‘मंदी विलाप’ की पोल खोल रहा ई-कॉमर्स बिज़नेस : करोड़ों की ख़रीदारी कर रहे लोग

*ई-कॉमर्स ने 6 दिन में की 21 करोड़ की कमाई

*अमेजॉन और फ्लिपकार्ट ने अकेले कमाए 19 हजार करोड़

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 10 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। आजकल देश की अर्थव्यवस्था में मंदी पर चौतरफा चर्चा हो रही है। विपक्षी पार्टी तो ढोल लेकर मंदी का प्रचार करने निकल पड़ी है, वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी भारत में बढ़ती मंदी की चेतावनी देते हुए अर्थव्यवस्था से जुड़े ऐसे कई आँकड़े जारी किए हैं, जो आर्थिक मंदी की ओर संकेत करता है। जीडीपी ग्रोथ से लेकर ऑटो कंपनियों की बिक्री में गिरावट और शेयर बाजार में कमजोरी के साथ-साथ कंपनियों में हो रही कर्मचारियों की छँटनी तक को आर्थिक मंदी से जोड़ा जा रहा है। इतना ही नहीं, देश के बड़े-बड़े आर्थिक शोधकर्ता और सलाहकारों ने तो भारत में तथाकथित मंदी का ढिंढोरा पीट ही दिया है, परंतु ये क्या ? तथाकथित आर्थिक मंदी के बावजूद लोग करोड़ों की ऑनलाइन खरीदारी कैसे कर रहे हैं ? ऑनलाइन कंपनियाँ करोड़ों का कारोबार कहाँ से कर रही हैं ? ऐसे कई सवाल हैं जो हाल ही में जारी की गई एक रिपोर्ट ने खड़े कर दिए हैं।

जी हां, बेंगलुरू की रिसर्च कंपनी रेडसीयर कंसल्टेंसी की ताज़ा रिपोर्ट ने मंदी की पोल खोल दी है और उन सभी आर्थिक मंदी का विलाप कर रहे लोगों के मुँह पर ताला लगा दिया है जो भारत में बढ़ती भयानक मंदी की चेतावनियाँ देते नज़र आ रहे हैं। दरअसल रेडसीयर कंसल्टेंसी के सर्वेक्षण के अनुसार ऑनलाइन शॉपिंग यानी ई-कॉमर्स (ई-वाणिज्य) कंपनियाँ मंदी के इस दौर में भी धड़ल्ले से अपना कारोबार कर रही हैं और करोड़ों के उत्पाद बेच रही हैं। इन कंपनियों ने महज 6 दिन में 21 हजार करोड़ रुपये के उत्पाद बेचे हैं। अब सोचने वाली बात यह है कि क्या वास्तव में देश मंदी की मझधार में गोते लगा रहा है या फिर ये सिर्फ एक तथाकथित चर्चा तक ही सीमित है ?

ये बात तब सामने आई है जब ऑनलाइन कंपनियों ने 29 सितंबर से 4 अक्टूबर तक ग्रेट इंडिया फेस्ट‍िवल का आयोजन किया और इसी दौरान मात्र 6 दिन में ई-कॉमर्स (इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन) के जरिए अपने ग्राहकों को 3 अरब डॉलर यानी लगभग 21,335 करोड़ रुपये का खुदरा सामान बेचा। ई-कॉमर्स कंपनियों की कमाई के इस आँकड़े ने जहाँ एक तरफ लोगों को चौंका दिया है, वहीं दूसरी तरफ तथाकथित मंदी की पोल भी खोल दी है। अनुमान से भी अधिक कमाई कर रही इन कंपनियों के ताज़ा आँकड़े आर्थिक मंदी की चर्चा को बेबुनियाद सिद्ध कर रहे हैं। इतना ही नहीं, ई-कॉमर्स उद्योग ने इस वर्ष बिक्री के मामले में अपने सभी पुराने रिकॉर्डस् भी तोड़ दिये हैं। आइए जानते हैं क्या है ये ई-कॉमर्स ?

क्या है ई-कॉमर्स उद्योग ?

1960 में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे कि मोबाइल एप्लिकेशन और इंटरनेट के माध्यम से उपज खरीदने और बेचने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसे इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (Electronic Commerce) यानी ई-कॉमर्स का नाम दिया गया था। ई-कॉमर्स ऑनलाइन रिटेल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन दोनों को पारिभाषित करता है। पिछले कई दशक से ई-कॉमर्स की लोकप्रियता में काफी वृद्धि हुई है। साथ ही यह पारंपरिक दुकानों की जगह भी ले रहा है। 1990 में वाणिज्यिक उद्यमों ने विज्ञापन, बिक्री और विश्व में अपने उत्पादनों की बिक्री बढ़ाने के लिये इंटरनेट को एक संभावित साधन के रूप में प्रयोग करना शुरू किया था। आज ऑनलाइन शॉपिंग नेटवर्क वाणिज्यिक गतिविधियों का एक बढ़ता केंद्र बन चुका है। 21वीं शताब्दी ने ऑनलाइन व्यापारों के लिए अपार अवसर और प्रतिस्पर्धा का वातावरण प्रदान किया है, जिसके परिणाम स्वरुप अनेक ऑनलाइन व्यापारिक कंपनियों की स्थापना हुई। इतना ही नहीं, कई पारम्परिक कंपनियाँ अपनी ऑनलाइन शाखाएँ भी खोल रही हैं। शुरुआत में लोग ऑनलाइन अपने बैंक की जानकारी देने और ऑनलाइन उत्पाद खरीदने में थोड़ा घबराते थे और उन्हें यह भी शंका रहती थी कि कहीं उनका एकाउंट हैक न हो जाए, परंतु धीरे-धीरे ई-कॉमर्स ने ग्राहकों को सुरक्षित सेवा और उच्च क्वॉलिटी का उत्पाद पहुँचा कर व्यापार जगत में अपनी एक अलग पहचान बना ली है। आज ई-कॉमर्स इंटरनेट का सबसे महत्वपूर्ण पहलु बन चुका है। ई-कॉमर्स उपभोक्ताओं को कम समय और बिना किसी बाधा के वस्तुओं और सेवाओं का इलेक्ट्रॉनिक रूप से आदान-प्रदान करता है। इंटरनेट पर सामान ख़रीदना और बेचना ई-कॉमर्स के सबसे लोकप्रिय उदाहरणों में से एक है। इसके अतिरिक्त ऑनलाइन टिकट, ऑनलाइन नीलामी साइट, इंटरनेट बैंकिंग, ऑनलाइन शिक्षा ई-कॉमर्स के कार्य क्षेत्र में आते हैं। ई-कॉमर्स में व्यापार करने के तरीकों को कई भागों में बाँटा भी गया है जैसे :-

  1. Business to Business E-commerce (B2B E-commerce) : यह दो व्यवसायों (Business) के बीच किए गए लेन-देन से संबंधित है। जैसे अगर कोई कंपनी खुद कोई प्रोडक्ट नहीं बनाती है और किसी दूसरी कंपनी से खरीद कर सामान बेचती है, तो वह B2B के अंतर्गत आता है।
  2. Business to Consumer Ecommerce (B2C Ecommerce) : इसमें एक बिज़नेस और कंज्यूमर के बीच लेन-देन होता है। यह ई-कॉमर्स का सबसे व्यापक रूप है। Flipkart, Amazon जैसी कंपनी से उपभोक्ता सीधे वस्तु खरीद सकता है ।
  3. Consumer to Business Ecommerce (C2B Ecommerce) : इसमें भी Consumer और Business के बीच लेन-देन होता है। जैसे एक Consumer वेबसाइट बनाने के लिए ऑनलाइन रिक्वायरमेंट देता है और कोई कंपनी इसके लिए सही कीमत पर वेबसाइट बना कर देने का ऑफर करती है।
  4. Consumer to Consumer Ecommerce (C2C E-commerce) : इसमें दो उपभोक्ताओं के बीच लेन-देन होता है। eBay, OLX जैसी साइट्स से एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से उत्पाद या सेवा लेता है।
  5. Business To Government (B2G) : इसमें ई-कॉमर्स कंपनियों और सार्वजनिक प्रशासन या सरकार के बीच ऑनलाइन किए गए सभी लेन-देन शामिल हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें बड़ी मात्रा में और विभिन्न प्रकार की सेवाएँ ली और दी जाती हैं। ख़ास तौर पर वित्तीय, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार, कानूनी दस्तावेज और रजिस्ट्रार आदि जैसे क्षेत्र इसमें शामिल हैं।
  6. Consumer To Government (C2G) : इसमें उपभोक्ता और सरकार के बीच किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन शामिल हैं। जैसे कर (Tax) का भुगतान करना, स्वास्थ्य सेवाओं का भुगतान, दूरस्थ शिक्षा प्राप्त करना इत्यादि।

फेस्टिव सीज़न में सबसे आगे रहीं अमेजॉन और फ्लिपकार्ट

ई-कॉमर्स का ही रूप हैं अमेजॉन और फ्लिपकार्ट। जिन्होंने ऑनलाइन खरीदारी की दुनिया में धूम मचा रखी है। बेंगलुरू की रिसर्च कंपनी रेडसीयर कंसल्टेंसी के संस्थापक और CEO (Chief executive officer) अनिल कुमार ने बताया कि 6 दिन की बिक्री में वॉलमार्ट की स्वामित्व वाली कंपनी फ्लिपकार्ट और अमेजॉन की भागीदारी 90 फीसदी रही, यानी इन दोनों कंपनियों ने ही 19 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बिक्री की है। 55 फीसदी के साथ मोबाइल, बिक्री के मामले में सबसे आगे रहा। वहीं इस साल छोटे शहरों और कस्बों से ज्यादा मांग आने के कारण कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन उत्पाद और बड़े अप्लायंसेज़ की खूब बिक्री हुई है। फ्लिपकार्ट ने फेस्ट‍िव सीजन में 60 से 62 फीसदी हिस्सेदारी का दावा करते हुए स्वयं को लीडर बताया, तो वहीं अमेजॉन के प्रवक्ता का दावा है कि, ‘ग्रेट इंडिया फेस्ट‍िवल के दौरान ट्रांजेक्शन करने वाले कस्टमर्स में अमेजॉन की सबसे ज्यादा 51 फीसदी भागीदारी रही। साथ ही ऑर्डर में 42 फीसदी और वैल्यू में 45 फीसदी भागीदारी रही। त्योहारी सीज़न की बिक्री के पहले संस्करण में उम्मीद से अधिक खरीदारी को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि दीवाली तक सिर्फ एमेजॉन और फ्लिपकार्ट की ऑनलाइन बिक्री ही 6 अरब डॉलर यानी 42,671 करोड़ रुपये तक पहुँच सकती है। अब कंपनियों की इतनी कमाई और लोगों द्वारा अधिक मात्रा में की जा रही खरीदारी से आप ही निर्णय लें कि भारत मंदी के दौर से गुजर रहा है या नहीं?

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