गुजरात सरकार ने घटाई डॉक्टरों की ‘सजा’, पर दंड किया कठोर : जानिये क्या है मामला ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 14 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। आम तौर पर ग्रामीण इलाकों में सामूहिक स्वास्थ्य केन्द्रों (CHC) या प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (PHC) में सेवाएँ देने को नवनियुक्त डॉक्टर अपने लिये सजा समझते हैं। हालाँकि MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में 3 साल तक सेवाएँ देने वाले मेडिकल छात्रों के लिये गुजरात सरकार राहत लेकर आई है। राज्य सरकार ने उनकी ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की अवधि 3 वर्ष से घटाकर 1 वर्ष कर दी है, परंतु इसके बावजूद यदि कोई एमबीबीएस डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्र में नहीं जाना चाहता है तो उसे सरकार के पास 20 लाख रुपये के दंड भरपाई करनी होगी। इसके बाद ही उसे मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (MCI) से प्रमाणपत्र प्राप्त होगा और वह प्रेक्टिस करने के योग्य बन पाएगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी : नितिन पटेल

राज्य के उप मुख्य मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल ने यह महत्वपूर्ण घोषणा की है। उनके अनुसार सरकार के इस फैसले से नये डॉक्टरों पर ग्रामीण इलाकों में सेवाएँ देने का दबाव बनेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। पटेल के अनुसार सरकारी लाभ प्राप्त करके एमबीबीएस की डिग्री पाने वाले विद्यार्थियों को अब से ग्रामीण क्षेत्रों में 3 वर्ष के स्थान पर मात्र एक वर्ष के लिये सेवाएँ देनी होंगी और 5 लाख रुपये के बॉण्ड के साथ 15 लाख रुपये सहित कुल 20 लाख रुपये की बैंक गारंटी देनी होगी। यह गारंटी 300 रुपये के स्टेंप पेपर पर देनी होगी। यह नियम इसी साल से लागू होगा और ऐसे नये डॉक्टरों पर ही लागू होगा, जो सरकारी मदद से डॉक्टर बनेंगे। मैनेजमेंट कोटे से डिग्री प्राप्त करने वाले मेडिकल छात्रों पर यह नियम लागू नहीं होगा। जो मेडिकल छात्र डिग्री लेने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएँ देना नहीं चाहेंगे, उन्हें राज्य सरकार के समक्ष 20 लाख रुपये का आर्थिक दंड भरपाई करना होगा। इसके बाद ही उन्हें एमसीआई से प्रमाणपत्र प्राप्त होगा और वह निजी प्रेक्टिस करने के योग्यता प्राप्त कर पाएँगे। पटेल के अनुसार बॉण्ड के लिये मेडिकल छात्रों को किसी भी राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा पिछले तीन वर्ष से लगातार 40 करोड़ से अधिक की डिपोजिट रखने वाले शिड्यूल बैंक या इतनी ही डिपोजिट रखने वाले राज्य के नागरिक सहकारी बैंक से गारंटी दे सकेंगे। हालाँकि सरकार ने गरीब मेडिकल छात्रों, जिनके खुद के पास अथवा जिनके माता-पिता सहित परिवार के पास कोई सम्पत्ति न हो या जिनके पास बैंक गारंटी देने की क्षमता न हो, उन्हें बैंक गारंटी या संपत्ति गारंटी देने से मुक्त रखा है।

सरकारी अस्पतालों, CHC, PHC में डॉक्टरों के 12,055 पद खाली

उल्लेखनीय है कि सरकार का मानना है कि उसके इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले के दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। अभी ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की जो कमी है, वह और बढ़ सकती है। अभी राज्य में सरकारी-सार्वजनिक अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों आदि में कुल मिलाकर 12,055 अर्थात् 28 प्रतिशत डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं। इनमें से सरकारी अस्पतालों में 4,644, सीएचसी में 3,916 और पीएचसी में 3,495 पद खाली हैं। इन खाली पदों में से वर्ग 3 और 4 के पदों को संविदा एवं आउट सोर्सिंग पद्धति से भरा गया है। जबकि वर्ग 1, 2 व 3 में 45 प्रतिशत पद रिक्त हैं। एक वर्ष के नियम से और भी पद रिक्त होंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता और कम हो जाने की संभावना है।

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