हवाई जंग में चीन और पाकिस्तान को पछाड़ने जा रहा है भारत

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 5 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारत अपनी सेनाओं (INDIAN ARMED FORCES) की युद्धक और मारक क्षमताओं को बढ़ाने में जुटा हुआ है। इसका उचित कारण भी है। दुनिया में जिस तेजी से युद्ध की तकनीक बदल रही है और नये-नये अस्त्र-शस्त्र तैयार हो रहे हैं, उनसे सुसज्ज रहना सेनाओं के लिये आवश्यक है। पड़ोसी देश भी क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में जुटे हुए हैं, ऐसे में अपनी सीमाओं की रक्षा के लिये भारतीय सेनाओं को आधुनिक तकनीक व हथियारों से सज्ज करना भारत के लिये भी जरूरी हो जाता है। हालाँकि अब इस क्रम में आगामी कुछ ही महीनों में भारत अपने प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी देश चीन (CHINA) और पाकिस्तान (PAKISTAN) को पीछे छोड़ कर आगे निकलने वाला है। हवाई जंग में हवा से हवा में (AIR TO AIR) मार करने वाली और 150 किलोमीटर तक अपने लक्ष्य को भेदने के मामले में जल्द ही भारत चीन और पाकिस्तान को पीछे छोड़ देगा।

हवा से हवा में लक्ष्य भेदने में भारत की ताकत

भारत को मई-2020 में फ्रांस (FRANCE) से 4 राफेल लड़ाकू विमान (RAFAEL FIGHTER JET) मिलने वाले हैं, जिनमें भारत ने मिटिअर मिसाइलें (METEOR MISSILES) फिट करने के लिये कहा है। हवा से हवा में मार करने वाली ये मिसाइलें 120 से 150 किलोमीटर तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम हैं। ये मिसाइलें इतनी मारक हैं कि इन्हें ‘नो स्केप’ भी कहा जाता है। राफेल में इन मिसाइलों की तैनाती से भारत दोनों पड़ोसी देशों पाकिस्तान और चीन पर हवाई जंग में निर्णायक बढ़त हासिल कर लेगा। इन मिसाइलों को प्राप्त करने के बाद भारत किसी भी हमले को नाकाम करने की क्षमता हासिल कर लेगा। यह मिसाइल पाकिस्तान की मिसाइल AIM-120C को पीछे छोड़ देगी, जिसकी क्षमता 100 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने की है। पाकिस्तान ने बालाकोट एयर स्ट्राइक (BALAKOT AIR STRIKE) के बाद भारतीय सीमा में भेजे अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों में यही मिसाइल तैनात की थी।

क्या है मिटिअर मिसाइल ?

यूरोपियन मिसाइल निर्माता कंपनी एमबीडीए मिटिअर मिसाइल का निर्माण करती है। 190 किलोग्राम वजन और 3.7 मीटर लंबी यह मिसाइल एडवांस राडार सिस्टम (ADVANCE RADAR SYSTEM) से लैस है। मिटिअर मिसाइलों को बियॉन्ड विजुअल रेंज बीवीआर (BEYOND VISUAL RANGE-BVR) मिसाइल भी कहा जाता है। यह मिसाइलें भारत को 2020 के अंत तक मिलने वाली थी, परंतु भारत ने इन्हें मई-2020 में मिलने वाले 4 राफेल जेट के साथ ही सौंपने के लिये कहा है। यह बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइलों की अगली जनरेशन के रूप में तैयार किया गया है। इसे अब तक की सबसे आधुनिक और मारक मिसाइलों में से एक माना जाता है। यह मिसाइल यह मिसाइल एडवांस एक्टिव राडार सीकर से लैस है, इसलिये हर मौसम में और किसी भी तरह के लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। इस मिसाइल के रूप में भारत को एक ऐसी युद्ध क्षमता मिलेगी, जो इस क्षेत्र में किसी और के पास नहीं है। यह मिसाइल तेज रफ्तार वाले जेट से लेकर छोटे मानव रहित विमानों के साथ-साथ क्रूज़ मिसाइलों को निशाना बनाने में भी सक्षम है।

उल्लेखनीय है कि भारत ने फ्रांस के साथ लगभग 59 हजार करोड़ रुपये में 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने का सौदा किया है, जिनमें से एक विमान की डिलीवरी गत 8 अक्टूबर को की गई है। अन्य 4 विमान आगामी मई में मिलने की उम्मीद की जा रही है।

भारत के पास स्वदेशी ‘अस्त्र’ भी है

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DEFENSE RESEARCH DEVELOPMENT ORGANIZATION-DRDO) ने भी बियॉन्ड विजुअल रेंज बीवीआर एयर टू एयर मिसाइल (AAM) ‘अस्त्र (ASTRA)’ का निर्माण किया है। इसकी मारक क्षमता भी 110 से 160 किलोमीटर है। यह मिसाइल भारतीय वायुसेना के सुखोई 30 एमकेआई (SUKHOI-30 MKI) लड़ाकू विमानों में तैनात की जाती है। यह मिसाइल भी दुनिया की सबसे बेहतरीन बीवीआरएएएम (BVR-AAM) मिसाइलों में से एक मानी जाती है। इस मिसाइल को बना कर भारत अमेरिका, रूस, फ्रांस और इज़राइल की श्रेणी में आ चुका है। इस अस्त्र का वजन लगभग 154 किलोग्राम और इसकी लंबाई लगभग 3.7 मीटर है। कीमत के मामले में यह रूस, फ्रांस और इज़राइल की मिसाइल से सस्ती भी है। रूसी सुखोई के बाद अब हलके और स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस (TEJAS) को भी इस मिसाइल से सज्ज करने की तैयारी की जा रही है। इस मिसाइल के निर्माण में सफलता से डीआरडीओ भी उत्साहित है और अब हवा से हवा में तथा ज़मीन से हवा में मार करने वाली स्वदेशी आधुनिक मिसाइलों को विकसित करने के लिये उत्सुक है।

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