भाजपा की प्रचंड जीत का मूलाधार बना PM मोदी का ‘ग़रीब’ !

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विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 29 मई, 2019। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2019 के पूरे प्रचार अभियान में भले ही विरोधियों पर जम कर निशाना साधा हो, परंतु जब-जब उनकी जाति को लेकर उन पर प्रहार किए गए, तब-तब उन्होंने दोहराया, ‘मेरी जाति ग़रीब है। भारत का ग़रीब ही मेरी जाति है। मैं ग़रीबों के लिए ही सोचता हूँ, काम करता हूँ, परिश्रम करता हूँ। मेरा अपना कोई परिवार नहीं, भारत के ग़रीब ही मेरा परिवार हैं।’

वर्षों से ग़रीबों की भलाई, भारत को ग़रीबी मुक्त करने के नाम पर वोट बँटोरती आई कांग्रेस ने इस लोकसभा चुनाव में भी भारत के ग़रीब के आगे न्यूनतम् आय योजना (NYAY) के तहत 72 हजार रुपए का टुकड़ा फेंका, जिसे ग़रीबों ने अस्वीकार कर दिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ही साथ दिया। भाजपा को मिली प्रचंड जीत का मूल आधार भारत के वह ग़रीब ही बने, जिन्हें मोदी अपना परिवार बताते आए हैं।

उल्लेखनीय है कि 17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में पीएम नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) ने बहुमत से आगे 300 और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग-NDA) ने 350 का आँकड़ा पार किया है। चुनाव के रोचक आँकड़े सामने आ रहे हैं कि देश के मतदाताओं ने भाजपा और एनडीए को बहुमत तो दिलाया, परंतु इनमें गरीब मतदाताओं ने भाजपा को 300 से पार पहुँचाने और एनडीए को 350 पार कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

चुनावी विश्लेषण बताते हैं कि भाजपा और एनडीए को देश के सबसे गरीब लोकसभा सीटों पर जीत मिलने से उनका आँकड़ा क्रमशः 300 और 350 के पार हुआ। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश के गरीब जिलों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। भाजपा ने उत्तर प्रदेश के सबसे गरीब 10 जिलों में पड़ने वाली लोकसभा सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की है।

इनमें से सबसे गरीब 61 प्रतिशत वाले श्रावस्ती जिले को छोड़ दें, जिस पर बसपा प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। 56.6 प्रतिशत के साथ दूसरे क्रम के सबसे गरीब जिले बहराइच में भाजपा को जीत मिली है। इसके अलावा सीतापुर (55 प्रतिशत), कानपुर (53.1 प्रतिशत), लखीमपुर खीरी (49.9 प्रतिशत), फतहपुर (46.4 प्रतिशत), बलरामपुर (45.8 प्रतिशत), हरदोई (45.1 प्रतिशत), गोंडा (43.5 प्रतिशत), सोनभद्र (42.4 प्रतिशत) शामिल हैं।

इसी प्रकार बिहार के 10 सबसे गरीब जिलों में भी भाजपा और एनडीए के प्रत्याशियों ने बड़ी जीत दर्ज की है। कटिहार (58 प्रतिशत), समस्तीपुर (53.6 प्रतिशत), सीतामढ़ी (53.3 प्रतिशत), पूर्वी चंपारण (48.4 प्रतिशत), पश्चिमी चंपारण (48.2 प्रतिशत), पूर्णिया (47.1 प्रतिशत), अररिया (44.9 प्रतिशत), मधुबनी (42.6 प्रतिशत) और खगड़िया (41.1 प्रतिशत) शामिल हैं। इनमें से सीतामढ़ी, पूर्णिया और कटिहार में एनडीए के घटक दल नितिशकुमार की जेडीयू के प्रत्याशी जीते हैं। जबकि समस्तीपुर और खगड़िया में लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है। अन्य सीटों पर भाजपा प्रत्याशी जीते हैं।

मध्य प्रदेश और ओडिशा के सबसे गरीब जिलों की लोकसभा सीट पर भी भाजपा की जीत हुई है। मध्य प्रदेश में 30 प्रतिशत या उससे अधिक गरीबी वाले तीन जिले हैं। इनमें से संगरौली (36 प्रतिशत), शहडोल (32 प्रतिशत) और सीधी (30 प्रतिशत) शामिल हैं। इन सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों ने 4 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की है। जबकि ओडिशा में गरीब जिलों वाली लोकसभा सीटों में से कालाहांडी (36.65 प्रतिशत) सीट पर भाजपा को सफलता प्राप्त हुई है।

वैसे तो लोकसभा में सरकार बनाने के लिये 272 सीटों का बहुमत प्राप्त करना आवश्यक होता है, परंतु भाजपा ने 2014 में 10 सीटें अधिक प्राप्त की थी। उसे 2014 में 282 सीटें मिली थी। जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटों का आँकड़ा 303 तक पहुँच गया है। इसी प्रकार भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने 2014 में 336 सीटें प्राप्त की थी, 2019 में उसका आँकड़ा 353 तक पहुँच गया है। भाजपा और एनडीए को उपरोक्ता 4 राज्यों की सबसे गरीब लोकसभा सीटों में से उत्तर प्रदेश में 9, बिहार में 10, मध्य प्रदेश में 3 और ओडिशा में एक सहित कुल 23 सीटें प्राप्त हुई हैं। प्राप्त 23 सीटों में से एनडीए को बिहार में मिली 5 सीटें निकाल दें तो भाजपा को 18 सीटें मिलीं। इस प्रकार इन गरीब मतदाताओं की ओर से दी गई इन सीटों ने ही भाजपा को 300 के आँकड़े तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जबकि भाजपा सहित एनडीए को मिली कुल 23 सीटों ने ही एनडीए का आँकड़ा 350 के पार पहुँचाया।

ज्ञातव्य हो कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 में घरेलू समृद्धि और गरीबी की पैटर्न के आधार पर जिलों की समृद्धि की रैंकिंग तैयार की गई है। जो सबसे ताज़ा आँकड़े हैं। समृद्ध, मध्यम वर्गीय और गरीबों का वर्गीकरण पक्के मकानों के साथ-साथ 8 संपत्तियों बिजली कनेक्शन, फोन (लैंडलाइन और मोबाइल), टी.वी., एसी या कूलर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और वाहन (कार, बाइक, ट्रैक्टर और ट्रक) के आधार पर किया गया है। जिन परिवारों के पास पक्के मकानों के साथ 8 में से 8 या 6 संपत्तियाँ भी हैं, उन्हें समृद्ध परिवार की श्रेणी में रखा गया है। जिनके पास कच्चे या पक्के घर और 8 में से मात्र कोई एक संपत्ति है, उन्हें गरीब की श्रेणी में रखा गया है और जिनके पास पक्के मकान तथा 8 में से 2 से 5 संपत्तियाँ हैं, उन्हें मध्यम वर्गीय माना गया है। इन मानदंडों के आधार पर देश में 25 प्रतिशत परिवार समृद्ध हैं और 10 प्रतिशत गरीब हैं। जबकि अन्य मध्यम वर्गीय श्रेणी में आते हैं। इन्हीं मानदंडों को ध्यान में रखकर इन राज्यों के उपरोक्त जिलों को गरीब की श्रेणी में रखा गया है, जिसके आधार पर यह चुनावी विश्लेषण किया गया है।

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