रूठती नदियां, सोती सरकारें…

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हाल ही में खबर आयी थी कि अरुणाचल की लाइफलाइन कही जाने वाली सियांग नदी का पानी बुरी तरह से प्रदूषित हो चुका है, जिससे बड़ी संख्या में मछलियां मर गई। इसके साथ ही लोगों के पीने के पानी की भी समस्या हो गई थी। अब ऐसी ही एक खबर मेघालय से आयी है, जिसके मुताबिक मेघालय की 2 प्रमुख नदियों का पानी प्रदूषण के कारण पूरी तरह से नीला हो चुका है।

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बता दें कि मेघालय की लुका और मिंतदु नदियों में एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा पायी गई है, जिससे नदियों का पानी बिल्कुल नीला हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कोयले की खदानों के कारण हुआ है, दरअसल खदानों से निकलने वाला एसिड नदी के पानी में घुल रहा है, जिस कारण नदियां नीली हो रही हैं, हालांकि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हो पायी है। मामले की जांच जारी है।

गौरतलब है कि नदियों के पानी के नीले होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। साल 2007 से यह घटना हो रही है। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से इसके रोकथाम के लिए कोई पहल नहीं की गई है। हालात इस कदर खराब हैं कि करीब हर साल होने वाला यह प्रदूषण नदियों की सारी मछलियों को लील जाता है। दरअसल सल्फेट, गंधक, लोहा आदि तत्वों के नदी के पानी में ऑक्सीजन की कमी हो रही है, जिससे मछलियों की मौत हो रही है।

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वहीं नदी के किनारे के करीब दर्जन भर गांवों के लोगों को नदी का पानी पीने के कारण पेट की कई बीमारियों ने घेर लिया है। इन मरीजों में से कई मरीज पेट के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। एसिड की मात्रा बढ़ने के साथ ही सीमेंट कारखानों की गाद भी नदी के पानी में मिल रही है, जिससे हालात काफी गंभीर हो गए हैं। गौरतलब बात है कि यह हाल सिर्फ मेघालय या अरुणाचल प्रदेश की नदियों का नहीं है, बल्कि पूरे देश की नदियों का है।

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नदी के प्रदूषण की बात अगर एक तरफ रख भी दें तो भारत का यह उत्तर पूर्वी इलाका एक अन्य समस्या से भी जूझ रहा है। बता दें कि मेघालय की पहचान देश के सबसे ज्यादा बारिश वाले इलाके के रुप में होती है, लेकिन पिछले कुछ सालों में मेघालय में होने वाली बारिश में भी कमी आयी है। माना जा रहा है कि प्रदूषण के कारण ऐसा हो रहा है। ऐसा इलाका जो बारिश और नदियों के पानी पर काफी ज्यादा निर्भर करता है, वहां प्रदूषण के कारण नदियों और बारिश, दोनों पर ही संकट के बादल छाए हुए हैं। लेकिन सरकारें हमेशा की तरह सोयी हुई हैं।

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