2000 के नोट बंद करने की तैयारी, क्या है वजह ?

sbi report says rbi holding back 2000 notes

Demonetisation के एक साल बाद हो सकता है कि RBI (Reserve Bank of India) अबकी बार 2000 के नोट को चलन से बाहर कर दे। इसकी जानकारी SBI (State Bank of India) ने अपनी रिपोर्ट में दी है। SBI की रिपोर्ट के मुताबिक RBI 2000 के नोटों को अपने पास रोक सकता है या फिर इसकी प्रिटिंग पर रोक लग सकता है।

2463 अरब रुपए के नोट RBI के पास 

8 दिसंबर तक बाजार में करीब 13324 अरब रुपए की बड़ी राशि के नोट मार्केट में थे। वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) की तरफ से लोकसभा में दिए गए बयान में कहा गया कि 8 दिसंबर तक RBI ने 500 के 1695.7 करोड़ नोट और 2000 के 365.4 करोड़ नोट छापे हैं। कुल मिलाकर 500 और 2000 के नोटों की कुल कीमत करीब 15 हजार 787 अरब होता है। इस हिसाब से 2463 (15787-13324) अरब के बड़े नोटों की छपाई तो कर दी गई है लेकिन RBI ने इसे सर्कुलेशन में नहीं लाया है।

Demonetisation के बाद जारी किए गए थे 2000 के नोट

8 नवंबर 2016 को जब Demonetisation का फैसला लिया गया था तब बाजार में 85 फीसदी से ज्यादा नोट  500 और 1000 रुपए के रूप में थे। जब 500 और 1000 के नोटों का legal tender समाप्त कर दिया गया तो नकद की खासी तंगी हो गई थी। नोट बदलवाने के लिए बैंकों के बाहर लंबी-लंबी लाइनें लग गई थी। नकद की किल्लत को देखते हुए RBI ने तुरंत 500 और 2000 के नए नोटों को जारी किया था। नोटबंदी के बाद RBI ने 200 के नए नोट को भी जारी किया।

2000 के नोट को लेकर Economists उठाते रहे हैं सवाल

Economic experts ने नोटबंदी के फैसले का हमेशा स्वागत किया लेकिन 2000 के नोट जारी करने को लेकर असहमति जारी की । उनका कहना था कि जिस मकसद से 500 और 1000 के नोट बंद किए गए हैं उसको धक्का पहुंचा है। इसके अलावा 2000 के नोट की वजह से लेन-देन (Transaction) में भी मुश्किल का सामना करना पड़ता है। SBI (State Bank of India) की रिपोर्ट के लिहाज से देखें तो अगर 2000 रुपए के नोट को धीरे-धीरे सर्कुलेशन में कम किया जाता है तो कुल करेंसी में छोटे नोटों का शेयर 35 फीसदी तक पहुंच सकता है। Black money के खिलाफ लड़ाई में इससे काफी मदद मिलेगी।

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