मजदूर माता-पिता के पुत्र ने किया कमाल : कड़ी मेहनत से ISRO में पाई नौकरी

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 14 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। एक बार फिर सिद्ध हुआ है कि कड़ी मेहनत से कोई भी अपना भाग्य बदल सकता है और गरीबी को परास्त करके समृद्ध और सम्मानजनक जीवन की दिशा में कदम बढ़ा सकता है। मुंबई में मजदूर माता-पिता के मेहनती पुत्र ने इस किवदंती को चरितार्थ कर दिखाया है जिसमें कहा जाता है कि किस्मत को बदलना अपने हाथ में है। राहुल घोड़के नामक युवक ने ऐसा ही किया है और अपनी तथा अपने परिवार की किस्मत बदल दी है। मुंबई के चेंबूर इलाके में मरौली चर्च के पास स्थित नालंदा नगर की झोपड़पट्टी में एक दस बाई दस के कमरे में रहने वाले राहुल घोड़के ने गरीबी को मात देने वाली बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राहुल ने कड़ी मेहनत करके पढ़ाई की और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में टेक्नीशियन की नौकरी प्राप्त की है। राहुल की इस सफलता से उसकी माँ ही नहीं, अपितु पड़ोसी और रिश्तेदार भी गर्व करते हैं। हालाँकि झोपड़पट्टी से इसरो तक का सफर करने के लिये राहुल ने जो संघर्ष किया है, वह अन्य युवाओं के लिये भी प्रेरणादायी है।

कड़ी मेहनत करके किस्मत बदली

एक तंगहाल झोपड़पट्टी में रहने वाले राहुल के पिता मजदूरी करके परिवार का गुजारा करते थे और पढ़ाई में तेज उनका पुत्र परिवार को गुरबत से बाहर निकालने के लिये किताबी संघर्ष कर रहा था। हालांकि इसी दौरान राहुल के जीवन में एक ऐसा मोड़ आया जिसने राहुल को झकझोर कर रख दिया। राहुल जब 10वीं की परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन से पास हुआ तो इसी दौरान उसके पिता की मृत्यु हो गई। इस घटना से राहुल अंदर से टूट गया। अब परिवार का गुजारा करने की जिम्मेदारी नाबालिग राहुल के कंधों पर आ गई थी, परंतु राहुल ने हिम्मत नहीं हारी और पढ़ाई भी नहीं छोड़ी। राहुल शादियों में केटरर का काम करने लगा और माँ लोगों के घरों में कपड़े-बर्तन धोने का काम करने लगी। राहुल को दूसरा झटका तब लगा, जब वह काम करने के कारण पढ़ाई पर पूरा ध्यान नहीं दे पाया और 12वीं की परीक्षा में फेल हो गया। इसके बावजूद राहुल को रुकना मंजूर नहीं था, उसने चेंबूर के निकट गोवंडी में आईटीआई जॉइन कर ली और इलेक्ट्रोनिक्स का कोर्स शुरू कर दिया। राहुल दोबारा कोई झटका नहीं खाना चाहता था, इसलिये उसने मन लगा कर कोर्स की तैयारी की और अव्वल आया। फर्स्ट डिवीजन से कोर्स पूरा करने के बाद उसे एल एण्ड टी कंपनी में नौकरी मिल गई। इससे घर का गुजारा करना थोड़ा आसान हो गया, परंतु गरीबी को पूरी तरह से मात देना बाकी था। इसलिये राहुल ने नौकरी के साथ ही इंजीनियरिंग डिप्लोमा में एडमिशन ले लिया। इस प्रकार राहुल ने कड़ी मेहनत जारी रखी और नौकरी तथा पढ़ाई दोनों के साथ न्याय किया।

युवाओं के लिये राहुल बना प्रेरणा

बुजुर्गों ने कहा है कि पढ़ाई और मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाते। यह बात सही सिद्ध हुई और राहुल इंजीनियरिंग डिप्लोमा में भी पहले अंक से पास हो गया। जब राहुल को पता चला कि इसरो में डिप्लोमा इंजीनियर पद के लिये वेकेंसी निकली है तो उसने एंट्रेंस की तैयारी शुरू कर दी और यहाँ भी उसे सफलता मिली। राहुल देश भर में आरक्षित परीक्षार्थियों की श्रेणी में तीसरे और ओपन श्रेणी में 17वें स्थान पर पास हुआ। अब पिछले 2 महीने से राहुल इसरो में टेक्नीशियन के पद पर नौकरी कर रहे हैं। इस नौकरी ने लोगों के घरों में काम करने वाली माँ को गर्व करने का अवसर दिया है, वह अपने बेटे की कामयाबी पर फूली नहीं समाती हैं। यह खबर तेजी से फैल गई और राहुल के घर पर उसे तथा उसकी माँ को बधाई देने के लिये लोगों का तांता लग गया। पड़ोसियों के साथ-साथ रिश्तेदार भी घर आकर राहुल व उसकी माँ को बधाई दे रहे हैं, फूलों के गुलदस्ते के साथ अपने हाथों से मिठाई खिलाकर मुँह मीठा करवा रहे हैं। राहुल भी विनम्रता के साथ बड़ों के पाँव छूकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है। इस प्रकार राहुल ने गरीबी को मात दे दी है और एक सम्मानजनक नौकरी प्राप्त करके अपने पूर्वजों का मान बढ़ाया है। उसके घर पर जश्न का माहौल है। सचमुच राहुल की मेहनत अन्य युवाओं के लिये भी प्रेरणादायी है।

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