रघुराम राजन की जुबानी, भारत के लिए कैसा रहेगा 2018

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Raghuram Rajan

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने World Economic Forum 2018 में लोकतांत्रिक और विकासशील भारत की झलक पेश की। RBI (Reserve Bank of India) के पूर्व गवर्नर Raghuram Rajan भी इस सम्मेलन में शरीक हुए थे। एक सेशन को उन्होंने भी संबोधित किया। एक मीडिया हाउस से बात करते हुए रघुराम राजन ने सरकार द्वारा लिए जा रहे फैसले पर नाखुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मिलकर देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसले ले रहे हैं जो चिंता का विषय है। रघुराम राजन के मुताबिक नौकरशाही को ठीक से काम करने नहीं दिया जा रहा है। उनके मुताबिक नौकरशाह फैसले लेने में डर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उन्हें भ्रष्टाचार का आरोपी बना दिया जाएगा।

Centralized decision ठीक नहीं- राजन

अपने विशेष इंटरव्यू में RBI के पूर्व गवर्नर Raghuram Rajan ने कहा कि चीजें बहुत ज्यादा केंद्रित (Centralized) हो चुकी है जो ठीक नहीं है। अर्थव्यवस्था के लिए यह परिस्थिति अनुकूल नहीं है। नौकरशाही और सरकार के बीच तालमेल को लेकर रघुराम राजन ने पूछा कि 2.5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी को चलाने की क्षमता हमारे पास नहीं है ?

विकास की जरूरत रोजगार पैदा करने के लिए है- रघुराम राजन

वैश्विक एजेंसियों द्वारा भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार की प्रशंसा को लेकर Raghuram Rajan ने कहा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि आखिरकार विकास की जरूरत क्यों है ? विकास की जरूरत है क्योंकि करोड़ों लोगों को रोजगार देना है। क्या हम रोजगार पैदा करने में सक्षम हैं ? अगर बेरोजगारी की समस्या से निपटना है तो इंफ्रास्ट्रक्चर, कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों के जरिए ही बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार दिया जा सकता है। सरकार को चाहिए कि इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में बहुत बड़ा निवेश करे।

लंबे समय में GST के अच्छे परिणाम दिखाई देंगे

Raghuram Rajan ने जब पूछा गया कि 2018 भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से कैसा रहेगा तो जवाब में उन्होंने कहा कि नोटबंदी की वजह से 2017 में अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त हुई। बाद में GST (Goods and Sevice Tax) लागू किया गया जिसकी वजह से भी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। GST को लेकर उन्होंने कहा कि लंबे समय में इसके अच्छे परिणाम होंगे। GST की कमियों को लेकर उन्होंने कहा कि बहुत ऐसी समस्याएं होती हैं जो किसी काम को करने के वक्त आती है। इसलिए समस्याओं का समाधान करते हुए आगे बढ़ने की जरूरत है।

RBI को लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ समझना चाहिए

क्या Reserve Bank of India की आजादी कम हो गई है ? जवाब में Raghuram Rajan ने कहा कि ऐसा नहीं है। RBI के पास कई रास्ते हैं। सरकार, नौकरशाह और RBI के बीच संघर्ष की कहानी नई नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि देश को अगर आगे ले जाना है तो RBI को लोकतंत्र का पांचवा स्तंभ समझना चाहिए।

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