ब्रज में रंगोत्सव , जानें लट्ठमार होली के बारे में- श्री अनंत बिहारी गोस्वामी जी

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हर साल होली का त्योहार बड़ी ही धूमधाम और उत्साह के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, एक-दूसरे के हाथ से पकवान खाते हैं और प्यार के रंगों में डूब जाते हैं। वहीं, अब होली आने में महज कुछ ही दिन बचे हैं। ऐसे में सभी लोग इस त्योहार की तैयारियों में लगे हुए हैं और ऐसी तैयारी बरसाने की लट्ठमार होली के लिए भी की जा रही है। लेकिन आप बरसाने की इस होली के बारे में कितना जानते हैं? इसी बीच हमारी बात ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के मुख्य सेवायत श्री अनंत बिहारी गोस्वामी जी के साथ हुई

ऐसे हुई थी शुरुआत
ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के मुख्य सेवायत श्री अनंत बिहारी गोस्वामी जी ने बताया कि द्वापरयुग में नंदगांव के नटखट कन्हैया अपने सखाओं के संग राधा व अन्य गोपियों के साथ होली खेलने और उन्हें सताने के लिए बरसाना पहुंचते थे। राधा और उसकी सहेलियाँ कृष्ण और उनके सखाओं की हरकतों से परेशान हो जाती थीं और उन्हें सबक सिखाने के लिए उन पर लाठियाँ बरसाती थीं। वही उनके वार से बचने के लिए, कृष्ण और उनके सखाओं ने ढाल का इस्तेमाल किया। धीरे-धीरे उनका प्रेमपूर्वक होली खेलने का तरीका एक परंपरा बन गया। तब से आज तक इस परंपरा का पालन किया जा रहा है इस दिन महिलाएं कुछ लोक गीत गाते हुए उन पुरुषों को लाठियों से पीटती हैं, जो उन पर रंग डालने आते हैं। इस दौरान सभी भगवान श्रीकृष्ण और मां राधे को याद करते हैं। वहीं, पुरुष खुशी-खुशी लाठियां सहन भी करते हैं। ये उत्सव पूरे एक सप्ताह तक चलता है और लोग इसे पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाते हैं।

लट्ठमार होली के दिन पूरे ब्रज में उत्साह देखने को मिलता है। नंदगांव के पुरुष और बरसाने की महिलाएं होली में भाग लेती हैं, क्योंकि कृष्ण नंदगांव के थे और राधा बरसाने की थीं। इस दौरान नंदगांव के लोग बरसाना की महिलाओं के साथ कमर पर फेंटा लेकर होली खेलने पहुंचते हैं। इस बीच बरसाना की महिलाएं उन पर लाठियों का इस्तेमाल करती हैं और पुरुष ढालों का उपयोग करके उनकी लाठी से बचने की कोशिश करते हैं। इस पर्व को देखने के लिए दूर-दूर से लोग मथुरा आते हैं।

जिसे लेकर पूरे देश में खासा उत्साह रहता है। वैसे तो होली का त्योहार मुख्य रूप से रंगों का त्योहार है। इस दिन हिंदू धर्म के लोग एकजुट होकर खुशी मनाते हैं और एक-दूसरे को प्यार के रंग में सराबोर कर अपनी खुशी का इजहार करते हैं।

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