जानिए राहुल गांधी क्या कहते हैं और जनता क्या सोचती है कश्मीर के लिए…

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 25 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी कश्मीर दौरे का फैसला करके कशमकश में फँस गये हैं। क्योंकि सोशल मीडिया पर अब उन्हें कसके लताड़ लगाई जा रही है। उनकी कश्मीर यात्रा को लेकर अब लोग उनसे सवाल पूछ रहे हैं। लोगों का कहना है कि जितनी चिंता उन्हें कश्मीर को लेकर हो रही है, उतनी चिंता यदि उन्होंने अमेठी की, की होती तो उन्हें वायनाड नहीं जाना पड़ता। लोग यह भी पूछ रहे हैं कि केवल कश्मीर ही क्यों ? कांग्रेसी नेता जम्मू और लद्दाख के हालात का भी तो जायजा ले सकते थे, परंतु वह वहाँ क्यों नहीं गये, जहाँ कदाचित उन्हें जाने भी दिया जाता। कश्मीर मुद्दे को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी कुछ भी सोच रहे हों या इस मुद्दे को उछालकर राजनीतिक लाभ देख रहे हों, परंतु इतना तो पक्का है कि सोशल मीडिया पर लोग राहुल गांधी और कांग्रेस के रवैये का जो मूल्यांकन कर रहे हैं, उससे तो यही निष्कर्ष निकलता है कि राहुल गांधी खुद के और पार्टी के राजनीतिक पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मार रहे हैं।

कांग्रेस क्यों जानबूझकर हाथ आग में डाल रही है ?

जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने और राज्य का पुनर्गठन किये जाने के बाद जहाँ पूरे देश में जश्न मनाया गया, वहीं कांग्रेस जन भावनाओं के विपरीत दिशा में दौड़ती दिखी। खुद कांग्रेस के ही अनेक सीनियर और युवा नेताओं ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार का समर्थन किया, परंतु फिर भी कांग्रेस फैसला लेने में कमजोर साबित हुई, जब कांग्रेस की बैठक में भी इस मुद्दे को लेकर घमासान मचा तब भी कांग्रेस अड़ियल रवैया अपनाए रही। मोदी सरकार के विरोध की धुन में कहीं कांग्रेस पार्टी हित और देश हित से तो विचलित नहीं हो गई ? क्योंकि यह वही पार्टी है जो अपने अध्यक्ष का भी फैसला नहीं ले पाई है। इससे जाहिर है कि पार्टी की निर्णय-शक्ति कितनी कमजोर हो गई है। जब उसने फैसला लिया कि वह कश्मीर मुद्दे पर मोदी सरकार का समर्थन नहीं करेगी और विरोध करना जारी रखेगी तो उसका यह निर्णय भी ऐसा है जो जनभावना के विरुद्ध है। फिर कांग्रेस ने क्या सोचकर इस मुद्दे को हाथ में लिया है, कहीं वह जानबूझकर आग में अपना हाथ जला तो नहीं रही है ? वह कश्मीर मुद्दा उठा तो रही है, परंतु इसके लिये भी उसके पास कोई ठोस रणनीति नज़र नहीं आ रही है, यदि उसके आरोपों पर भरोसा कर भी लिया जाए कि कश्मीर में स्थिति सामान्य नहीं है तो कांग्रेस के पास क्या इसका कोई उचित हल है ? यदि हाँ तो कांग्रेस को साफ करना चाहिये कि वह क्या करना चाहती है। यह भी साफ नहीं है कि कांग्रेस इस मुद्दे से क्या राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है, क्योंकि जिस तरह से लोग उसके स्टैण्ड के खिलाफ बोल रहे हैं, उससे तो यही नतीजा निकलता है कि कांग्रेस अपनी रही-सही साख भी गँवा रही है और जन भावना के विरुद्ध काम कर रही है।

आप भी देखिए कश्मीर मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी क्या कहते हैं और उनके बयान पर लोगों ने क्या प्रतिक्रिया दी है।

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