क्या राजस्थान में BJP की हार पहले से तय थी ?

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राजस्थान में अजमेर, अलवर की संसदीय सीट और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के लिए हुए उप-चुनाव (Rajasthan Bypoll) में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा है। अभी तक ये तीनों ही सीटें भाजपा के पास थी, लेकिन अब तीनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा हो गया है। जब राजस्थान में विधानसभा चुनाव और देश के लोकसभा चुनाव कुछ महीनें दूर ही हों, तो उप-चुनाव में मिली हार भाजपा के लिए तगड़ा झटका है।

बहरहाल चुनाव बाद स्थिति कुछ साफ हो रही है, जिससे पता चलता है कि उप-चुनावों में भाजपा की हार के पीछे कांग्रेस की बढ़िया रणनीति नहीं, बल्कि भाजपा से राजपूत समाज की नाराजगी थी। तो, आइए जानते हैं, वो कारण जिनके चलते भाजपा को राजस्थान में मुंह की खानी पड़ी।

Rajasthan Bypoll में करणी सेना का विरोध

पद्मावत फिल्म करणी सेना के लाख विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद रिलीज हो गई और अच्छा प्रदर्शन भी कर रही है। लेकिन लगता है कि अब इसका खामियाजा भाजपा को चुनाव (Rajasthan Bypoll) में हारकर चुकाना पड़ा है। दरअसल पद्मावत का विरोध कर रही करणी सेना फिल्म पर बैन ना लगाए जाने से सरकार से नाराज चल रही थी। यही वजह रही कि राजपूत स्वाभिमान की खातिर करणी सेना ने भाजपा को हराने पर जोर लगाया और जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को मिला।

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आनंदपाल एनकाउंटर

राजस्थान में अजमेर, अलवर संसदीय सीट राजपूत बहुल हैं और इनके समेत राजस्थान की कई सीटों पर राजपूत बड़ा प्रभाव रखते हैं। अजमेर और अलवर में राजपूतों की रावणा और चारण बिरादरी का दबदबा है। कुछ समय पहले पुलिस मुठभेड़ में मारा गया गैंगस्टर आनंदपाल रावणा बिरादरी से ताल्लुक रखता था। बता दें कि राजस्थान के युवाओं पर आनंदपाल का बड़ा प्रभाव था, जिस कारण आनंदपाल के एनकाउंटर से भी राजपूत बिरादरी भाजपा सरकार से नाराज थी। ये नाराजगी खत्म भी नहीं हुई थी कि पद्मावत फिल्म ने इस खाई को और चौड़ा कर दिया।

पता चला है कि अजमेर और अलवर सीट पर हुए उप-चुनाव (Rajasthan Bypoll) से पहले राजपूत नेताओं ने भाजपा को सबक सीखाने की अपील की थी। लगता है उस अपील का ही असर है कि भाजपा को तीनों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। उल्लेखनीय है कि राजस्थान में राजपूत वोटबैंक परंपरागत रूप से भाजपा के साथ रहा है, लेकिन इस बार यह वोटबैंक भाजपा के खिलाफ जाता दिखाई दे रहा है।

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सत्ता फेरबदल

राजस्थान में अधिकतर समय सत्ता फेरबदल का इतिहास रहा है। मतलब राजस्थान के लोग किसी भी सरकार को 5 साल का ही वक्त देते हैं। ऐसे में जब वसुंधरा राजे सरकार को पिछली बार मौका दिया गया तो अब बारी कांग्रेस की बनती है। बहरहाल राजपूत समाज अभी भले ही कांग्रेस के पाले में जाता दिखाई दे रहा है, लेकिन अभी भी भाजपा के पास मौका है। खुद राजपूत नेता मानते हैं कि अगर भाजपा अभी भी स्थिति संभाल ले तो उसकी सत्ता में वापसी हो सकती है।

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