उत्तर प्रदेश और भारत ही नहीं, जापान में भी ‘योगी’ का जलवा ? रच दिया यह इतिहास !

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यूँ तो अपनी सभ्यता, कुशलता और शांत तथा विनम्र स्वभाव के कारण भारतीयों ने दुनिया के अधिकांश देशों में डेरा जमाया हुआ है और स्थानीय प्रजा के साथ घुल-मिल गये हैं। यदि सियासत की बात करें तो भारतीयों ने अमेरिका, ब्रिटेन, मॉरीशस, फिजी जैसे कई देशों में राजनीति में भी भागीदारी की है और ऊंचे पदों तक पहुंचे हैं। अब जापान से अच्छी खबर आई है।

दरअसल जापान की राजधानी टोक्यो में एरोगावा वार्ड असैम्बली के चुनाव में पहली बार भारतीय मूल के व्यक्ति ने हिस्सा लिया और चुनाव में जीत भी हासिल की है। 41 वर्षीय योगेन्द्र पुराणिक ने जापान में यह पहल की है। उनका निकनेम ‘योगी’ है।

योगी भारत में अपनी पढ़ाई पूरी करके इंजीनियर के रूप में 1997 में जापान पहुँचे थे। जापान में वह शुरू में बैंक और कई अन्य कंपनियों में काम कर चुके हैं। योगी 2005 में एरोगावा के नागरिक बने। जापान में भारतीयों की संख्या लगभग 40 हजार है। टोक्यो के 23 वार्डों में से एरोगावा में सर्वाधिक 10 फीसदी भारतीय रहते हैं।

2011 में जब जापान में भयंकर भूकंप आया था, तब उन्होंने स्थानीय लोगों की मदद करके जापानी लोगों का दिल जीता और इसी दौरान उन्हें स्थानीय नागरिकों के साथ घुलने-मिलने का अवसर मिला था। योगी को जापानी लोग बहुत ही विनम्र लगे, वहीं जापानी नागरिकों को योगी बहुत विनम्र लगे।

जापान के चुनाव में भारतीय की जीत से यह भी संकेत मिलता है कि भारतीय जापान के समाज निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं। योगी जापान में न सिर्फ जापानी और भारतीय लोगों के बीच बल्कि जापान और भारत के बीच भी सेतु का काम कर रहे हैं।

बता दें कि 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेन्द्र मोदी ने विश्व के अन्य देशों के साथ-साथ जापान के साथ भी सांस्कृतिक और व्यापारिक सम्बंधों को मजबूत बनाने का काम किया है। अब तक मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ एक दर्जन बार मुलाकात कर चुके हैं, जबकि शिंजो आबे भी तीन बार भारत आ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भगवान विश्वनाथ की जिस वाराणसी नगरी से दोबारा उम्मीदवारी कर रहे हैं और गुरुवार को रोड शो करके माँ गंगा की आरती में भाग लिया। इस दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती में शिंजो आबे भी आ चुके हैं।

मोदी के नेतृत्व में भारत और जापान के बीच रिश्तों में कितना विकास हुआ है, इसे समझने के लिये भारत में जापान की भागीदारी से हो रहे कई महत्वपूर्ण कार्यों पर नज़र डाली जा सकती है। जापान अहमदाबाद, वाराणसी और चेन्नई के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मोदी सरकार की मदद कर रही है। जापान भारत में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार 15 बिलियन डॉलर तक पहुँच चुका है, जो 2020 तक 50 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की आशा व्यक्त की जा रही है। भारत और जापान के बीच परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग तथा सामरिक समझौते भी हुए हैं।

दोनों देशों के लोगों ने आपसी सांस्कृतिक परंपरा में भी भागीदारी की है। इसमें बौद्ध धर्म की विरासत, जनतांत्रिक मूल्यों और मुक्त समाज के विचार शामिल हैं। इन्हीं कारणों के चलते जापान में भारतीय मूल के योगी की जीत हुई है। हमें जापान से सहिष्णुता समेत कई बातों को सीखने की आवश्यकता है। चीन और भारत के बीच जब डोकलाम विवाद हुआ था, तब जापान ही एकमात्र ऐसा देश था जिसने खुले मंच से भारत का समर्थन किया था।

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