गर्व से सीना चौड़ा कर देगी एक मरीन इंजीनियर की यह कविता : आप भी पढ़िए

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अहमदाबाद 31 जुलाई, 2019 (युवाPRESS)। हाल ही में भारत ने कारगिल विजय की बीसवीं वर्षगाँठ मनाई। 26 जुलाई, 1999 का ही वह दिन था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्र के समक्ष गर्व के साथ घोषणा की थी कि भारत ने कारगिल युद्ध में पाकिस्तान को परास्त कर विजय प्राप्त की है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार सहित समूचे देश में कारगिल विजय दिवस की बीसवीं वर्षगाँठ शौर्य व गौरवपूर्ण तरीके से मनाई गई। देश भर में अनेक कार्यक्रम हुए, जिसमें कारगिल युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों के प्रति कृतज्ञता प्रकट की गई, तो भारतीय सेना (INDIAN ARMY) और भारतीय वायुसेना (INDIA AIR FORCE – IAF) के अदम्य साहस को याद किया गया।

इसी कड़ी में एक मरीन इंजीनियर संजीव पँवार ने भी कारगिल विजय दिवस पर एक मार्मिक और शौर्यपूर्ण कविता लिख कर कारगिल युद्ध में जान की बाज़ी लगा देने वाले वीर जवानों के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट की है। इस कविता के माध्यम से संजीव पँवार ने युद्ध के मैदान में दुश्मनों से लोहा लेने वाले एक जवान के मन में अपने माता-पिता, पत्नी और भाई के प्रति उफनती भावना को प्रकट किया है, तो दुश्मनों को ललकारने वाली उद्घोषणा को भी व्यक्त किया है।

आप भी पढ़िए मरीन इंजीनियर संजीव पँवार की यह कविता :

माँ मेरी कलम से शायद आख़िरी बार लिखने जा रहा हूँ
दूध जो रगों में तेरा, उसकी शान बनने जा रहा हूँ
गिद्ध जो देखे तू आसमान में, जी-खोल दहाड़ देना
महादेव की सौगंध, दुश्मन का काल बनने जा रहा हूँ ।।

हाथ पकड़ तेरा चलना सीखा, तेरे कंधे मेरा सिंहासन बने
ओ बापू मेरे, क्या कहूँ तुम्हें, बाज़ुओं को कुश्ती तूने सिखाई है
ख़ून खौल रहा नसों में, जरासंध ने सीमा फिर से लांघी है
तेरे नाम का तिलक लगा कर, उसका श्राद्ध बनके जा रहा हूँ।।

अग्नि समक्ष सात जन्मों का धागा बांध लिया तुमने
दो पल श्रृंगार में छलक रहे नैनों के… और मैं,
तेरे सिंदूर से इतिहास लिखने जा रहा हूँ…
बल कहीं कम न पड़े मेरा, हौसला तुझसे मांग रहा हूँ…
धड़कनें तो बढ़ रहीं, पर बात एक मान ले तू।
खोल दे तू केश अपने…
कौरवों का शीश लेने जा रहा हूँ।।

भाई मेरे, बचपन के खेल सभी आँखों में चमक रहे…
दादा के सुनाए, आला-उदल के वो किस्से कानों में गूंज रहे
बिजसी-सा बन मैं उन काले बादलों का सीना जब चीरूँगा
खेतों में उस देवता पर ‘जयपाल’ तू लिख देना।

और वादियों तुम धीर धरो
हरे रंग के इन झंडों को, लाल करेंगे
लाल तेरे आ रहे, ओ भारत माता
लाल तेरे आ रहे
लाल तेरे आ रहे ।।

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