकर असेंबल किया जा सकता है। इन झोपड़ियों को गर्म रखने के लिये कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ता है। इनमें ऐसी मिट्टी प्रयोग की गई है, जो सौर ऊर्जा से तपिश को अपने अंदर सोख लेती है और बाद में ठंड के दौरान भी झोपड़ी के अंदर गर्मी बनी रहती है।

विदेशी शिक्षा प्रणाली के खिलाफ हैं वांगचुक

इस प्रकार सोनम वांगचुक भारतीय सेना के लिये ठंड से रक्षण प्रदान करने के प्रोजेक्ट पर तो काम कर ही रहे हैं। वह विदेशी शिक्षा प्रणाली के विरुद्ध हैं और उसे लद्दाख पर थोपे जाने के भी खिलाफ हैं। वह सरकारी स्कूल व्यवस्था में सुधार लाने के लिये सरकार, ग्रामीण समुदायों और नागरिक समाज के सहयोग से  1994 में ऑपरेशन न्यू होप शुरू करने के लिये भी जाने जाते हैं। सोनम ने बर्फ के स्तूप बनाने की तकनीक का भी आविष्कार किया है। उनकी यह संकल्पना कृत्रिम हिमनद (ग्लेशियर) तैयार करने जैसी है। उनका कहना है कि शंकु आकार के बर्फ के ढेरों (स्तूप) को ठंड के मौसम में बनाकर पानी का संचय किया जा सकता है, जिसे साल के बाकी दिनों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

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