पॉक्सो एक्ट 2018 को राष्ट्रपति की मंजूरी, दोषियों को सजा-ए-मौत दी जायेगी

POCSO ACT 2018

नई दिल्ली: 2012 में बने पॉक्सो एक्ट में किये गये संसोधन (POCSO ACT 2018) को पास करते हुए रामनाथ कोविंद ने नया अध्यादेश पर हस्ताक्षर किया। इसके बाद यह नया कानून पूरे देश में लागू हो गया। राष्ट्रपति द्वार पास किये गये इस संशोधन के द्वारा अब 12 साल से कम उम्र के बच्चियों के साथ कोई बलात्कार का मामला सामने आता है तो उसमें दोषियों को सजा-ए-मौत की सजा मिलेगी।

दरअसल इस कानून में बदलाव होना बहुत ही जरूरी हो गया था क्योंकि अभी हाल ही में देश में बहुत सारे इस प्रकार के मामला समाने आया है जिसमें 12 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ बलात्कार की घटना शामिल है। कठुआ में हुई एक छोटी सी बच्ची के साथ दुष्कर्म व हत्या, सूरत रेप केस, सासाराम रेप औऱ उन्नाव गैंगरेप के कारण पूरे देश में आक्रोश का माहौल बन गया था जिससे सरकार पर इतना अधिक दबाव बना कि उसको पॉक्सो एक्ट में बदलाव करना पड़ा और नया कानून POCSO ACT 2018 लाना पड़ा।

बदा दें कि पॉक्सो एक्ट में मंजूरी से पहले प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में एक कैबिनेट मीटिंग हुई जिसमें इस अधायदेश के बारे में चर्चा करके POCSO ACT 2018 का प्रस्ताव पेश किया गया । इसके बाद सर्वसम्मति से कैबिनेट सदस्यों ने इसके बदलाव को उचित ठहराते हुए पॉक्सो एक्ट के नया अध्यादेश को पास कर दिया।

बता दें कि शनिवार को केंद्रीय कैबिनेट द्वार पास किये गये इस अध्यादेश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जल्द ही स्वीकृति दे दी। अब इस कानून के बाद पूरे देश में खुशी का माहौल है। लोगों को अब आशा है कि शायद अब इस प्रकार के घटना पर कुछ हद तक लगाम लगेगा। मगर हमें लगता है कि यह समया केवल कानून बनाने से हल नहीं हो सकता क्योंकि इस प्रकार की समस्यां का जड़ समाज में फैला स्त्रियों के प्रति बुरी मानसिकता है।

आज हमारे देश में वह दिन आ गया है जब हमें बदना पड़ेगा। बलात्कार जैसी घिनौनी घटना को अंजाम देने वाला कोई न कोई लड़का ही तो होता है और हरेक लड़का किसी न किसी का बेटा, भाई, पति, चाचा, ताऊ या मामा होता है। हमें अपनी रिस्तों की मान्यता को समझना होगा। जब हम अपने रिस्तों को ठीक प्रकार से अहमियत देते हैं तो उस रिस्तें में इस प्रकार के क्राइम का कोई जगह नहीं रह जाता है।

हमें समाज में ऐसे वातावरण पैदा करना होगा जिसमें हम केवल अपनी मां को मां न समझकर दूसरे के मां को भी अपनी मां जैसी अहमियत दें, हमे अपनी बहन को भी दूसरे की बहन जैसा समझना होगा। जो रेस्पेक्ट हम अपने परिवार के प्रति समझते हैं वही रेस्पेक्ट दूसरों को भी देना होगा। जब हम इस प्रकार के वातावरण को अपने समाज में बढ़ायेंगे तभी बलात्कार जैसी समस्या का ठीक प्रकार से हल निकल सकता है।

बता दें की राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी ने इस अध्यादेश (POCSO ACT 2018) पर 24 घंटे के अंदर ही हस्ताक्षर करके इसको मंजूरी दे थी। इसके बाद कानून लागू हो गया लेकिन क्या इस कानून से हम समाज में फैले इस बुराई को खत्म किया जा सकता है। हमें पता है कि कानून तो बन जाता है मगर कितने लोग कानून का पाल करते हैं यह किसी से छिपा नहीं है। इसलिए इस बुराई को जड़ से खत्म करने के लिए हमें अपने समाज में फैली ऐसे बुराइयों को खत्म करना होगा जिसके कारण इस प्रकार की घटना हो रही है।

आपराधिक कानून अध्यादेश 2018 (POCSO ACT 2018) को मंजूरी मिलने के बाद यौन अपराध से जुड़े पहले के कानून भी संशोधित हो गये जिनमें पॉक्सो कानून, आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस ऐक्ट से जुड़ी अन्य धाराएं भी है। दिल्ली हाई कोर्ट में के एक वकील अशोक अग्रवाल के अनुसार, सरकार ने 12 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप और गैंगरेप में फांसी का प्रावधान तो बना दिया, लेकिन वही दूसरी ओर अपराध 12 साल से कम उम्र के किसी बच्चे के साथ हो तो उसमें दोषी को फांसी नहीं दी जा सकती क्योंकि फांसी के प्रावधान के लिए सिर्फ इससे जुड़ी आईपीसी की धाराओं में बदलाव की गई है जबकि पॉक्सो ऐक्ट में किसी प्रकार का बदलाव नहीं हुआ जो 18 साल के कम उम्र के बच्चों के यौन अपराधों से संबंधित है।

पॉक्सो ऐक्ट कानून के अनुसार लिंग के आधार पर भेद भाव नहीं हो सकता। कानून पर जारी नोटिफिकेशन में कहा गया कि संसद का सत्र अभी नहीं चल रहा है और राष्ट्रपति इस बदलाव से संतुष्टट है क्योंकि परिस्थितियां ऐसी बन चुकी है जिसमें इस प्रकार का बदलाव करना आवश्यक हो गया था कि दोषियों के खिलाफ तुरंत कारवाई की जा सके।

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