रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के करीबियों पर अमेरिका ने लगाए प्रतिबंध

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President Vladimir Putin

रूस के President Vladimir Putin के 7 करीबियों और 17 सीनियर सरकारी अधिकारियों सहित कई कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। जबकि इन सभी पर ‘पूरी दुनिया में हानिकारक गतिविधियां चलाने‘ का आरोप लगाया गया है। इतना ही नहीं अमरीका ने रूस के उच्च वर्ग से संबंधित 12 कंपनियों, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी और एक बैंक को भी प्रतिबंधित किया है।गोरतलब यह है कि अमेरिका द्वारा ताजा लिए गए निणर्य में अमरीका ने जिन लोगों को प्रतिबंधित किया है, उनमें रूस के President Vladimir Putin के बॉडीगार्ड, उनके दामाद, राष्ट्रपति के निकट सहयोगी और उनके नियंत्रण वाली कई कंपनियां भी शामिल हैं।

क्या है प्रशासनिक कदम

इस बीच व्हाइट हाउस की प्रवक्ता सारा सैंडर्स ने जानकारी देते हुए बताया कि इन प्रतिबंधों का मतलब यह नहीं है कि अमरीका ने रूस से अपने रिश्ते खत्म कर लिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘‘आज ये जो प्रतिबंध लगाए हैं और साथ ही जो भी प्रशासनिक कदम उठाए गए गए हैं, उनमें कांग्रेस की मंजूरी का ध्यान रखा गया है। यह साबित करता है कि राष्ट्रपति की बात बिलकुल सही थी कि कोई भी रूस पर कठोर कदम नहीं उठाता था‘‘। प्रवक्ता सारा सैंडर्स का कहना है कि ‘‘हम रूसी सरकार के साथ सकारात्मक रिश्ता चाहते हैं लेकिन यह तभी हो सकेगा जब उनकी तरफ से भी व्यवहार में बदलाव आए‘‘।

रूस ने दिया जवाब

दरअसल अमरीका की जानिब से लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में रूस ने भी कड़े कदम उठाने की धमकी दी है। हांलांकि रूसी विदेश मंत्रालय ने अपनी एक बयान जारी करते हुए कहा है कि ’’ इस तरह के दबाव के आगे रूस अपने रास्ते से हटने वाला नहीं है ’’। उन्होंने अमरीका द्वारा उठाए गए इन कदमों को मूर्खतापूर्ण बताया है, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध खराब होंगें। जबकि वॉशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट उशर का कना है कि अमरीका ने रूस के President Vladimir Putin के खलिाफ अभी तक का सबसे आक्रामक कदम उठाया है।

बता दें कि अमरीका ने जिन लोगों पर प्रतिबंध लगाए हैं, उनमें सुलेमान करीमोव का नाम भी शामिल है। बताया जा रहा है कि ये रूस के सबसे अमीर नागरिकों में से एक हैं। इनका परिवार रूस का सबसे बड़ा सोने का उत्पादक है। हांलांकि पिछले महीने ही अमरीका ने 19 रूसी नागरिकों को कथित तौर पर साइबर हमला करने और अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में हस्तक्षेप करने के आरोप में प्रतिबंधित कर दिया था। जिसके बाद रूस और ब्रिटेन के बीच चल रहे राजनीतिक गतिरोध में भी अमरीका ने ब्रिटेन का साथ देते हुए अपने देश में मौजूद कई रूसी राजनयिकों को निष्काषित कर दिया था।

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