अब देश के हर कोने में मिलेगा नेटवर्क : ISRO करने जा रहा है संचार क्रांति

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 4 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। क्या आपके मोबाइल में नेटवर्क (MOBILE NETWORK) नहीं आ रहा है ? क्या आपका टेलीविज़न सेट का एन्टीना (TELEVISION SET ANTENNA) ठीक से काम नहीं कर रहा है और उसका नेटवर्क कमजोर है ? आपके बंद कमरे में नेटवर्क नहीं आता है या दूर-दराज के गाँव या फिर जंगल अथवा पहाड़ी इलाकों में घूमने गये हैं, वहाँ मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता है ? तो अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी INDIAN SATELLITE RESEARCH ORGANIZATION (ISRO) आपकी इस शिकायत को पूरी तरह से खत्म करने जा रही है। इसरो ऐसी संचार क्रांति (COMMUNICATION REVOLUTION) करने जा रही है जिससे पूरे देश में हर जगह नेटवर्क उपलब्ध होगा। चाहे आप बीच समुद्र में हों या जंगल के बीच, ऊँची पहाड़ी पर हों या गहरी खाई में हों, अब हर जगह नेटवर्क मिलेगा।

दरअसल इसरो नये साल के पहले महीने जनवरी के मध्य में नया संचार उपग्रह लॉन्च करने जा रहा है। इस उपग्रह के लॉन्च होने से देश की संचार व्यवस्था मजबूत हो जाएगी। इस उपग्रह की मदद से देश में नई इंटरनेट टेक्नोलॉजी (INTERNET TECHNOLOGY) लाई जा सकेगी। इस उपग्रह के सफल प्रक्षेपण के बाद पूरे देश में मोबाइल नेटवर्क फैल जाएगा। उन क्षेत्रों में भी मोबाइल नेटवर्क मिलेगा, जहाँ अभी तक सुलभ नहीं था।

G-SAT-30 जनवरी में होगा लॉन्च

इसरो के संचार उपग्रह की जी-सैट श्रेणी के अभी तक 14 उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किये गये हैं, जिनकी मदद से हम घर बैठे टेलीविज़न सेट पर कार्यक्रमों के प्रसारण तथा उनका सीधा प्रसारण देख रहे हैं। देश-विदेश में होने वाली घटनाओं को समाचारों के माध्यम से देख पा रहे हैं। यह सब इसरो के संचार उपग्रह यानी (COMMUNICATION SATELLITE) से संभव हो रहा है। जैसे-जैसे पुराने उपग्रहों की काम करने की उम्र खत्म होती है, वैसे-वैसे इसरो उनके स्थान पर नये तथा उन्नत टेक्नोलॉजी वाले उपग्रह प्रक्षेपित करती रहती है। इन उपग्रहों की बदौलत ही देश में संचार व्यवस्था कायम है। नये-नये उपग्रहों में जैसे-जैसे नई-नई टेक्नोलॉजी उपयोग की जाती है, वैसे-वैसे नई-नई सुविधाएं मिलती जाती हैं। टेलीविज़न प्रसारण से शुरु हुई संचार क्रांति अब इंटरनेट नेटवर्क तक आ पहुँची है। इन उपग्रहों की मदद से ही समाचारों का आदान-प्रदान, समाज के लिये काम आने वाली जियोस्पेशियल सुविधाएँ, मौसम संबंधी जानकारी और पूर्वानुमान, आपदाओं की पूर्व सूचना और खोजबीन तथा रेस्क्यू ऑपरेशन (RESCUE OPERATION) में सैटेलाइट की मदद जैसी सुविधाएँ अपग्रेड (UPGRADE) हो पाई हैं।

G-SAT-30 की उम्र 15 साल होगी और यह पृथ्वी पर भारत के लिये काम करेगा। इसे जियो इलिप्टिकल ऑर्बिट (GEO ELLIPTICAL ORBIT) में स्थापित किया जाएगा। इसमें दो सोलर पैनल (SOLAR PANEL) और बैटरी (BATTERY) होगी जो इसके लिये ऊर्जा प्राप्त करेंगे। इसरो इस जी-सैट 30 संचार उपग्रह को यूरोपियन हैवी रॉकेट एरियन-5 स्पेस (EUROPEAN HEAVY ROCKET ARIANE-5 SPACE) फ्रेंच गुएना (FRENCH GUIANA) से लॉन्च करेगा। इस उपग्रह का कुल वजन लगभग 3,100 किलोग्राम है। यह उपग्रह इनसैट सैटेलाइट की जगह लेगा। लॉन्चिंग के लिये उपग्रह यूरोप पहुँच चुका है।

इस उपग्रह की लॉन्चिंग को लेकर यूरोपियन स्पेस एजेंसी की ओर से ट्वीट भी किया गया है।

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