‘शत्रु’ की सोच से कोसों आगे है मोदी की दीर्घदृष्टि : एक शपथ से दो संधान, चिढ़ जाएगा चीन-पछता रहा पाकिस्तान !

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दिल्ली में बैठ कर बीजिंग पर ‘बम’ बरसाएँगे और इस्लामाबाद को ‘इल्म’ कराएँगे मोदी

BIMSTEC के बहाने जिनपिंग को ‘जलाया’, SAARC से किनारा कर इमरान को ‘रुलाया’

शत्रु पड़ोसियों पर उनके ही पड़ोसियों से नरेन्द्र मोदी का प्रचंड प्रहार

विश्लेषण : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद, 29 मई, 2019। स्मरण कीजिए 26 मई, 2014 का वह दिन, जब नरेन्द्र मोदी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ ‘मैं नरेन्द्र दामोदरदास मोदी…’ का उद्घोष करते हुए देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उस शपथ समारोह की विशेषता यह थी कि उसमें South Asian Association for Regional Cooperation यानी दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेश-सार्क-SAARC) के राष्ट्राध्यक्ष उपस्थित थे। मोदी ने दक्षेश राष्ट्राध्यक्षों को बुला कर देश और दुनिया में अपने प्रशंसकों और आलोचकों को चौंका दिया था, क्योंकि इन राष्ट्राध्यक्षों में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ भी थे।

अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय निर्णय

अब ठीक 5 वर्षों और 4 दिनों बाद नरेन्द्र मोदी पुन: प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं और इस बार भी देश और दुनिया के प्रशंसकों-आलोचकों की धारणा के बिल्कुल उलट मोदी ने उन देशों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाया, जिनके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। मोदी ने 30 मई, 2019 को होने वाले अपने दूसरे शपथ ग्रहण समारोह में BIMSTEC राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रण देकर पूरी दुनिया को दंग कर दिया, वहीं मोदी की दोबारा जीत पर बधाई देने में देर नहीं करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को स्तब्ध कर दिया। इमरान खान तो नवाज़ शरीफ की तरह निमंत्रण की प्रतीक्षा कर रहे थे, परंतु मोदी ने इस बार सार्क से किनारा कर बिम्सटेक को निमंत्रण देकर एक तरफ चीन को परेशानी में डाल दिया, तो दूसरी तरफ आतंकवाद को प्रश्रय देने की नीति अपनाने वाले पाकिस्तान को पछताने पर विवश कर दिया।

क्या है बिम्सटेक और उसके पीछे मोदी की सोच ?

आइए, सबसे पहले आपको बताते ये बिम्सटेक क्या है ? इसका फुलफॉर्म है Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation, जिसे बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी व आर्थिक सहयोग संगठन (BIMSTEC) कहा जा सकता है। बंगाल की खाड़ी से जुड़े दक्षिण एशियाई व दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में बहुविद् क्षेत्रों में तकनीकी व आर्थिक सहयोग के लिए 1997 में बिम्सटेक की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्यालय बांग्लादेश में राजधानी ढाका में है। बिम्सटेक सदस्य देशों में बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यानमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैण्ड शामिल हैं। इस बार के शपथ समारोह में सार्क से किनारा कर बिम्सटेक को महत्व देने के पीछे मोदी की दीर्घदृष्टिपूर्ण सोच है। मोदी ने यह निर्णय कर बिना शस्त्र उठाए भारत के शत्रु पड़ोसियों पर उनके ही पड़ोसियों के माध्यम से प्रहार कर दिया। मोदी ने इस एक निर्णय से जहाँ निमंत्रण और उसके बाद मंत्रणा की आस लगाए बैठे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को करारा झटका दिया, वहीं बिम्सटेक राष्ट्राध्यक्षों को निमंत्रण देकर चीन को ईर्ष्या करने पर विवश कर दिया, क्योंकि बिम्सटेक के अधिकांश देश चीन के पड़ोसी हैं और चीन की विस्तारवादी नीति तथा ऋण बोझ से परेशान हैं।

भारत को दक्षिण एशिया में दमदार बनाने की पहल

दक्षिण एशिया में भारत और चीन के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा है। चीन दक्षिण एशिया के देशों विशेषकर पाकिस्तान सहित भारत के सभी पड़ोसी देशों में विस्तारवादी नीति और खजाना लुटा कर अपना प्रभाव लगातार बढ़ा रहा है। ऐसे में मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक देशों को बुला कर 30 मई, 2019 का दिन चीन के लिए परेशान करने वाला दिन बना दिया है। मोदी ने एक शपथ से दिल्ली में बैठे-बैठे बीजिंग पर बम बरसाने, तो इस्लामाबाद को उसकी आतंकपरस्त नीति का इल्म कराने वाले दो संधान कर दिए हैं। चीन दक्षिण एशिया के इन देशों श्रीलंका, म्यानमार, नेपाल और भूटान में ढाँचागत विकास के नाम पर आर्थिक सहयोग देकर अपनी विस्तारवादी नीति को क्रियान्वित कर रहा है। चीन के उपकार तले दबे ये देश कई बार भारत से अच्छे संबंधों के बावजूद भारत के विरुद्ध होने पर विवश हो जाते हैं। ऐसे में मोदी ने इन देशों के नेताओं को अपनी शपथ का साक्षी बना कर ऐसा काम किया है, जिससे जिनपिंग को अवश्य ही जलन होगी।

इमरान के अरमानों पर पानी फेरा

नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले शपथ ग्रहण समारोह में जब दक्षेश देशों के नेताओं को बुलाया था, तब उन्होंने एक तरह से पाकिस्तान से संबंध सुधारने की दिशा में सकारात्मक पहल का संदेश दिया था, परंतु उसके बाद पठानकोट, उरी और पुलवामा आतंकी हमले हुए और मोदी के मन से पाकिस्तान उतर गया। मोदी ने पाकिस्तान और उसकी आतंकपरस्त नीति के खिलाफ ऐसा अभियान छेड़ा कि एक तरफ जहाँ इस्लामाबाद का सार्क सम्मेलन स्थगित करवा कर पाकिस्तान को पूरी दुनिया में अलग-थलग कर दिया, वहीं आतंक के आका मसूद अज़हर के मामले में चीन की पूरी दुनिया में किरकिरी करा कर और उसे झुका कर न केवल मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने में सफलता हासिल की, अपितु पाकिस्तान को पूरी दुनिया में बेआबरू करवाया और साथ ही उसके परम् मित्र चीन को भी मसूद के मामले में पाकिस्तान का साथ न देने पर विवश कर दिया।

भारत के लिए कैसे लाभकारी सिद्ध होगा बिम्सटेक

वर्ष 1997 में स्थापित बिम्सटेक का चौथा शिखर सम्मेलन 2018 में नेपाल में हुआ था। बिम्सटेक में शामिल देशों में सबसे बड़ा देश भारत है। बिम्सटेक से मित्रता की पहल कर मोदी ने न केवल दक्षिण एशिया में चीन की बढ़ती शक्ति को ब्रेक लगाने का प्रयास किया है, अपितु बिम्सटेक देशों की ओर से 14 तकनीकी और आर्थिक क्षेत्रों में आपसी सहयोग पर व्यक्त की गई सहमति का लाभ भी भारत को मिल रहा है और इस निमंत्रण के बाद यह लाभ और बढ़ेगा। बिम्सटेक के माध्यम से नरेन्द्र मोदी ने अपने उन पड़ोसियों को अपने पक्ष में करने का प्रयास किया है, जो चीन की चालाकी में फँसते जा रहे हैं और मोदी का यह प्रयास भारत के लिए आगामी वर्षों में आर्थिक व तकनीकी क्षेत्रों में फायदेमंद सिद्ध होगा।

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