“भारत को ‘शरणार्थियों की राजधानी’ नहीं बनने दे सकते”: सरकार

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रोहिंग्या शरणार्थियों (Rohingya Refugee) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसके तहत उन्होंने आरोप लगाए हैं कि BSF रोहिंग्या शरणार्थियों को पीछे धकेल रही है। इसके लिए मिर्ची पाउडर और बेहोश करने वाले हथगोलों का प्रयोग किया जा रहा है। इस मामले पर जवाब देते हुए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि “भारत को ‘शरणार्थियों की राजधानी’ (Refugee Capital) नहीं बनने दे सकते।”

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एडिशनल सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि “हम भारत को दुनिया की शरणार्थी राजधानी  (Refugee Capital) नहीं बनने दे सकते। इस तरह तो पूरी दुनिया से शरणार्थियों की बाढ़ हमारे देश में आ जाएगी।” एडिशनल सॉलीसिटर जनरल ने सर्वोच्च अदालत को बताया कि “रोहिंग्या मामले में सरकार बात कर रही है और उसे ही इस पर फैसला करने दिया जाए।” तुषार मेहता ने कहा कि “यह कोई ऐसा मामला नहीं है, जिसमें अदालत को हस्तक्षेप करना पड़े।”

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रोहिंग्या शरणार्थियों (Rohingya Refugee) की याचिका पर जवाब देने के लिए एडिशनल सॉलीसिटर जनरल ने कुछ वक्त मांगा है। जिसके बाद इस मामले पर अगली सुनवाई 7 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई है। बता दें कि रोहिंग्या शरणार्थियों की तरफ से वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने यह याचिका दाखिल की है। प्रशांत भूषण ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया कि “बॉर्डर पर रह रहे शरणार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है और वो लोग बेहद ही बुरे हालात में रहने को मजबूर हैं।”

वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार का कहना है कि “शरणार्थियों को नैतिक तौर पर आधारभूत सुविधाएं दी जानी चाहिए। हम वापस उन्हें मौत के मुंह में नहीं धकेल सकते। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए।” वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के वकील गोपाल सुब्रमण्यम का कहना है कि “शरणार्थियों के मुद्दे को राजनैतिक तौर पर सुलझाने की जरुरत है।”

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